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कोरेगांव पार्क में 25 अक्टूबर को यादों पर कविता और संगीत की शाम "भूले-बिसरे"

KavitaKAFE पुणे के मोनालिसा कलाग्राम में यादों पर केंद्रित कविता ओपन माइक "भूले-बिसरे" कर रहा है, जिसमें कवियों के साथ संगीत भी होगा।

कुछ यादें कभी धुंधली नहीं पड़तीं। कभी कोई जाना-पहचाना गाना, कोई पुरानी तस्वीर, भूली हुई बातचीत या कविता की कुछ पंक्तियां अचानक अपनी ही कहानी जैसी लगने लगती हैं। ऐसे ही यादों के टुकड़ों को समर्पित KavitaKAFE 25 अक्टूबर को "भूले-बिसरे" नाम से कविता का ओपन माइक कर रहा है। यह कार्यक्रम पुणे के कोरेगांव पार्क में मोनालिसा कलाग्राम में शाम 4:30 बजे से 6:30 बजे तक चलेगा।

इस शाम में कवि, संगीत और साझा अनुभव एक साथ होंगे। आयोजकों का कहना है कि यह ऐसी जगह होगी जहां बीते वक्त को एक-एक शेर के साथ फिर से जिया जा सकेगा। प्यारे पल, अधूरी बातचीत, और वे लोग और जगहें जिन्हें वक्त अपने साथ ले गया, इन सबकी सबसे सच्ची अभिव्यक्ति अक्सर कविता में ही मिलती है।

KavitaKAFE की संस्थापक गरिमा मिश्रा के लिए हर आयोजन की अलग पहचान बनाना अनुभव का जरूरी हिस्सा है। वे कहती हैं, "शुरू से ही हमने अपने कार्यक्रमों को सिर्फ 'ओपन माइक' कहने के बजाय कोई न कोई नाम दिया है। चुने हुए विषय पर पढ़ना participants के लिए जरूरी नहीं है, लेकिन इससे उन्हें लीक से हटकर सोचने और पहले से लिखी चीज सुनाने की जगह कुछ नया लिखने का मौका मिलता है।"

इस तरह KavitaKAFE की महफिलें सिर्फ कविता पढ़ने का मंच नहीं रह गईं। हर विषय एक रचनात्मक इशारे की तरह काम करता है, जिससे लोग जाने-पहचाने जज़्बातों को नए नजरिए से देखते हैं, और हर किसी के अपने अंदाज के लिए जगह भी बनी रहती है।

भूले-बिसरे में कविता के साथ संगीत भी होगा। सूफी गायक ओंकार झंझोटे अपने अलग अंदाज की प्रस्तुति देंगे, जबकि अनुपम बनर्जी क्लासिक बॉलीवुड गानों का जादू फिर से जगाएंगे। कविता और संगीत मिलकर उन धुनों और लफ्जों की याद दिलाएंगे जो पल गुजर जाने के बाद भी बहुत देर तक साथ रहते हैं।

ओंकार अपने अनुभव के बारे में कहते हैं, "मैंने कई जगह परफॉर्म किया है, लेकिन संगीत की जो समझ और सराहना मुझे KavitaKAFE में मिलती है, उसका कोई मुकाबला नहीं। KavitaKAFE से जुड़ाव मेरे लिए मायने रखता है।"

यही अपनापन दूसरे कलाकार भी महसूस करते हैं। चिन्मयी कात्रे जून 2026 से KavitaKAFE से जुड़ी हैं। वे इसे एक परिवार बताती हैं, जहां आपसी सम्मान, ईमानदारी और भरोसा हर कवि को अपनापन और कद्र का एहसास कराते हैं। वे गरिमा की गर्मजोशी, हर आयोजन के पीछे की प्रोफेशनल तैयारी और हर कलाकार को मिलने वाली सराहना की तारीफ करती हैं, जिससे ऐसा माहौल बनता है कि लोग खुश और संतुष्ट होकर लौटते हैं।

श्रोता निशा विकास भी कुछ ऐसा ही कहती हैं, "KavitaKAFE से हमारा जुड़ाव अभी नया है, फिर भी हमने हर कार्यक्रम में गजब की इंसानी गर्मजोशी और बहुत व्यवस्थित तरीका देखा है। हमें इस शानदार परिवार का स्थायी हिस्सा होने पर गर्व है।"

KavitaKAFE की शुरुआत 2024 में हुई थी। धीरे-धीरे यह कविता की महफिलों से आगे बढ़कर साहित्यिक चर्चाओं तक पहुंचा और हाल में जुलाई में इसने Authors' Adda नाम की साहित्यिक पहल शुरू की। इस मंच पर दो किताबों का लोकार्पण हो चुका है। एक है पत्रकार और लेखिका सुनंदा मेहता और सुचित्रा अय्यर की "Behind the Big Screen: The Untold Stories of Child Actors", और दूसरी दिनेश रहेजा की "अधूरी ख्वाहिशों ने: Unfulfilled Desires"।

मोनालिसा कलाग्राम की संस्थापक लिसा पिंगले के यहां KavitaKAFE करीब दो साल से अपने कविता के कार्यक्रम कर रहा है। वे इस बढ़ती साहित्यिक सक्रियता का स्वागत करती हैं। उनके मुताबिक, "KavitaKAFE क्लासिक हिंदी साहित्य को बढ़ावा दे रहा है और साथ ही नए लेखकों को भी प्रोत्साहित कर रहा है। इस साहित्यिक सफर में उनके साथ जुड़ना हमारे लिए बेहद खुशी की बात है, क्योंकि हम हर कला को बढ़ावा देने में यकीन रखते हैं।"

मंच पर रवि आचार्य, तेजल जैन, भक्ति साठे, राजश्री, प्रियदर्शिनी प्रज्ञान, चिन्मयी कात्रे, मेहा चोपड़ा, निलोफर, बॉबी मित्तल, Devv, सार्थक सिन्हा, विनय गंगिल, शहबाज खान और विकास मोहन कविताएं सुनाएंगे। भूले-बिसरे में निजी एहसास, जानी-पहचानी धुनें और ऐसी कहानियां होंगी जो एक इंसान की होकर भी कई लोगों के दिल को छू जाती हैं।

आखिर यादें भले बहुत निजी होती हैं, पर कविता उन्हें सबकी बना देती है।

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