पुणे की विक्चुअल्स लाइफसाइंसेज ने ह्यूमन मिल्क बैंक के लिए बनाया सॉफ्टवेयर
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पुणे की कंपनी विक्चुअल्स लाइफसाइंसेज का ह्यूमन मिल्क बैंक सॉफ्टवेयर डोनर दूध के संग्रह से वितरण तक हर कदम का डिजिटल रिकॉर्ड रखने के लिए बना है।
पुणे, 23 अक्टूबर 2026: भारत में नवजात बच्चों की देखभाल में ह्यूमन मिल्क बैंक की अहमियत बढ़ती जा रही है। इसी बीच पुणे की कंपनी विक्चुअल्स लाइफसाइंसेज टेक्नोलॉजी के जरिए डोनर दूध के संग्रह, प्रोसेसिंग, स्टोरेज और वितरण की दिक्कतें दूर करने में लगी है। कंपनी का विक्चुअल्स ह्यूमन मिल्क बैंक सॉफ्टवेयर मिल्क बैंक के कामकाज को डिजिटल बनाने, हर स्टेज पर दूध को ट्रैक करने और अस्पतालों को डोनर दूध संभालने के लिए एक जैसी प्रक्रिया रखने में मदद के लिए बनाया गया है।
देश भर के नवजात गहन चिकित्सा इकाइयों (NICU) में ह्यूमन मिल्क बैंक उन समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले और कमजोर बच्चों की पोषण जरूरत पूरी करते हैं, जिनकी मां पर्याप्त दूध नहीं दे पातीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) कहता है कि जब बच्चे को अपनी मां का दूध न मिल सके, तो कमजोर शिशुओं को डोनर ह्यूमन मिल्क दिया जाए। साथ ही WHO सुरक्षित और ठीक से चलने वाले मिल्क बैंक सिस्टम पर भी जोर देता है।
मिल्क बैंक में कई काम एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। डोनर को जोड़ना और उसकी जांच, रजिस्ट्रेशन, दूध इकट्ठा करना, लैब टेस्ट, पाश्चराइजेशन, स्टोरेज और पात्र बच्चों को दूध देना, ये सब इसमें आते हैं। हर स्टेज पर सही रिकॉर्ड रखना और दूध को ट्रैक करना जरूरी है, क्योंकि कागजी कार्रवाई या हैंडलिंग में जरा सी चूक भी मरीज की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।
अब तक इनमें से कई काम हाथ से लिखे रिकॉर्ड और कागज पर चलते रहे हैं। जैसे-जैसे काम बढ़ता है, लगातार निगरानी रखना और रिकॉर्ड संभालना मुश्किल होता जाता है। हाथ के काम और जैविक सुरक्षा के लिए जरूरी बारीकी के बीच इसी खाई को भरने के लिए विक्चुअल्स लाइफसाइंसेज ने मिल्क बैंक के प्रबंधन के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है।
कंपनी की प्रोडक्ट जानकारी के मुताबिक यह सॉफ्टवेयर डोनर दूध को संग्रह से लेकर प्रोसेसिंग, स्टोरेज, फिर वितरण और बच्चे को देने तक ट्रैक करता है। डोनर का चयन और रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग, स्टोरेज और आवंटन, सब एक ही डिजिटल वर्कफ्लो में जुड़ जाते हैं।
यह क्लाउड आधारित सॉफ्टवेयर हैजर्ड एनालिसिस एंड क्रिटिकल कंट्रोल पॉइंट्स (HACCP) पर निगरानी में भी मदद करता है। HACCP संभावित खतरों को पहचानने और संभालने का एक ढांचा है, और इससे इंसानी गलती की गुंजाइश कम होती है। इसे डॉक्टर, नर्स, बायोमेडिकल इंजीनियर और मिल्क बैंक चलाने वाले इस्तेमाल कर सकते हैं, और इसे अस्पताल की अपनी ब्रांडिंग के साथ भी ढाला जा सकता है।
प्लेटफॉर्म पर दूध के हर कंटेनर को और उस पर हुई प्रक्रियाओं को अलग-अलग ट्रैक किया जा सकता है। इसकी सांख्यिकीय रिपोर्ट से अस्पताल प्रशासक कामकाज का जायजा ले सकते हैं और निगरानी व ऑडिट के लिए रिकॉर्ड रख सकते हैं। कागज पर निर्भरता घटाकर यह सॉफ्टवेयर मिल्क बैंक के काम में एकरूपता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
जैसे-जैसे ज्यादा अस्पताल ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू कर रहे हैं, मानक प्रक्रिया और भरोसेमंद रिकॉर्ड की जरूरत बढ़ रही है। बिखरे हुए वर्कफ्लो और अधूरे रिकॉर्ड से पूरी प्रक्रिया में लगातार ट्रैकिंग रखना मुश्किल हो जाता है। विक्चुअल्स जैसे डिजिटल सिस्टम सारे अहम काम एक ही सिस्टम में लाकर इन दिक्कतों को सुलझाना चाहते हैं।
अच्छे से चलने वाले मिल्क बैंक की अहमियत सिर्फ अस्पताल के कामकाज तक सीमित नहीं है। रिसर्च में डोनर ह्यूमन मिल्क को नेक्रोटाइजिंग एंटरोकोलाइटिस (एक गंभीर आंत की बीमारी, जो कमजोर नवजातों को होती है) की कम घटनाओं से जोड़ा गया है, जब इसकी तुलना संबंधित क्लिनिकल हालात में फॉर्मूला फीडिंग से की गई। WHO ने भी कम वजन वाले बच्चों के लिए सही फीडिंग को उनके तुरंत बचने और आगे के विकास के लिए अहम बताया है।
ऐसे में नवजात स्वास्थ्य सेवा में मिल्क बैंक का अच्छा प्रबंधन एक जरूरी हिस्सा है, जहां सुरक्षा, क्वालिटी और डोनर दूध समय पर मिलना सबसे जरूरी है। प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाकर और ट्रैकिंग में मदद करके विक्चुअल्स लाइफसाइंसेज का मकसद अस्पतालों को मिल्क बैंक बेहतर चलाने में मदद देना है। साथ ही यह कामकाज के विश्लेषण और रिसर्च के लिए डिजिटल आधार भी देता है।
इस प्लेटफॉर्म के पीछे वृषाली देशपांडे और सौरभ माने का काम है, जिसमें हेल्थकेयर की समझ और टेक्नोलॉजी आधारित प्रोडक्ट डिजाइन साथ आए हैं। विक्चुअल्स सॉफ्टवेयर की सह-संस्थापक वृषाली देशपांडे हेल्थकेयर उद्यमी और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट हैं। हेल्थकेयर इनोवेशन में उन्हें करीब दो दशक का अनुभव है, खासकर ह्यूमन मिल्क बैंकिंग में। उन्होंने देश भर में टर्नकी मिल्क बैंकिंग प्रोजेक्ट की अगुवाई की है और देश में ह्यूमन मिल्क बैंकिंग व लैक्टेशन मैनेजमेंट को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है।
सौरभ माने ने शुरुआती दौर से विक्चुअल्स प्लेटफॉर्म के प्रोडक्ट डिजाइन और यूजर एक्सपीरियंस की अगुवाई करते हुए अहम भूमिका निभाई है। ह्यूमन-कंप्यूटर इंटरैक्शन में अपनी महारत और हेल्थकेयर व AI आधारित प्रोडक्ट डिजाइन करने के अनुभव के दम पर माने ने मिल्क बैंक के जटिल कामकाज को हेल्थकेयर पेशेवरों के लिए आसान डिजिटल वर्कफ्लो में बदलने पर ध्यान दिया। प्लेटफॉर्म का इंटरफेस डिजाइन, डेटा विजुअलाइजेशन और जरूरी प्रक्रियाओं को एक सिस्टम में जोड़ना उनके योगदान में शामिल है। यह प्लेटफॉर्म अब भारत के कई बड़े हेल्थकेयर संस्थानों में लागू हो चुका है।
इस पहल पर विक्चुअल्स सॉफ्टवेयर के सह-संस्थापक सौरभ माने ने कहा, "ह्यूमन मिल्क बैंकिंग में जटिल प्रक्रियाएं होती हैं, जहां सटीकता, ट्रैकिंग और सुरक्षा जरूरी हैं। हमारा लक्ष्य हेल्थकेयर पेशेवरों के लिए इन कामों को आसान बनाना और इंसानी गलतियां कम करना है। आसान वर्कफ्लो को साथ लाकर हम मिल्क बैंकों की कार्यक्षमता बढ़ाना और बेहतर नवजात देखभाल व रिसर्च में मदद करना चाहते हैं।"
भारत में ह्यूमन मिल्क बैंकिंग का भविष्य सिर्फ उपकरणों और ढांचे पर नहीं, बल्कि इस पर भी टिका है कि लोग, प्रक्रियाएं और टेक्नोलॉजी कितने अच्छे से साथ काम करते हैं। जैसे-जैसे यह सेक्टर बढ़ेगा, मानक वर्कफ्लो, भरोसेमंद दस्तावेज और शुरू से आखिर तक ट्रैकिंग वाले डिजिटल समाधान कामकाज की कार्यक्षमता और टिकाऊपन बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
अपने मिल्क बैंक सॉफ्टवेयर के जरिए विक्चुअल्स लाइफसाइंसेज इसी बदलाव में हाथ बंटाना चाहती है, ताकि अस्पताल मिल्क बैंक का प्रबंधन मजबूत करें और कमजोर नवजातों तक डोनर दूध पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया पर बेहतर नजर रख सकें।
ह्यूमन मिल्क को अक्सर "लिक्विड गोल्ड" कहा जाता है, और नवजात देखभाल में यह एक कीमती चीज है। हर पात्र डोनेशन सुरक्षित तरीके से संभाला जाए, उसे ट्रैक किया जा सके और वह उसी बच्चे तक पहुंचे जिसे उसकी जरूरत है, यही अच्छे से चलने वाले ह्यूमन मिल्क बैंक की भूमिका का मूल है।
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