गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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स्ट्रोक के शुरुआती संकेत अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाते हैं, डॉक्टर बोले: इलाज में देर न करें

स्ट्रोक के शुरुआती संकेत अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाते हैं, डॉक्टर बोले: इलाज में देर न करें तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सेहत PT24 टीम

विश्व स्ट्रोक दिवस पर पुणे के अपोलो हॉस्पिटल्स के डॉ. इशांत रेगे ने कहा कि स्ट्रोक के लक्षण पहचानने में देरी से इलाज का मौका घट सकता है।

अचानक चक्कर आना, बोलने में दिक्कत होना या एक हाथ में कमज़ोरी महसूस होना, ये लक्षण शुरू में बहुत गंभीर नहीं लगते। कई बार लोग इन्हें थकान, वक्त पर खाना न खाने या थोड़े आराम की ज़रूरत का नतीजा मान लेते हैं। लेकिन ये लक्षण अचानक दिखें तो स्ट्रोक यानी मस्तिष्क के दौरे का संकेत हो सकते हैं। विश्व स्ट्रोक दिवस के मौके पर यह बात सामने रखी गई है कि स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है और इलाज के लिए गुज़रा हर पल मरीज़ के ठीक होने की संभावना पर असर डाल सकता है।

पुणे के अपोलो हॉस्पिटल्स में न्यूरोसर्जरी और न्यूरोइंटरवेंशन के कंसल्टेंट डॉ. इशांत रेगे के मुताबिक स्ट्रोक के इलाज में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मरीज़ और उसके घरवाले शुरुआती खतरे के लक्षण वक्त पर पहचान नहीं पाते। डॉ. रेगे कहते हैं, "लक्षण अपने आप कम हो जाएंगे, इस उम्मीद में वे इंतज़ार करते हैं, घरेलू नुस्खे आज़माते हैं या अस्पताल जाना टाल देते हैं। लेकिन इस देरी से वक्त पर इलाज मिलने की संभावना घट सकती है और हमेशा के लिए अपंगता का खतरा बढ़ सकता है।"

स्ट्रोक तब आ सकता है जब दिमाग के किसी हिस्से को खून की सप्लाई रुक जाए, या दिमाग की कोई नस फट जाए। पूरी ऑक्सीजन न मिलने से दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है। दिमाग का कौन सा हिस्सा प्रभावित हुआ है, इसके हिसाब से मरीज़ को चलने-फिरने, बोलने, देखने, शरीर का संतुलन बनाए रखने या बातें समझने में परेशानी हो सकती है।

स्ट्रोक के प्रमुख खतरे के लक्षणों में ये बातें गिनाई गई हैं। चेहरा एक तरफ झुक जाना, यानी मुस्कुराते वक्त चेहरे का एक हिस्सा दूसरे से अलग या नीचे लटका दिख सकता है। हाथ में कमज़ोरी या सुन्नपन, यानी अचानक एक हाथ में कमज़ोरी लगे या हाथ ऊपर उठाना मुश्किल हो। बोलने में दिक्कत, यानी शब्द साफ न निकलना, बात अटकना या दूसरों की बात समझने में परेशानी होना। अचानक नज़र में बदलाव, यानी धुंधला दिखना या देखने में तकलीफ होना। शरीर का संतुलन बिगड़ना, यानी अचानक चक्कर आना, चलने में दिक्कत होना या शरीर का तालमेल गड़बड़ाना। और तेज़ सिरदर्द, यानी बिना किसी साफ वजह के अचानक और असहनीय सिरदर्द भी खतरे का संकेत हो सकता है।

डॉ. रेगे ने बताया, "स्ट्रोक के लक्षण बिना दर्द के भी दिख सकते हैं, इसलिए अक्सर लोग हालात की गंभीरता नहीं समझते। कुछ ही मिनटों में लक्षण गायब हो जाएं तब भी उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। ये लक्षण ट्रांज़िएंट इस्केमिक अटैक (TIA) यानी अस्थायी स्ट्रोक या 'मिनी स्ट्रोक' के हो सकते हैं। ऐसे में भी फौरन मेडिकल जांच करवाना ज़रूरी है।" उन्होंने यह भी कहा कि लक्षण हमेशा तेज़ रूप में नहीं दिखते। कई बार उन्हें थकान, कमज़ोरी या कोई अस्थायी शारीरिक दिक्कत समझ लेने की गलती हो सकती है।

तुरंत मेडिकल मदद क्यों ज़रूरी है, इस पर बताया गया कि स्ट्रोक का इलाज उसके प्रकार, लक्षण शुरू होने के वक्त और मरीज़ की हालत पर निर्भर करता है। कुछ इलाज एक तय समय सीमा के भीतर ही दिए जा सकते हैं, इसलिए मरीज़ को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना बेहद अहम है।

स्ट्रोक का शक होने पर परिवार वालों के लिए ये बातें बताई गई हैं। लक्षण कम होने का इंतज़ार किए बिना फौरन एम्बुलेंस या इमरजेंसी मेडिकल सेवा से संपर्क करें। लक्षण ठीक कब शुरू हुए या मरीज़ को आखिरी बार सामान्य हालत में कब देखा गया था, इसका वक्त नोट कर लें। और घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें, न ही मेडिकल मदद के बिना लक्षणों का इलाज करने की कोशिश करें।

क्या स्ट्रोक का खतरा घटाया जा सकता है, इस सवाल पर कहा गया कि हर स्ट्रोक टाला नहीं जा सकता, लेकिन जीवनशैली में कुछ बदलाव खतरा कम करने में मदद कर सकते हैं। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को काबू में रखें। तंबाकू का सेवन टालें और डॉक्टर की सलाह के मुताबिक बाकी जोखिम वाली चीज़ों पर नियंत्रण रखें। नियमित शारीरिक गतिविधि करें और संतुलित खाना खाएं। पहले से मौजूद सेहत की दिक्कतों के लिए डॉक्टर से सलाह लें और तय दवाइयां नियमित लें। स्ट्रोक के मामले में एक बात याद रखना ज़रूरी है कि लक्षणों के गंभीर होने का इंतज़ार न करें। खतरे के लक्षण वक्त पर पहचानकर फौरन मेडिकल मदद ली जाए तो मरीज़ की ज़िंदगी में बड़ा सकारात्मक बदलाव आ सकता है।

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