गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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01:23 IST

वसई-विरार में 80 पुनर्विकास प्रोजेक्ट अतिरिक्त एफएसआई विवाद में फंसे, अतिरिक्त निर्माण पर रोक

वसई-विरार महानगरपालिका की फेरजांच में 2022 से 2025 के बीच मंजूर हुए 80 से ज्यादा पुनर्विकास प्रोजेक्ट में तय सीमा से ज्यादा एफएसआई मंजूर होने की बात सामने आई है, जिसके बाद अतिरिक्त बांधकाम रोक दिया गया है और घर-दुकान की खरीद-बिक्री के दस्तावेज पंजीकरण पर भी रोक लगाई गई है।

वसई-विरार में 80 पुनर्विकास प्रोजेक्ट अतिरिक्त एफएसआई विवाद में फंसे, अतिरिक्त निर्माण पर रोक तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

वसई-विरार शहर में पुनर्विकास के नाम पर दी गई बांधकाम परवानगियों की दोबारा जांच शुरू होने के बाद डेवलपर्स के साथ-साथ घर खरीदने वालों की मुश्किलें भी बढ़ती दिख रही हैं। महानगरपालिका ने अपनी फेरजांच में पाया है कि 2022 से 2025 के बीच मंजूर किए गए 80 से ज्यादा पुनर्विकास प्रोजेक्ट में तय सीमा से ज्यादा एफएसआई मंजूर किया गया था।

इस खुलासे के बाद इन प्रोजेक्ट में हो रहे अतिरिक्त बांधकाम को तुरंत रोक दिया गया है। साथ ही इन प्रोजेक्ट में फ्लैट और दुकानों की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों का पंजीकरण भी रोकने के निर्देश दिए गए हैं। इन प्रोजेक्ट को ओसी यानी अधिभोग प्रमाणपत्र दिया जाए या नहीं, इसके लिए अब महानगरपालिका राज्य सरकार के मार्गदर्शन का इंतजार कर रही है।

2020 में यूडीसीपीआर लागू होने के बाद शहर में पुरानी और खतरनाक इमारतों के पुनर्विकास को बड़ा बढ़ावा मिला था। लेकिन पुनर्विकास के दौरान दी गई विभिन्न छूट, इन्सेंटिव एफएसआई और बढ़े हुए बांधकाम क्षेत्र की मंजूरी में नियमों का पालन हुआ या नहीं, इस पर सवाल उठने लगे। इसी के बाद संबंधित फाइलों की फेरजांच शुरू की गई थी।

जांच में सामने आया कि 80 से ज्यादा प्रोजेक्ट में मंजूर बांधकाम क्षेत्र तय सीमा से ज्यादा था। यह मामला सिर्फ इन 80 प्रोजेक्ट तक सीमित रहेगा या नहीं, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि नगररचना विभाग अन्य पुनर्विकास फाइलों की जांच भी जारी रखे हुए है। ऐसे में जांच पूरी होने के बाद इस तरह के प्रोजेक्ट की संख्या और बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

फेरजांच में अगर नियमों के खिलाफ मंजूरी दी गई साबित होती है, तो कुछ प्रोजेक्ट की पुरानी बांधकाम परवानगी रद्द करके डेवलपर्स को नए सिरे से बांधकाम परवानगी यानी सीसी लेने को कहा जा सकता है। इन प्रोजेक्ट की आगे की कानूनी और प्रशासनिक स्थिति सुनवाई और सरकार के मार्गदर्शन के बाद ही साफ हो पाएगी। इस बीच जिन नागरिकों ने इन प्रोजेक्ट में घर या दुकान खरीदे हैं, उनके सामने भी कई सवाल खड़े हो गए हैं, दस्तावेज पंजीकरण हो चुका है, लेकिन प्रोजेक्ट को अंतिम ओसी मिलेगी या नहीं, मंजूर बांधकाम वैध ठहरेगा या नहीं और आगे क्या प्रशासनिक कार्रवाई होगी, इस पर घर खरीदने वालों की निगाहें टिकी हैं। महानगरपालिका ने नागरिकों से अपील की है कि अंतिम फैसला होने तक इन प्रोजेक्ट में कोई नया आर्थिक लेन-देन या खरीद-बिक्री करते समय खास सावधानी बरतें।

अतिरिक्त एफएसआई मंजूरी का सवाल खड़ा होने के बाद इन प्रोजेक्ट को ओसी दी जा सकती है या नहीं, यह अहम सवाल बन गया है। इसी को लेकर महानगरपालिका ने राज्य सरकार से मार्गदर्शन मांगा है। सरकार का फैसला आने तक संबंधित प्रोजेक्ट में अतिरिक्त बांधकाम पर रोक जारी रहेगी। महानगरपालिका ने डेवलपर्स को अपनी बात रखने का मौका देने के लिए सुनवाई शुरू की है, जिसमें असल में कितना बांधकाम हुआ, मंजूर क्षेत्र कितना है और असल में कितने क्षेत्र का इस्तेमाल हुआ, इसकी तकनीकी पड़ताल की जाएगी।

इस पूरे मामले में ईडी की कार्रवाई की पृष्ठभूमि भी चर्चा में है। 2022 से 2025 के दौरान महानगरपालिका के प्रशासक रहे पूर्व आयुक्त अनिलकुमार पवार और उस वक्त नगररचना उपसंचालक रहे वाय. एस. रेड्डी के कार्यकाल में पुनर्विकास प्रोजेक्ट को अतिरिक्त एफएसआई मंजूर करने की शिकायतें पहले भी की जा चुकी थीं। बांधकाम गड़बड़ी के मामले में ईडी ने दोनों अधिकारियों पर कार्रवाई की थी, जिसके बाद इस दौर की नगररचना विभाग की फाइलों की फेरजांच खास अहमियत रखती है।

इसमें एक आर्किटेक्ट की आधी से ज्यादा फाइलें शामिल हैं और उन पर भी ईडी कार्रवाई कर चुकी है। इतना ही नहीं, फिलहाल ईडी की कार्रवाई में आए सभी आर्किटेक्ट की एंटी करप्शन ब्यूरो से दोबारा जांच की गई है, जिसमें यह आर्किटेक्ट भी शामिल है।

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