सिंहगढ़ किले की 9 करोड़ रुपये से होगी मरम्मत, पुरानी हवेली में बनेगा इतिहास का संग्रहालय
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पुरातत्व विभाग ने सिंहगढ़ किले के संरक्षण का 9 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें दरवाजों और दीवारों की मरम्मत, पत्थर का रास्ता और संग्रहालय शामिल हैं।
सिंहगढ़ किले में आने वाले लोगों को जल्द ही यहां के इतिहास की बेहतर जानकारी मिल सकती है और किले की कुछ अहम धरोहरों तक पहुंचना भी आसान हो सकता है। पुरातत्व विभाग ने इसके लिए 9 करोड़ रुपये का संरक्षण प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें किले के प्रवेश द्वारों की मरम्मत, टूटी दीवारों की बहाली और किले का अतीत दिखाने वाला संग्रहालय बनाना शामिल है।
जिलाधिकारी जितेंद्र डूडी ने बताया कि इस काम के लिए पैसा जिला योजना समिति (डीपीसी) से मिलेगा। टेंडर की प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है।
प्रस्ताव का एक बड़ा हिस्सा पार्किंग से तानाजी मालुसरे के स्मारक तक के रास्ते को बेहतर बनाने का है। इसके लिए करीब 750 मीटर लंबा पत्थर का पैदल रास्ता बनाने की योजना है, ताकि पर्यटक आसानी से वहां पहुंच सकें। विभाग किले के पहले तीन प्रवेश द्वारों की भी मरम्मत करना चाहता है। इसमें दोनों तरफ की पत्थर की सीढ़ियां और उनके आसपास की सुरक्षा दीवारें भी आती हैं।
काम सिर्फ प्रवेश द्वारों तक सीमित नहीं रहेगा। विभाग ने किले की किलाबंदी की करीब 315 रनिंग मीटर क्षतिग्रस्त दीवारों को चिह्नित किया है। इनकी मरम्मत अगले चरण में की जाएगी। किले की पुरानी संरचना Devtake भी बहाली की योजना में शामिल है।
पर्यटकों को रास्ता समझाने और ऐतिहासिक जानकारी देने पर भी ध्यान दिया गया है। किले में अलग-अलग जगहों पर उसकी अहमियत बताने वाले साइनबोर्ड और दिशा बताने वाले निशान लगाए जाएंगे। ये यूनेस्को के दिशानिर्देशों के मुताबिक प्रस्तावित हैं, ताकि लोग किले में घूमते हुए उसकी विरासत के बारे में भी जान सकें।
योजना में छत्रपति राजाराम महाराज की समाधि के पीछे बनी एक पुरानी हवेली को नया उपयोग देने की बात भी है। इस पारंपरिक हवेली को सिंहगढ़ के इतिहास पर केंद्रित संग्रहालय और इंटरप्रिटेशन सेंटर में बदलने का प्रस्ताव है।
इस केंद्र में जानकारी वाले पैनल, चुनी हुई प्रदर्शनियां और डिजिटल डिस्प्ले के जरिए किले का ऐतिहासिक सफर दिखाया जाएगा। इसकी बनावट में पारंपरिक हवेली शैली की वास्तुकला बरकरार रखी जाएगी, ताकि पर्यटकों के लिए बनी यह नई सुविधा किले के ऐतिहासिक स्वरूप से मेल खाए।
इन सभी कदमों का मकसद सिंहगढ़ की संरचनाओं को सुरक्षित रखना और उसके इतिहास व विरासत को पर्यटकों के लिए ज्यादा सुलभ बनाना है।
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