सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

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सरोदे का दावा, शिंदे की यह दशहरा रैली आखिरी हो सकती है; ट्वीट वायरल

वरिष्ठ वकील असीम सरोदे के ट्वीट से दशहरे के दिन महाराष्ट्र की सियासत में हलचल मच गई है।

महाराष्ट्र में आज पांच दशहरा रैलियां हो रही हैं। इनमें से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यक्रम हो चुका है, बाकी चार अभी होनी हैं। पंकजा मुंडे, मनोज जरांगे पाटील, पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की रैलियां बाकी हैं।

इन चारों में पूरे राज्य की नजर ठाकरे और शिंदे की रैली पर टिकी है। सबको यही जानना है कि ठाकरे की गर्जना कैसी होगी और शिंदे की दहाड़ में क्या होगा। इसी बीच वरिष्ठ वकील असीम सरोदे ने बड़ा बयान दे दिया है कि एकनाथ शिंदे की यह शायद आखिरी दशहरा रैली होगी। इस बयान से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।

सरोदे ने सुबह-सुबह ट्वीट करके दशहरे के दिन ही शिंदे गुट की टेंशन बढ़ा दी। उन्होंने लिखा कि पार्टी का नाम चुराकर मिली पहचान के साथ "सत्तानाथ" की यह आखिरी दशहरा रैली निकले, तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक पहले पार्टी की चोरी हुई, फिर चुनाव में कथित गड़बड़ियों के प्रयोग हुए और अब सत्ता के नाटक का आखिरी अंक चल रहा है।

सरोदे ने आगे लिखा कि लोकतंत्र के रंगमंच पर भले सारे प्रयोग कामयाब लगते हों, लेकिन अदालत का पर्दा सत्ता के इस खेल को खत्म करेगा, यह अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि सत्ता कितनी भी बड़ी हो, लोकतंत्र में आखिरी बात सत्ता की नहीं होती। वह संविधान और न्याय की होती है। इस सीधी प्रतिक्रिया के बाद उल्टी-सीधी चर्चाएं तेज हो गई हैं और सरोदे का ट्वीट तेजी से वायरल हो रहा है।

उधर सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना पार्टी को लेकर सुनवाई चल रही है। उम्मीद है कि यह सुनवाई इसी महीने के आखिर तक पूरी हो जाएगी। इसलिए सबकी निगाहें इस पर हैं कि फैसला क्या आता है और शिवसेना ठाकरे की होगी या शिंदे की। इस सवाल पर पूरे देश का ध्यान लगा है।

ठाकरे गुट के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में जोरदार दलील दी कि शिवसेना ठाकरे की ही क्यों है। दूसरी तरफ शिंदे गुट के वकील नीरज कौल ने भी अदालत में आक्रामक तरीके से अपना पक्ष रखा और कहा कि शिवसेना शिंदे गुट की ही है। दोनों तरफ के वकीलों ने दलील देते वक्त कई पुराने मामलों का हवाला भी दिया। अब देखना है कि कोर्ट इस पर क्या फैसला देता है।

यह फैसला सिर्फ एक फैसला भर नहीं रहेगा, बल्कि ऐतिहासिक होगा। आगे चलकर राजनीतिक पार्टियों के झगड़े सुलझाने में यह फैसला एक अहम आधार बनेगा। इसी वजह से पूरे देश की नजर इस पर लगी हुई है।

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