राजावाडी अस्पताल में बेकार पड़े रुग्ण मित्र बूथ पर नीली तिरपाल डाली गई
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घाटकोपर ईस्ट के राजावाडी अस्पताल में मरीजों की मदद के लिए बना रुग्ण मित्र बूथ अब नीली तिरपाल से ढक दिया गया है। यह कदम उस खबर के एक दिन बाद उठाया गया, जिसमें बताया गया था कि स्टाफ की कथित कमी की वजह से यह सुविधा इस्तेमाल में ही नहीं है।
बूथ ढके जाने के बाद इलाके के लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हेल्प डेस्क को छिपाने के बजाय उसे चालू करना चाहिए। अस्पताल प्रशासन ने इस फैसले की अलग वजह बताई है।
यह बूथ मरीजों और उनके रिश्तेदारों को अस्पताल में रास्ता ढूंढने में मदद के लिए बनाया गया था। रुग्ण मित्र सुविधाओं का ऐलान 2023 में उपनगर के पालक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने किया था।
रमाबाई आंबेडकर नगर के रहने वाले 49 साल के विजय सुसविरकर ने कहा, "जनता की भलाई के लिए बना बूथ ढकना गलत है। इसे छिपाने के बजाय प्रशासन को देखना चाहिए कि यह अपने मकसद के लिए काम करे। हेल्प डेस्क चालू हो तो लोगों को फायदा होगा। इमरजेंसी में मरीजों और उनके रिश्तेदारों को संबंधित विभाग पहचानने और मरीज भर्ती है वह वार्ड ढूंढने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए।"
घाटकोपर ईस्ट के पंतनगर के रहने वाले 59 साल के शरद कोलमकर ने कहा कि मरीजों को अस्पताल में रास्ता ढूंढने में अक्सर परेशानी होती है, खासकर जब जांच और दूसरी प्रक्रियाओं के लिए एक विभाग से दूसरे में जाना पड़े। उन्होंने कहा, "जो हेल्प डेस्क लोगों की सहूलियत के लिए थी, उसे क्यों ढका गया? एक्स-रे या सीटी स्कैन के लिए भेजे गए मरीजों को एक मंजिल या काउंटर से दूसरे पर जाना पड़ सकता है, कभी-कभी अस्पताल स्टाफ की ठीक से मदद के बिना। चालू हेल्प डेस्क उन्हें सही विभाग तक पहुंचा सकती है और काम आसान कर सकती है। प्रशासन को मरीजों और उनके रिश्तेदारों के फायदे के लिए बूथ चालू करना चाहिए।"
राजावाडी अस्पताल की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. भारती राजुलवाला ने कहा कि उन्होंने ही बूथ को ढकने को कहा था, ताकि वह खराब न हो और लोगों की सुरक्षा बनी रहे। उनके मुताबिक पास से एंबुलेंस के लिए इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग लाइन गुजरती है।
उन्होंने यह भी कहा कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) की कंपैटिबिलिटी का काम चल रहा है। जब अस्पताल के विभाग इससे जुड़ जाएंगे, तब हेल्प डेस्क से सही मदद मिल सकेगी।
डॉ. राजुलवाला के मुताबिक इससे बूथ पर बैठा व्यक्ति कंप्यूटर रिकॉर्ड देख सकेगा और भर्ती मरीजों के बारे में सही जानकारी दे सकेगा, जैसे उनका वार्ड नंबर और मंजिल। उन्होंने कहा, "बूथ को तिरपाल से ढकने के पीछे और कोई मकसद नहीं है।"
स्थानीय शिवसेना (UBT) नेता प्रकाश वानी ने यह मुद्दा उठाया। उनका दावा है कि भीड़ वाले सरकारी अस्पताल में विभाग और वार्ड ढूंढना और प्रक्रिया समझना मुश्किल होता है। स्टाफ वाली हेल्प डेस्क एक ही जगह संपर्क का ठिकाना बनकर उलझन कम कर सकती है और लोगों को सही जगह पहुंचा सकती है।
अब सवाल यह है कि बूथ कब चालू होगा और तब तक मरीजों के लिए क्या इंतजाम रहेंगे। अस्पताल का कहना है कि इसका असरदार तरीके से चलना HMIS से जुड़ने पर निर्भर है, जबकि स्थानीय लोग चाहते हैं कि सुविधा अपने मकसद के लिए काम आए।
प्रशासन की सफाई से बूथ ढकने की वजह तो समझ आती है, लेकिन स्टाफ की कमी, इंटीग्रेशन पूरा होने की समय-सीमा और मरीजों को रास्ता बताने की व्यवस्था के सवाल अब भी बने हुए हैं।
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