बेटा पैदा करो या घर छोड़ो: शिरूर की महिला का छह साल प्रताड़ना और 10 लाख की मांग का आरोप, पांच पर केस
शिरूर तहसील के अंबले गांव की 25 साल की महिला ने पति और चार ससुराल वालों पर बेटी को जन्म देने के कारण छह साल तक शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। शिरूर पुलिस ने पांचों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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पुणे: बेटी को जन्म देने की वजह से महिलाओं को किस तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ता है, यह मामला उसकी एक मिसाल है। शिरूर तहसील के अंबले गांव की रहने वाली 25 साल की एक महिला ने आरोप लगाया है कि बेटा न होने के कारण उसके पति और चार रिश्तेदारों ने छह साल तक उसे शारीरिक और मानसिक तौर पर परेशान किया। शिरूर पुलिस ने महिला की शिकायत पर पांचों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
शिकायत करने वाली महिला का नाम गायत्री विकी पवार है। उसने अपने पति विकी रामदास पवार (28), सास मीना रामदास पवार (55), जेठ किरण रामदास पवार (33), जेठानी शिवानी किरण पवार (27) और दूसरी ननद नीलम विजय सालुंके (30) को आरोपी बनाया है। ये सभी अंबले गांव के ही रहने वाले हैं।
शिकायत के मुताबिक गायत्री का कहना है कि बेटी होने पर ससुराल वाले उसे बार-बार ताने मारते थे। उसे धमकी दी जाती थी कि उसकी बेटी शार्वरी को उससे अलग कर दिया जाएगा। आरोप यह भी है कि आरोपी उसके पति की दूसरी शादी करा देने की धमकी देते थे। गायत्री के मुताबिक पिछले छह साल से वह इसी दबाव में जी रही थी।
उत्पीड़न सिर्फ तानों तक नहीं रुका, पैसों की मांग भी की गई। गायत्री का दावा है कि पति ने नई फोरव्हीलर गाड़ी खरीदी तो ससुराल वालों ने गाड़ी का लोन चुकाने के लिए उसके मायके वालों से 10 लाख रुपये मांगे।
एक और आरोप में गायत्री ने कहा है कि उसके पति से जुड़ी एक पुरानी घटना को लेकर ससुराल वाले उससे नाराज़ थे। उन्होंने उससे कहा कि वह एक दूसरी महिला से मिले और उसके साथ मारपीट करे। गायत्री ने ऐसा करने से मना कर दिया तो आरोपियों ने कथित तौर पर उसकी बेटी को अपने पास रख लिया और उसे ससुराल से निकाल दिया।
शिरूर पुलिस ने गायत्री की शिकायत के आधार पर परिवार के पांचों लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। मामले की आगे की जांच शिरूर पुलिस स्टेशन के प्रभारी पुलिस इंस्पेक्टर विनोद पाटिल के मार्गदर्शन में चल रही है।
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