पीएमआरडीए के नए जीआईएस पोर्टल पर अब सेकंडों में मिलेंगे जोन और पार्ट प्लान सर्टिफिकेट
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने जोन सर्टिफिकेट, पार्ट प्लान और साइट एलिवेशन सर्टिफिकेट ऑनलाइन कर दिए हैं। अर्जी देने वालों को ये अपने आप कुछ सेकंड में मिल जाते हैं।
पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (PMRDA) ने जोन सर्टिफिकेट, पार्ट प्लान और साइट एलिवेशन सर्टिफिकेट ऑनलाइन देना शुरू कर दिया है। इसके लिए जीआईएस पर आधारित एक नया जियोपोर्टल बनाया गया है। अर्जी देने वालों को अब दफ्तर जाने की जरूरत नहीं है, सर्टिफिकेट अपने आप कुछ सेकंड में मिल जाता है।
यह पोर्टल महाराष्ट्र लोकसेवा हक्क अधिनियम (Maharashtra Right to Public Services Act) और राज्य की गवर्नमेंट प्रोसेस री-इंजीनियरिंग (GPR) पहल के तहत तैयार हुआ है। PMRDA का कहना है कि इससे दफ्तरों के बार-बार लगने वाले चक्कर और उनके साथ होने वाली फॉलो-अप की भागदौड़ कम होगी।
अब तक हर अर्जी के लिए कर्मचारियों को कागज पर छपे क्षेत्रीय विकास नक्शे हाथ से जांचने पड़ते थे। जोन सर्टिफिकेट में सात दिन लगते थे, पार्ट प्लान में तीन दिन और साइट एलिवेशन सर्टिफिकेट में दस दिन तक, क्योंकि अधिकारियों को ऊंचाई और जमीन की हालत भी परखनी होती थी।
इसे बदलने के लिए PMRDA ने पुणे रीजनल प्लान को डिजिटल किया, जो मूल रूप से 1997 में मंजूर हुआ था, और उसे जीआईएस सिस्टम में डाल दिया। साइट एलिवेशन सर्टिफिकेट अब डिजिटल एलिवेशन मॉडल, टोपोशीट और दूसरे जियोस्पेशियल डेटा से बिना किसी इंसानी दखल के बनते हैं। जो लोग जोन सर्टिफिकेट लेते हैं, उन्हें पार्ट प्लान भी उसके साथ ही मिल जाता है।
हर सर्टिफिकेट पर QR कोड और बारकोड होता है, जिससे कोई भी कभी भी ऑनलाइन जांच सकता है कि वह असली है या नहीं। पोर्टल पर कदम-दर-कदम गाइडेंस, अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (FAQ) का सेक्शन और फीडबैक भेजने की सुविधा भी है।
जियोपोर्टल में 25 से ज्यादा मैप लेयर हैं। इनमें 674 गांवों की सीमाएं, मेट्रो रूट और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) जोन, पुरंदर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट से प्रभावित इलाके, NDA बफर जोन, HEMRL की सीमाएं, वन्यजीव अभयारण्य की हद, रेलवे लाइनें और लाल व नीली बाढ़ रेखाएं शामिल हैं। नागरिक अपने प्लॉट के आसपास की सड़कों, बाढ़ रेखाओं, मेट्रो रूट और क्षेत्रीय योजना की बुनियादी सरकारी जानकारी यहां देख सकते हैं।
PMRDA अधिकारियों का कहना है कि मानक जीआईएस लेयर से इंसानी गलती और हाथ से होने वाली दखलअंदाजी कम होगी। उन्हें उम्मीद है कि ऑटोमेशन से स्टाफ को तकनीकी जांच और पेचीदा मामलों के लिए ज्यादा समय मिलेगा।
PMRDA के महानगर आयुक्त डॉ. अभिजीत चौधरी ने कहा, "नागरिक अब घर बैठे एक क्लिक पर आधिकारिक, शुरुआती जानकारी पा सकते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि प्राधिकरण ऐसे डिजिटल गवर्नेंस के लिए प्रतिबद्ध है जो पारदर्शी, कारगर और आसानी से उपलब्ध हो।
प्राधिकरण का मानना है कि यह जियोपोर्टल महाराष्ट्र के दूसरे क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों और विशेष नियोजन प्राधिकरणों के लिए एक मॉडल बन सकता है।
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