मुंबई के 17 साल के छात्र ने बनाया FasalForward, किसानों को फसल का सही भाव दिलाने की कोशिश
दक्षिण मुंबई के स्कूल में बारहवीं के छात्र अंश जालान ने किसानों के लिए मंडी भाव और 30 दिन का अनुमान बताने वाला प्लेटफॉर्म बनाया है।
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दक्षिण मुंबई के एक स्कूल में बारहवीं में पढ़ने वाले 17 साल के अंश जालान ने किसानों के लिए FasalForward नाम का प्लेटफॉर्म तैयार किया है। इसका मकसद है कि किसानों को अपनी उपज का वाजिब दाम मिल सके। यह वेबसाइट राज्य की अलग-अलग मंडियों के भाव की तुलना करती है, अगले 30 दिनों के भाव का अनुमान बताती है और किसानों को सलाह देती है कि फसल अभी बेचें या कुछ दिन रोककर रखें।
अंश जालान का कहना है, "मुझे समझ आया कि बहुत से किसान बिचौलियों के बताए भाव पर ही निर्भर रहते हैं और मंडी के भाव खुद नहीं देखते, जबकि सारी जानकारी इंटरनेट पर मौजूद है। तो मैंने सोचा कि अलग-अलग सरकारी वेबसाइटों की यह जानकारी एक जगह लाना मददगार होगा। यह तकनीक मेरी दुनिया का एक हिस्सा उनकी दुनिया तक पहुंचाने में मदद करती है। यह प्लेटफॉर्म किसानों को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से दूर होने और बाजार के बेहतर भाव का फायदा उठाने में भी मदद कर सकता है।"
अंश ने बताया कि जलगांव में उनकी मुलाकात एक आदमी से हुई, जिसने अपनी चने की उपज गलत समय पर बेच दी और इस वजह से उसे करीब दसियों हजार रुपये का नुकसान हुआ। अगर वह थोड़ा और इंतजार करता, तो उसे काफी ज्यादा मुनाफा होता। अंश के मुताबिक किसानों के सामने भावों की जानकारी का ढेर लगा देने से समस्या हल नहीं होती। अनुमान से उन्हें फैसला लेने में मदद मिल सकती है, क्योंकि उसमें फसल के खराब होने और स्टोरेज जैसी बातों का भी हिसाब रहता है।
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत जलगांव में हुई, जो केले की खेती के लिए जाना जाने वाला जिला है। प्लेटफॉर्म सरकारी पोर्टलों से सीधे APMC के भाव अपने आप उठा लेता है। पेचीदा चार्ट दिखाने के बजाय यह मुश्किल आंकड़ों को साफ और आसान शक्ल में पेश करता है। एडवांस्ड प्रेडिक्टिव मॉडल और डिसीजन ट्री की मदद से यह किसानों को मौसम की भारी अनिश्चितता के बीच, जैसे मौजूदा सूखा, भाव के मामले में योजना बनाने में सहारा देता है।
अब तक वेबसाइट से करीब 50 यूजर जुड़ चुके हैं। छात्र का दावा है कि इसमें लगा प्रेडिक्टिव मॉडल लगभग 70 प्रतिशत सटीकता से काम करता है। प्लेटफॉर्म ने अपना दायरा बढ़ाते हुए ऐप भी लॉन्च किया है। फिलहाल यह सिस्टम महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा और यूपी की 18 अलग-अलग फसलों के भाव का अनुमान देता है। ज्यादा से ज्यादा लोग इसे इस्तेमाल कर सकें, इसके लिए यह अंग्रेजी, हिंदी और मराठी में चलता है।
यह विचार तब आया जब अंश खेलकूद के सिलसिले में महाराष्ट्र में घूम रहे थे। किसानों से बात करके और उनकी दिक्कतें समझकर उन्होंने तय किया कि अपनी कोडिंग की जानकारी को लोगों के काम में लगाएंगे। उन्होंने मौजूदा खेती वाले ऐप बनाने वाले डेवलपरों से भी बात की और किसानों की जरूरतें समझने के लिए पुणे के आसपास के किसानों से भी मिले।
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