खून के निशान और लकड़ी से खुला 2024 का कत्ल, पुणे ग्रामीण पुलिस ने दो को पकड़ा
इंदापुर के तवाशी श्मशान में जलाई गई 74 साल के बुजुर्ग की लाश का मामला सुलझा। खून के निशान और जलावन की लकड़ी के सहारे पुलिस आरोपियों तक पहुंची।
पुणे ग्रामीण पुलिस ने 74 साल के एक बुजुर्ग के कत्ल के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सबूत मिटाने के लिए बुजुर्ग की लाश को इंदापुर तालुका के तवाशी गांव के श्मशान में जला दिया गया था। जांच करने वालों के मुताबिक चिता के पास मिले खून के निशान और लाश जलाने में इस्तेमाल हुई लकड़ी से पुलिस संदिग्धों तक पहुंची।
मामला 16 नवंबर 2024 का है। तवाशी के पुलिस पाटील ने गांव के श्मशान में कुछ जलता हुआ देखा तो वालचंदनगर पुलिस को खबर दी। पुलिस वाले मौके पर पहुंचे तो लोहे की जाली पर जली हुई हड्डियां, राख और अंगारे मिले। इससे मरने वाले की पहचान करना मुश्किल हो गया था।
लेकिन चिता से करीब 40 फीट दूर जमीन पर और लकड़ी के टुकड़ों पर खून के निशान दिखे। इससे शक हुआ कि आदमी को पहले मारा गया और जुर्म छिपाने के लिए उसकी लाश जलाई गई।
अवशेषों की जांच में पुलिस को एक डेंटल कैप और चाबियां मिलीं। मरने वाले की पहचान तब तक पता नहीं थी, इसलिए जांच करने वालों ने इस पर ध्यान लगाया कि वहां इस्तेमाल हुई लकड़ी आई कहां से।
पुलिस ने इंदापुर, माळशिरस और फलटण के लकड़ी और जलावन बेचने वालों से पूछताछ की। आखिर में बात फलटण तालुका के गुणवरे गांव के एक लकड़ी डिपो तक पहुंची। वहां पता चला कि दो नौजवानों ने किसी अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी खरीदी थी और उसे गाड़ी में ले गए थे।
इसके बाद पुलिस ने 30 और 23 साल के दो संदिग्धों को हिरासत में लिया। जांच के मुताबिक पहले तो दोनों ने तफसील बताने से बचने की कोशिश की, लेकिन बाद में कथित तौर पर कत्ल करने और लाश जलाने की बात कबूल कर ली। मरने वाला परभणी जिले के गंगाखेड का 74 साल का आदमी निकला।
जांच करने वालों को शक है कि बड़ी उम्र के आरोपी को लगता था कि बुजुर्ग की उसकी पत्नी पर बुरी नजर है। पुलिस का मानना है कि इसी शक में उसने अपने 23 साल के साथी की मदद से कत्ल की योजना बनाई।
आरोप है कि दोनों बुजुर्ग को सातोबा मेले के दौरान साथ में खाना खिलाने के बहाने ले गए। तवाशी के श्मशान के पास उन्होंने गाड़ी रोकी, कथित तौर पर पेशाब करने का बहाना बनाकर। फिर बुजुर्ग के सिर पर लकड़ी के डंडे से वार किया गया और उसकी जान चली गई। आरोपियों पर शक है कि उन्होंने लाश को चिता पर रखकर जला दिया, ताकि सबूत खत्म हो जाएं और पहचान न हो सके।
जुर्म छिपाने की इस कोशिश के बावजूद खून के निशान और लकड़ी के सुराग से जांच करने वालों ने पूरा घटनाक्रम जोड़ लिया। पुणे ग्रामीण पुलिस और वालचंदनगर पुलिस की मिली-जुली जांच से दोनों गिरफ्तारियां हुईं।
यह मामला दिखाता है कि मौके पर मिले सबूत और उसके बाद की पूछताछ से पुलिस ऐसे कत्ल की गुत्थी भी सुलझा सकती है, जिसमें शुरू में मरने वाले की पहचान तक मुश्किल थी।
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