मुंबई लोकल में फोन पर तेज़ आवाज़ में गाने-रील चलाए तो 5,000 रुपये तक जुर्माना संभव
मुंबई की लोकल में बिना ईयरफोन तेज़ आवाज़ में गाने या रील चलाने पर रेलवे एक्ट की धारा 145 के तहत कार्रवाई पर विचार हो रहा है।
मुंबई की लोकल ट्रेनों में अब बिना ईयरफोन के फोन पर तेज़ आवाज़ में गाने सुनना, वीडियो देखना या सोशल मीडिया रील चलाना महंगा पड़ सकता है। सेंट्रल रेलवे (CR) और वेस्टर्न रेलवे (WR) के सबअर्बन नेटवर्क पर सफर करने वालों के लिए सज़ा का प्रावधान हो सकता है। रेलवे अधिकारी शोर की परेशानी रोकने और यात्रियों का सफर बेहतर बनाने के लिए कोशिशें तेज़ कर रहे हैं।
प्रस्तावित एनफोर्समेंट ड्राइव में रेलवे स्टाफ़ पहले उन यात्रियों को चेतावनी देगा, जो फोन के स्पीकर से आवाज़ चलाकर दूसरों को परेशान करते हैं। रोके जाने के बाद भी जो लोग नहीं मानेंगे, उन पर रेलवे एक्ट की धारा 145 के तहत कार्रवाई हो सकती है। यह धारा रेलवे परिसर में परेशानी और गलत व्यवहार से जुड़ी है।
हालात और लागू कानूनी नियमों के हिसाब से सज़ा में 5,000 रुपये तक का जुर्माना और छह महीने तक की जेल हो सकती है। सेंट्रल रेलवे और वेस्टर्न रेलवे ने अपने स्टाफ़ को निर्देश दिया है कि वे बिना ईयरफोन के तेज़ आवाज़ में ऑडियो बजाने वाले यात्रियों की पहचान करें। यह ड्राइव लोकल ट्रेनों से शुरू होने की उम्मीद है और बाद में इसे लंबी दूरी की सेवाओं तक बढ़ाया जा सकता है।
वेस्टर्न रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि सबसे पहले यात्रियों से परेशान करने वाला व्यवहार बंद करने को कहा जाएगा। अगर वे चेतावनी को नज़रअंदाज़ करते हैं, तो रेलवे स्टाफ़ आगे की कार्रवाई कर सकता है।
जिन यात्रियों को दिक्कत हो रही है, वे टिकट चेकर या टिकट कलेक्टर से संपर्क कर शिकायत कर सकते हैं। इसके बाद रेलवे स्टाफ़ दखल देकर उस यात्री को तेज़ आवाज़ में ऑडियो बंद करने का निर्देश दे सकता है।
सख्ती की वजह यह है कि सस्ते मोबाइल इंटरनेट के चलते वीडियो, म्यूज़िक और रील आसानी से मिल रहे हैं। इसी वजह से भीड़ वाली सबअर्बन ट्रेनों में फोन स्पीकर पर कंटेंट चलाना चिंता का विषय बन गया है। तेज़ आवाज़ से आराम करने, पढ़ने या बातचीत करने वाले यात्रियों को दिक्कत हो सकती है, खासकर पीक आवर्स में जब डिब्बे खचाखच भरे होते हैं। ऐसी बातों से यात्रियों के बीच बहस भी हो सकती है।
फ़ेडरेशन ऑफ़ सबअर्बन रेल पैसेंजर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट नंदकुमार देशमुख ने बताया है कि भीड़ वाली ट्रेनों में फोन की तेज़ आवाज़ से कैसे परेशानी होती है और कभी-कभी झगड़े भी हो जाते हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का मकसद यात्रियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट में एक-दूसरे के आराम का सम्मान करने के लिए बढ़ावा देना है।
रेलवे अधिकारी स्टेशनों और ट्रेनों के अंदर पब्लिक अनाउंसमेंट करने पर भी विचार कर रहे हैं, ताकि यात्रियों को सही व्यवहार के बारे में बताया जा सके। ये मैसेज मराठी, हिंदी और इंग्लिश में दिए जा सकते हैं।
बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) कंपनी ने पहले ही बसों के अंदर स्टिकर लगा दिए हैं, ताकि यात्री मोबाइल पर तेज़ आवाज़ में ऑडियो न चलाएं। यह कदम दक्षिणी रेलवे की ऐसी ही पहल के बाद उठाया गया है। दक्षिणी रेलवे ने अपने डिवीजनों को तेज़ म्यूज़िक, फोन स्पीकर पर चलने वाले वीडियो और बहुत ज़्यादा तेज़ बातचीत पर ध्यान देने का निर्देश दिया था। रेलवे बोर्ड ने जुलाई 2012 में शोर वाले फोन कॉल, तेज़ आवाज़ में बातचीत और खराब रिंगटोन के बारे में अवेयरनेस बढ़ाने के लिए गाइडलाइन भी जारी की थीं।
जुर्माने से बचने के लिए यात्रियों को म्यूज़िक सुनते या वीडियो देखते समय ईयरफोन या हेडफोन लगाना चाहिए, फोन पर बात सही आवाज़ में करनी चाहिए और रेलवे स्टाफ़ के निर्देश मानने चाहिए। प्रस्तावित कार्रवाई आम मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक नहीं लगाती। ध्यान उस व्यवहार पर है, जिससे साथी यात्रियों को परेशानी होती है।
रोज़ाना सफर करने वालों के लिए संदेश साफ़ है: ऑडियो अपने तक रखें, दूसरों का सम्मान करें और मुंबई की भीड़ भरी लोकल ट्रेनों को सबके लिए ज़्यादा आरामदायक बनाने में मदद करें।
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