आग से बचाव में AI की मदद: अलार्म और सेंसर से फायर ब्रिगेड को जल्दी अलर्ट
मुंबई में हुए कॉन्क्लेव में महाराष्ट्र अग्निशमन सेवा संचालनालय के संचालक संतोष वारिक ने कहा कि AI से सुरक्षा व्यवस्था ज्यादा मजबूत हो रही है।
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महाराष्ट्र अग्निशमन सेवा संचालनालय के संचालक और महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल के मुख्य अग्निशमन अधिकारी संतोष वारिक ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल से सुरक्षा व्यवस्थाओं की निगरानी और कंट्रोल ज्यादा असरदार होगा। वारिक के मुताबिक सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में एआई तकनीक लगाई जाए तो संदिग्ध हरकतों की पहचान हो सकती है। साथ ही संभावित खतरे वक्त रहते ध्यान में आएंगे और तुरंत कार्रवाई करना मुमकिन होगा। उन्होंने यह भी कहा कि एआई की वजह से सुरक्षा प्रणाली ज्यादा सक्षम, असरदार और तैयार हो रही है।
वारिक ने कहा कि आज इमारतों की सुरक्षा और आग से बचाव (फायर सेफ्टी), दोनों बेहद जरूरी हो गए हैं। कारखानों, दफ्तरों या मॉल में लोगों की भीड़ पर नजर रखना और पूरा मैनेजमेंट एआई के जरिए करना अब मुमकिन हो गया है। इमारतों में आग से सुरक्षा के लिए लगाए गए सिस्टम पर भी एआई से आसानी से नजर रखी जा सकती है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने 2023 में 'महाराष्ट्र फायर प्रिवेंशन एंड लाइफ सेफ्टी मेजर्स एक्ट' में अहम सुधार किए हैं। इमारत में आग की सुरक्षा के लिए लगे डिटेक्शन सिस्टम, अलार्म, हाइड्रेंट्स और स्प्रिंकलर सेंसर्स आपातकाल में अलर्ट भेजते हैं। इसलिए किसी भी हादसे के वक्त फायर ब्रिगेड का रिस्पॉन्स जल्दी मिल सकेगा।
कार्यक्रम की प्रस्तावना में सुनील बीडलम ने बताया कि पुणे सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स (पीएसपी) फोरम पुणे के कॉर्पोरेट, औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्र में सुरक्षा, रिस्क मैनेजमेंट और एनालिसिस करने वाले प्रोफेशनल्स को एक मंच पर लाता है। इस मंच पर सुरक्षा व्यवस्था पर असर डालने वाली भू-राजनीतिक घटनाओं, सुरक्षारक्षकों से जुड़ी चुनौतियों, प्रवेश नियंत्रण प्रणाली और आपातकाल की तैयारी जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि पुणे के साथ मुंबई और दूसरे शहरों में भी ऐसे कार्यक्रम करने की कोशिश है। 'सुरक्षा अवॉर्ड्स' जैसी पहल से सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों और संस्थाओं का सम्मान भी फोरम करता है।
ब्रिगेडियर प्रीतपाल सिंह ने कहा कि एआई की चुनौतियों का सामना करने और आगे की सुरक्षा व्यवस्था को ज्यादा सक्षम बनाने की दिशा मिली। उनके मुताबिक आज छोटी-बड़ी सभी चीजें इंटरनेट से जुड़ गई हैं। इंटरनेट की वजह से एआई जैसी असरदार तकनीक उपलब्ध हुई है, लेकिन सही कंट्रोल न हो तो गलत प्रवृत्ति के लोग इसका बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए सुरक्षा क्षेत्र के प्रोफेशनल्स को एआई का स्वरूप समझना, उसका सही इस्तेमाल करना और संस्थाओं की सुरक्षा मजबूत करने में इसका उपयोग कैसे हो, इस पर गंभीरता से सोचना जरूरी है।
यह 'पीएसपी-एएसआईएस कॉन्क्लेव' पुणे सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स और अमेरिकन सोसायटी फॉर इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी (एएसआईएस) ने मिलकर 'एआई इन सिक्योरिटी' थीम पर किया था। इसमें वारिक 'अग्निसुरक्षा में एआई का इस्तेमाल' विषय पर बोल रहे थे। कार्यक्रम मुंबई के आइकोनिका होटल में हुआ। मंच पर महाराष्ट्र अग्निशमन सेवा संचालनालय के सह-संचालक किरण हत्याल, पीएसपी के सह-संस्थापक सुनील बीडलम और मंगेश काटे, बैंक ऑफ बड़ौदा के सुरक्षा विभाग के राष्ट्रीय प्रमुख ब्रिगेडियर प्रीतपाल सिंह, सिक्योरिटी शेल्स इंफोटेक के संचालक महेश गव्हाणे और बायोन एनालिटिक्स के प्रबंध संचालक राजीव नायर समेत कई लोग मौजूद थे।
सुरक्षा सेवा क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी भी आए थे, जिनमें नंदकिशोर भट, मोहित भूगणि, कुणाल भोगल, स्वप्नील कुटे, सुमित शाह, ब्रिगेडियर सुनील कुमार, सिमएक्स के पूर्वेस गडा, एएसआईएस मुंबई चैप्टर के समीर कुमार झा, मार्श मिरांडा, प्रमोद भिलारे, राकेश खेरवा और संपत सूर्यवंशी शामिल हैं। एचएसबीसी बैंक इंडिया के उपाध्यक्ष (प्रोटेक्टिव सिक्योरिटी) निलेश गाडेकर और होटल ग्रैंड हयात मुंबई के सहायक सुरक्षा प्रबंधक संतोष भालके को सुरक्षा सेवा में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। संचालन मृणालिनी चतुर्वेदी ने किया और मंगेश काटे ने आभार माना।
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