10 साल फरार रहे तीन आरोपी गिरफ्तार, नाबालिग को 55 हजार में गुजरात बेचने का आरोप
नागपुर की लोकल क्राइम ब्रांच, लोहमार्ग की टीम ने एक पुराने मामले में बड़ी कामयाबी हासिल की है। दस साल से पुलिस को चकमा दे रहे तीन आरोपियों को आखिरकार धर दबोचा गया है। इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, इन आरोपियों पर शिकायतकर्ता की 17 साल की बेटी को गुजरात में 55 हजार रुपए में बेचने का गंभीर आरोप है।
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी। लेकिन उसके बाद से ही तीनों आरोपी पुलिस की पहुंच से बाहर हो गए थे। इतने लंबे समय तक फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस टीम लगातार लगी हुई थी।
सीनियर अफसरों के निर्देश पर लोकल क्राइम ब्रांच की टीम फरार आरोपियों की गतिविधियों और उनके छिपने की जगहों पर नजर रखे हुए थी। इसी दौरान 21 सितंबर को पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि तीनों आरोपी नागपुर में ही कहीं छिपकर रह रहे हैं।
सूचना पक्की होने के बाद पुलिस टीम ने फौरन एक्शन लिया। खरबी रोड इलाके में जाल बिछाकर स्पेशल टीम ने तीनों आरोपियों को पकड़ लिया। दस साल तक पुलिस को चकमा देते रहे आरोपियों की गिरफ्तारी से इस पुराने मामले की जांच को बड़ी मदद मिली है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शुभम विकास पातुरकर (32), रीता विकास पातुरकर (60) और नेहा इरफान शेख (30) के तौर पर हुई है। तीनों रोशनबाग, खरबी रोड के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नाबालिग को गुजरात ले जाने और कथित तौर पर बेचने की इस पूरी घटना में हर आरोपी का क्या रोल था। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि इतने सालों तक आरोपी कहां-कहां छिपे रहे और इस दौरान किन लोगों के संपर्क में थे।
यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक मंगेश शिंदे, अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. दत्ताराम राठोड, उपविभागीय पुलिस अधिकारी रवींद्र शिंदे और सहायक पुलिस अधीक्षक पांडुरंग सोनावणे की देखरेख में हुई।
टीम में निरीक्षक पंजाबराव डोले, सहायक निरीक्षक पृथ्वीराज घोरपड़े, उपनिरीक्षक दिनकर भुतेकर के साथ पुलिस के कई जवान शामिल रहे। पुलिस की इस कार्रवाई से एक दशक से लटके इस मामले में बड़ी प्रगति हुई है।