23 गांवों के टाउनशिप प्रोजेक्ट: PMRDA को ही प्लानिंग अथॉरिटी रखने की क्रेडाई की मांग
क्रेडाई पुणे मेट्रो ने राज्य सरकार से कहा है कि पुणे महानगरपालिका में शामिल 23 गांवों के इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए PMRDA ही प्लानिंग अथॉरिटी बनी रहे।
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पुणे, 23 अक्टूबर 2026: कॉन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन्स ऑफ इंडिया (क्रेडाई) पुणे मेट्रो ने महाराष्ट्र सरकार से मांग की है कि पुणे महानगरपालिका (PMC) में शामिल किए गए 23 गांवों के इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (PMRDA) को ही प्लानिंग अथॉरिटी बनाए रखा जाए।
यह मांग राज्य सरकार के 12 फरवरी 2026 के फैसले के बाद उठी है। उस फैसले में इन गांवों के लिए PMC को प्लानिंग अथॉरिटी नियुक्त किया गया था। क्रेडाई पुणे मेट्रो के अध्यक्ष मनीष जैन ने राज्य के नगर विकास विभाग को चिट्ठी लिखी है। उसमें उन्होंने कहा है कि इस बदलाव से चालू टाउनशिप प्रोजेक्ट की मंजूरियों में देरी हो सकती है।
खासकर उन प्रोजेक्ट पर असर पड़ सकता है जिनके रिवाइज्ड मास्टर लेआउट PMRDA पहले ही मंजूर कर चुकी है और जिनके डेवलपर्स ने जरूरी प्रीमियम भी भर दिया है।
इनमें से कुछ प्रोजेक्ट पूरी तरह PMC की सीमा में आते हैं, जबकि कुछ का इलाका PMC और PMRDA दोनों के अंतर्गत फैला है। क्रेडाई के मुताबिक कई प्रोजेक्ट का विकास कार्य काफी आगे बढ़ चुका है। ऐसे में नई व्यवस्था में बाकी और आगे की मंजूरियां कैसे निपटेंगी, इसे लेकर चिंता है।
एसोसिएशन का दावा है कि PMRDA के मुकाबले PMC के पास बिल्डिंग परमिशन और लेआउट मंजूरी के कहीं ज्यादा प्रस्ताव पेंडिंग पड़े हैं। इस वजह से महानगरपालिका से क्लियरेंस मांगने वाले डेवलपर्स को ज्यादा इंतजार करना पड़ता है।
क्रेडाई ने यह भी बताया कि इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रोजेक्ट को लागू नियमों में तय समय के अंदर पूरा करना जरूरी होता है। विकास की अनुमति मिलने में देरी हुई तो प्रोजेक्ट का काम और उसके पूरा होने का शेड्यूल प्रभावित हो सकता है।
एसोसिएशन की दलील है कि अगर PMRDA ही इन प्रोजेक्ट को देखती रहे तो काम में निरंतरता रहेगी, क्योंकि पिछली मंजूरियां उसी ने प्रोसेस की थीं। क्रेडाई ने PMRDA में डायरेक्टर ऑफ टाउन प्लानिंग के होने का भी हवाला दिया। उसके मुताबिक यह पद तकनीकी प्लानिंग के मसलों को ज्यादा तेजी से सुलझाने में मदद कर सकता है।
इंटीग्रेटेड टाउनशिप के नियमों के तहत, जब कोई प्रोजेक्ट एक से ज्यादा प्लानिंग अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र में आता है, तब राज्य सरकार तय कर सकती है कि अनुमति देने और प्रोजेक्ट की निगरानी का जिम्मा किस अथॉरिटी का होगा।
इसी प्रावधान का हवाला देते हुए क्रेडाई ने सरकार से कहा है कि जिम्मेदारी PMC को सौंपने के बजाय 23 गांवों के सभी इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए PMRDA को प्लानिंग अथॉरिटी घोषित किया जाए।
राज्य के नगर विकास विभाग ने इस प्रस्ताव पर PMC की राय मांगी है। क्रेडाई की मांग पर सरकार क्या फैसला लेती है, इसमें महानगरपालिका के जवाब की अहम भूमिका रहने की उम्मीद है।
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