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पुरंदर एयरपोर्ट के लिए सर्वे करने वाले कंसल्टेंट की नियुक्ति की प्रक्रिया MADC ने शुरू की

महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी ने पुरंदर के प्रस्तावित छत्रपति संभाजीराजे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की डीपीआर के लिए कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पुरंदर एयरपोर्ट के लिए सर्वे करने वाले कंसल्टेंट की नियुक्ति की प्रक्रिया MADC ने शुरू की तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पुणे: पुरंदर में प्रस्तावित छत्रपति संभाजीराजे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने के लिए कई सर्वे करने होंगे। इन सर्वे के लिए महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी (MADC) ने कंसल्टेंट की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

MADC के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक दीपक कपूर ने X पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पुरंदर एयरपोर्ट का काम आगे बढ़ रहा है और कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

MADC के मुताबिक कंसल्टेंट सिर्फ सर्वे तक सीमित नहीं रहेगा। वह तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का अध्ययन करने में भी मदद करेगा। एयरपोर्ट बनाने का टेंडर जारी होने तक टेंडर की प्रक्रिया भी वही संभालेगा।

यह एयरपोर्ट पुरंदर तालुका के सात गांवों में बनाने की योजना है। ये गांव हैं पारगांव, कुंभारवलण, वनपुरी, एखतपुर, उदाचीवाडी, मुंजवाडी और खानवाडी। जमीन अधिग्रहण का काम भी चल रहा है।

इन गांवों की जमीन की व्यवहार्यता MADC पहले ही परख चुकी है। अब अगले चरण में और सर्वे और तकनीकी अध्ययन होंगे, ताकि आखिरी डीपीआर तैयार हो सके और प्रोजेक्ट अमल की तरफ बढ़े।

प्रस्तावित सर्वे में टोपोग्राफिकल, जियोटेक्निकल, हाइड्रोलॉजिकल और कार्टोग्राफिक आकलन शामिल हैं। इनसे जमीन की ऊंचाई और बनावट का पता चलेगा। मिट्टी और चट्टान कैसी है और जमीन कितना वजन सह सकती है, यह भी सामने आएगा। साथ ही प्राकृतिक नालों और बाढ़ के खतरे का नक्शा बनेगा और एयरपोर्ट की जगह के विस्तृत नक्शे तैयार होंगे।

इन नतीजों के आधार पर रनवे, टर्मिनल बिल्डिंग, अंदरूनी सड़कों और ड्रेनेज सिस्टम जैसी अहम सुविधाओं की योजना बनेगी। एयरपोर्ट के बाकी ढांचे की योजना भी इन्हीं पर टिकी होगी।

MADC के अधिकारियों ने बताया कि इंजीनियरिंग अध्ययन और तकनीकी सर्वे का दायरा कितना होगा, यह टेंडर दस्तावेजों में साफ लिखा जाएगा। कंसल्टेंट की नियुक्ति के बाद सर्वे किए जाएंगे और उनके नतीजों की जांच होगी। उसके बाद डीपीआर को आखिरी रूप दिया जाएगा। इससे आगे की योजना और निर्माण के टेंडर का रास्ता खुलेगा।

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