औंध में शुक्रवार को सजेगी सुरों की महफिल, 30 अक्टूबर को होगा 86वां संगीत महोत्सव
औंध संगीत महोत्सव का 86वां आयोजन शुक्रवार, 30 अक्टूबर को तीन सत्रों में होगा, जिसमें गायन, वादन और कथ्थक नृत्य की प्रस्तुतियां रहेंगी।
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संगीत प्रेमियों को जिसका इंतजार था, वह 86वां औंध संगीत महोत्सव शुक्रवार, 30 अक्टूबर को होने जा रहा है। पद्मश्री पं. उल्हास कशाळकर और पं. सुरेश तळवलकर समेत कई दिग्गज कलाकारों के गायन और वादन का मजा श्रोताओं को मिलेगा। यह जानकारी शिवानंद संगीत प्रतिष्ठान की विश्वस्त श्रीमती अपूर्वा गोखले और पल्लवी जोशी ने दी।
शिवानंद स्वामी संगीत प्रतिष्ठान हर साल औंध संगीत महोत्सव का आयोजन करता है। ग्रामीण इलाके में यह महोत्सव पिछले 85 साल से लगातार चल रहा है। इसे देश के अहम महोत्सवों में गिना जाता है। इसकी शुरुआत 1940 में औंध संस्थान के दरबारी गायक पं. अनंत मनोहर जोशी उर्फ अंतुबुवा और उनके बेटे, वायलिन वादक पं. गजानन बुवा जोशी ने की थी। आगे चलकर महोत्सव का दायरा बढ़ता गया और 1981 में पं. गजानन बुवा जोशी की अध्यक्षता में शिवानंद स्वामी संगीत प्रतिष्ठान की स्थापना हुई।
इस महोत्सव में पं. जितेंद्र अभिषेकी, पं. भीमसेन जोशी, श्रीमती रोहिणी भाटे, गिरिजादेवी, पंडित के.जी. गिंडे, सुलतान खाँसाहेब, पं. मधुकर जोशी, पद्मश्री पं. उल्हास कशाळकर, पद्मश्री पं. सुरेश तळवलकर, यशवंत बुवा जोशी, अश्विनी भिडे-देशपांडे, योगेश समसी, पं. वेंकटेश कुमार, निलाद्रीकुमार और शुभा मुद्गल जैसे कई वरिष्ठ और बड़े कलाकार हाजिरी लगा चुके हैं। औंध के कलाप्रेमी राजघराने का आशीर्वाद भी शुरू से इस महोत्सव को मिलता रहा है। जोशी परिवार की नई पीढ़ी ने आयोजन की जिम्मेदारी संभाली है। पल्लवी जोशी और अपूर्वा गोखले शास्त्रीय संगीत की पुरानी विरासत को संभालने की कोशिश कर रही हैं। गायन, वादन और नृत्य, तीनों तरह की प्रस्तुतियां यहां होती हैं, और कई युवा कलाकारों को अपनी कला दिखाने के लिए मंच दिया जाता है।
महोत्सव तीन सत्रों में होगा। सुबह 9 बजे किर्लोस्कर ग्रुप कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर रविंद्र सामंत के हाथों उद्घाटन होगा। इस मौके पर प्रशासक और ग्रामविकास अधिकारी चाॅदशा काझी समेत मान्यवर मौजूद रहेंगे। संस्था के अध्यक्ष पं. अरुण कशाळकर को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिलने पर मुख्य अतिथि रवींद्र सामंत के हाथों उनका सत्कार किया जाएगा।
पहले सत्र की शुरुआत युवा गायिका प्रिया पुरूषोत्तमन के गायन से होगी। फिर वरिष्ठ संवादिनीवादक पं. विश्वनाथ कान्हेरे संवादिनी बजाएंगे। पं. गजाननबुवा जोशी की नातिनें और जानी-मानी गायिकाएं अपूर्वा गोखले और पल्लवी जोशी सहगायन पेश करेंगी। पहले सत्र का समापन वरिष्ठ गायक पद्मश्री पं. उल्हास कशाळकर के गायन से होगा। उनके साथ तबले पर वरिष्ठ तबलावादक तालयोगी पं. सुरेश तळवलकर संगत करेंगे।
दोपहर 3.15 बजे दूसरे सत्र की शुरुआत युवा गायक अनिरुद्ध ऐताळ के गायन से होगी। उसके बाद मशहूर तबलावादक अनीश प्रधान का एकल तबलावादन होगा। फिर वरिष्ठ गायक पं. अरुण कशाळकर का गायन श्रोता सुन सकेंगे। इसके बाद महोत्सव के मौके पर निकलने वाली स्मरणिका 'रियाझ' का विमोचन होगा, जिसमें मान्यवर अतिथि और प्रशासक, ग्रामविकास अधिकारी, ग्रामपंचायत औंध मौजूद रहेंगे। फिर पं. विकास कशाळकर के पचहत्तर साल पूरे होने पर संस्था उनका सत्कार करेगी।
रात 10 बजे आखिरी, तीसरे सत्र की शुरुआत निखिल परिहार के कथ्थक नृत्य से होगी। मशहूर बांसुरीवादक प्रविण गोटखिंडी बांसुरी बजाएंगे। तालयोगी पं. सुरेश तळवलकर के शिष्य कृष्णा साळुंके पखवाज वादन पेश करेंगे। किराणा घराने के गायक अंबरीश दास के गायन के साथ महोत्सव का समापन होगा।
पूरे महोत्सव में तबले पर सुमित नाईक, यति भागवत, यशवंत वैष्णव और स्वप्निल भिसे संगत करेंगे। संवादिनी पर चिन्मय कोल्हटकर, सिद्धेश बिचोलकर और सुयोग कुंडलकर साथ देंगे। कथक के लिए ईशान परांजपे, पार्थ भुमकर, अथर्व वैरागकर और स्वानंद राजोपाध्ये संगत करेंगे।
महोत्सव सभी संगीत प्रेमियों के लिए खुला रहेगा। अपूर्वा गोखले और पल्लवी जोशी ने सभी श्रोताओं से अपील की है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में आकर इस महोत्सव का लाभ लें।
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