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पुणे के सारस बाग में 1 नवंबर को मिट्टी के छोटे किले बनाकर विश्व रिकॉर्ड की कोशिश

आर्टवाला फाउंडेशन और आरंभ फाउंडेशन किल्लोत्सव 2026 में बच्चों और परिवारों के साथ मिट्टी के छोटे किले बनाएंगे।

पुणे के सारस बाग में 1 नवंबर को मिट्टी के छोटे किले बनाकर विश्व रिकॉर्ड की कोशिश तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पुणे, 23 अक्टूबर 2026: महाराष्ट्र के ऐतिहासिक किले सदियों से हिम्मत, स्वाभिमान और सांस्कृतिक पहचान की निशानी रहे हैं। इसी विरासत को अलग अंदाज़ में मनाने का मौका पुणेकरों को 1 नवंबर को मिलेगा। सारस बाग में किल्लोत्सव 2026 - हमारी विरासत, हमारा गर्व! के तहत सैकड़ों लोग जुटकर मिट्टी से छोटे किले बनाएंगे।

इस कार्यक्रम का आयोजन आर्टवाला फाउंडेशन और आरंभ फाउंडेशन कर रहे हैं। इसमें पुणे महानगरपालिका (PMC) की भी भागीदारी है। सब मिलकर छोटे किले बनाएंगे और इसी के जरिए विश्व रिकॉर्ड बनाने की कोशिश की जाएगी। मकसद है कि बच्चे और नौजवान महाराष्ट्र के समृद्ध इतिहास से जुड़ें और मिट्टी से किले बनाने की पुरानी कला भी बची रहे।

कार्यक्रम रविवार, 1 नवंबर 2026 को है। इसमें स्कूली बच्चे, उनके माता-पिता, इतिहास के शौकीन, कलाकार और छत्रपति शिवाजी महाराज को चाहने वाले एक साथ जुटेंगे।

आयोजकों के लिए बात सिर्फ विश्व रिकॉर्ड की नहीं है। वे चाहते हैं कि महाराष्ट्र के किलों की कहानियां, उनकी बनावट और उनका जज़्बा नई पीढ़ी के लिए अहमियत रखें।

महाराष्ट्र के किले छत्रपति शिवाजी महाराज और मराठा साम्राज्य के इतिहास से गहरे जुड़े हैं। पहाड़ी इलाकों में बने किलों से लेकर रणनीतिक जगहों पर खड़े समुद्री किलों तक, ये इमारतें उस दौर की फौजी योजना, स्थापत्य की समझ और डटे रहने की ताकत दिखाती हैं।

मगर आज के डिजिटल दौर में बड़े हो रहे कई बच्चों के लिए इतिहास किताबों, तस्वीरों और क्लास के पाठों तक सिमट जाता है। किल्लोत्सव इसी दूरी को कम करना चाहता है। यहां बच्चे और परिवार अपने हाथों से इतिहास को छू सकेंगे। मिट्टी के छोटे किले बनाते हुए बच्चे किलों की बनावट देखेंगे, बचाव के ढांचे समझेंगे और इन जगहों की ऐतिहासिक अहमियत को महसूस करेंगे।

आर्टवाला फाउंडेशन के संस्थापक संदीप भामकर ने कहा कि इस पहल का मकसद महाराष्ट्र की विरासत को बच्चों की जिंदगी का सक्रिय हिस्सा बनाना है, ताकि वह सिर्फ किताबों में न मिले।

उन्होंने कहा, "हमारे किले सिर्फ पत्थर की इमारतें नहीं हैं। वे उस हिम्मत, सोच और स्वाभिमान की निशानी हैं जो महाराष्ट्र के इतिहास का अहम हिस्सा है। किल्लोत्सव के जरिए हम चाहते हैं कि बच्चे इस विरासत को रचनात्मक तरीके से महसूस करें और उससे हमेशा के लिए जुड़ जाएं। जब बच्चा अपने हाथ से किला बनाता है, तो उसके इतिहास को जानने की जिज्ञासा अपने आप जाग जाती है।"

भामकर के मुताबिक सब मिलकर काम करेंगे तो लोगों को एक बड़ी सांस्कृतिक पहल का हिस्सा बनने का मौका भी मिलेगा, और वे छोटे किले बनाने की पारंपरिक कला को खुद आजमा सकेंगे।

प्रस्तावित विश्व रिकॉर्ड की कोशिश किल्लोत्सव 2026 का सबसे बड़ा आकर्षण होगी। तय दो घंटे के दौरान लोग सारस बाग में जुटकर मिट्टी से छोटे किले बनाएंगे। आयोजकों को उम्मीद है कि इतनी बड़ी भागीदारी से महाराष्ट्र की किला विरासत की ओर ध्यान जाएगा और पता चलेगा कि पारंपरिक कलाएं लोगों को कैसे जोड़ती हैं।

आरंभ फाउंडेशन की संस्थापक दीपाश्री पवार ने कहा कि इस पहल का मकसद बच्चों, परिवारों और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपराओं के बीच सार्थक रिश्ता बनाना है।

उन्होंने कहा, "हमारा मकसद है कि विरासत ऐसी चीज़ बने जिसे बच्चे देख सकें, छू सकें, समझ सकें और जिस पर गर्व कर सकें। छोटे किले बनाने से उन्हें महाराष्ट्र के गौरवशाली अतीत को सीखने का रचनात्मक तरीका मिलता है, साथ ही सब्र, कल्पनाशक्ति और अपनी परंपराओं के लिए इज्जत भी आती है। हम चाहते हैं कि परिवार साथ मिलकर हिस्सा लें और इस विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं।"

पवार ने यह भी कहा कि अलग-अलग उम्र के नागरिकों के आने से यह कार्यक्रम सबका साझा अनुभव बनेगा और विरासत बचाने का बड़ा संदेश मैदान से बाहर भी जाएगा। आयोजकों का मानना है कि ऐसी सामूहिक गतिविधियां लोगों में ऐतिहासिक इमारतों के प्रति दिलचस्पी बढ़ा सकती हैं और उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाने की अहमियत समझा सकती हैं।

किल्लोत्सव 2026 सबके लिए खुला कार्यक्रम है। इसमें स्टूडेंट्स, नौजवान, माता-पिता, कला प्रेमी और महाराष्ट्र के इतिहास में रुचि रखने वाला हर कोई शामिल हो सकता है। बच्चों के लिए यह रचनात्मकता और पढ़ाई को जोड़ने का मौका है। माता-पिता अपने बच्चों को खुद करके सीखने के जरिए क्षेत्रीय इतिहास से रूबरू करा सकते हैं। इतिहास के शौकीन और शिवाजी महाराज के प्रशंसक किलों की विरासत के सामूहिक जश्न में शामिल हो सकते हैं।

आयोजकों को यह भी उम्मीद है कि त्योहारों के मौसम में, जब महाराष्ट्र के कई हिस्सों में किलों और मराठा इतिहास की अहमियत मनाई जाती है, यह पहल छोटे किले बनाने की पुरानी परंपरा में नई दिलचस्पी जगाएगी। फाउंडेशनों का मकसद है कि नई पीढ़ी विरासत को सिर्फ अतीत से मिली चीज़ न माने, बल्कि ऐसी जिम्मेदारी समझे जिसे आगे ले जाना है।

छोटे किले बनाने का विश्व रिकॉर्ड प्रयास रविवार, 1 नवंबर को सारस बाग, पुणे में शाम 4 बजे से 6 बजे तक होगा। भाग लेने वालों से कहा गया है कि वे पहले से जरूरी रजिस्ट्रेशन करा लें और दोपहर 2:30 बजे तक पहुंच जाएं, ताकि रिपोर्टिंग और इंतजामों के लिए वक्त मिले।

कार्यक्रम का नाम किल्लोत्सव 2026 - हमारी विरासत, हमारा गर्व! है। आयोजक आर्टवाला फाउंडेशन और आरंभ फाउंडेशन हैं और नागरिक भागीदारी पुणे महानगरपालिका की है। रजिस्ट्रेशन और संपर्क के लिए नंबर 9167877224 और 9881008419 हैं। वेबसाइट www.artwala.org है। इच्छुक लोग रजिस्ट्रेशन और ज्यादा जानकारी के लिए आयोजकों से बात कर सकते हैं।

रिकॉर्ड बन जाए और उसे आधिकारिक मान्यता मिल जाए, तो किल्लोत्सव को ज्यादा पहचान मिल सकती है। लेकिन आयोजकों की बड़ी चाहत यह है कि भागीदारी, रचनात्मकता और साथ मिलकर सीखने के जरिए महाराष्ट्र के किलों की विरासत बच्चों और परिवारों के और करीब पहुंचे।

किल्लोत्सव 2026 का संदेश सीधा है: विरासत को बचाने की शुरुआत उसे समझने, उस पर गर्व करने और यह पक्का करने से होती है कि अगली पीढ़ी को भी उसे महसूस करने का मौका मिले। पुणेकरों के लिए यह इस कोशिश में मिलकर हाथ बंटाने का मौका है, एक-एक छोटे किले के साथ।

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