टोक्यो की सस्ती फ्लाइट बुक करने के लिए ये 5 तरीके काम आ सकते हैं
फ्लैश सेल का इंतजार किए बिना टोक्यो की टिकट पर पैसे बचाने के लिए तारीख, रूट और एयरपोर्ट चुनने के कुछ आसान तरीके।
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टोक्यो को महंगी जगह माना जाता है, लेकिन वहां जाने के लिए टिकट भी महंगी ही हो, यह जरूरी नहीं। ज्यादातर लोग एक बार सर्च करते हैं, जो फ्लाइट सबसे सुविधाजनक लगे उसे तुरंत बुक कर लेते हैं। समझदार ट्रैवलर ऐसा नहीं करते, वे बुकिंग से पहले अलग-अलग तारीखें, रूट, एयरपोर्ट, कनेक्शन और कुल खर्च आपस में कंपेयर करते हैं। इसके लिए फ्रीक्वेंट फ्लायर बनना जरूरी नहीं, न ही रोज घंटों एयरलाइन की वेबसाइट खंगालनी पड़ती है। कुछ प्रैक्टिकल तरीके अपनाकर जापान की इंटरनेशनल ट्रिप पर अच्छा-खासा फर्क पड़ सकता है।
पहला तरीका है तारीखों को लेकर फ्लेक्सिबल रहना। एयरफेयर काफी हद तक डिमांड पर निर्भर करता है। शुक्रवार को जाने वाली या रविवार को लौटने वाली फ्लाइट, हफ्ते के किसी कम पॉपुलर दिन के मुकाबले काफी महंगी पड़ सकती है। अगर शेड्यूल में थोड़ी भी गुंजाइश हो तो बुकिंग से पहले कई डिपार्चर और रिटर्न तारीखें कंपेयर करनी चाहिए। मसलन 12 जून की फ्लाइट ही ढूंढने के बजाय उससे कुछ दिन पहले और बाद की तारीखें भी देखी जाएं, दो-तीन दिन आगे-पीछे करने से ही कुल किराए में फर्क आ सकता है। जिनकी कोई मीटिंग, इवेंट या फिक्स छुट्टी नहीं है, उनके लिए यह तरीका खासतौर पर काम का है। मंगलवार, बुधवार और शनिवार की फ्लाइट कभी-कभी सस्ती मिल जाती हैं क्योंकि डिमांड कम रहती है, मगर हर रूट के लिए यह एक जैसा सस्ता दिन नहीं होता। एयरलाइन सीटों की उपलब्धता और डिमांड के हिसाब से किराया लगातार बदलती रहती हैं। इसलिए किसी एक "मंगलवार को बुक करो" वाले फॉर्मूले पर भरोसा करने के बजाय पसंदीदा तारीख के आगे-पीछे तीन से सात दिन की रेंज देखें, डिपार्चर और रिटर्न दोनों तारीखें कंपेयर करें, वन-वे कॉम्बिनेशन भी आजमाएं और बैगेज व दूसरे चार्ज जोड़कर आखिरी कीमत देखें।
दूसरा तरीका है सबसे तेज रूट को ही आंख मूंदकर न चुनना। डायरेक्ट फ्लाइट आराम की होती है, मगर उसका खर्च ज्यादा होता है। पैसे बचाने हों तो डायरेक्ट फ्लाइट की तुलना एक स्टॉप वाली फ्लाइट से करनी चाहिए, सोल, सिंगापुर, बैंकॉक जैसे किसी एशियाई हब से होकर जाने पर किराया काफी कम पड़ सकता है, बशर्ते सफर में कुछ घंटे ज्यादा लगने से दिक्कत न हो। यहां सिर्फ टिकट की कीमत नहीं बल्कि पूरा हिसाब देखना जरूरी है, क्योंकि सस्ती दिखने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट में महंगा चेक्ड बैगेज, बहुत लंबा लेओवर, एयरपोर्ट बदलना, रात में रुकना, अलग से ट्रांसपोर्ट या पहली फ्लाइट लेट होने पर कोई सुरक्षा न मिलना जैसी बातें शामिल हो सकती हैं। टोक्यो में मुख्य रूप से दो एयरपोर्ट हैं, हनेदा और नारिता। हनेदा शहर के करीब है, नारिता दूर है मगर वहां फ्लाइट के ऑप्शन और किराया अलग हो सकता है। दोनों एयरपोर्ट कंपेयर करने चाहिए, अगर नारिता की फ्लाइट काफी सस्ती हो तो शहर तक पहुंचने का खर्च और समय जोड़कर देखें, कई बार सस्ती फ्लाइट फिर भी फायदे की रहती है तो कई बार थोड़ी महंगी हनेदा फ्लाइट बेहतर साबित होती है।
तीसरा तरीका है बार-बार सर्च करना, लेकिन हद से ज्यादा इंतजार न करना। हफ्तों तक कीमत चेक करते रहना जरूरी नहीं, बल्कि इससे उलटा असर भी हो सकता है क्योंकि किराया लगातार बदलता है और अच्छा रेट हाथ से निकल सकता है। इसके बजाय अपने रूट के लिए एक वाजिब कीमत तय करें, कई तारीखें और रूट देखकर सामान्य रेंज समझें, जहां मुमकिन हो प्राइस अलर्ट लगाएं और जैसे ही कोई अच्छी डील दिखे, बुक करने को तैयार रहें। यह मानना गलत होगा कि मंगलवार दोपहर या कोई खास समय ही सस्ती फ्लाइट देता है, असल में किराया सीट की उपलब्धता, डिमांड, रूट की पॉपुलैरिटी, सीजन, कॉम्पिटीटर की कीमतों, स्पेशल ऑफर, छुट्टियों और एयरलाइन के अपने सिस्टम पर निर्भर करता है।
चौथा तरीका है सिर्फ दिखाई गई कीमत नहीं बल्कि पूरा खर्च कंपेयर करना। कई बजट एयरलाइन शुरुआत में कम किराया दिखाती हैं और बाद में बैगेज, सीट सिलेक्शन या मील के लिए अलग चार्ज लगाती हैं। मान लीजिए एक फ्लाइट में टिकट सस्ता है मगर चेक्ड बैगेज महंगा, सीट पेड और एयरपोर्ट दूर है, जबकि दूसरी फ्लाइट में टिकट थोड़ा महंगा है मगर बैगेज शामिल है और एयरपोर्ट सुविधाजनक है, तो पहली नजर में सस्ती दिखने वाली फ्लाइट आखिर में महंगी पड़ सकती है। बुकिंग से पहले बेस फेयर, टैक्स और एयरपोर्ट चार्ज, केबिन व चेक्ड बैगेज, सीट सिलेक्शन, मील चार्ज, एयरपोर्ट तक आने-जाने का खर्च और कैंसिलेशन की शर्तें जरूर देख लें। सिर्फ 30 डॉलर बचाने के लिए 14 घंटे का लेओवर झेलना हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होगा।
पांचवां तरीका है अलग-अलग रूट कॉम्बिनेशन आजमाना। सिर्फ राउंड ट्रिप टिकट के बजाय दो अलग वन-वे टिकट, मल्टी-सिटी इटिनरी, अलग डिपार्चर एयरपोर्ट, टोक्यो के अलग एयरपोर्ट, कनेक्टिंग फ्लाइट या ओपन-जॉ इटिनरी भी देखी जा सकती हैं। ओपन-जॉ का मतलब है एक शहर में उतरना और दूसरे शहर से वापसी लेना, अगर टोक्यो पूरी जापान ट्रिप का सिर्फ एक हिस्सा है तो यह तरीका काम आ सकता है, यानी टोक्यो में उतरकर ट्रेन से जापान घूमें और अगर कुल किराया सही बैठे तो किसी दूसरे बड़े शहर से वापसी लें। अलग-अलग टिकट बुक करने में जोखिम भी है, अगर पहली फ्लाइट लेट हो जाए और दूसरी छूट जाए तो दूसरी एयरलाइन जिम्मेदार नहीं होगी, इसलिए दोनों फ्लाइट के बीच पर्याप्त समय रखना चाहिए, जरूरत पड़े तो बीच में रात रुकना भी बेहतर है बजाय बहुत टाइट कनेक्शन बनाने के।
टोक्यो की फ्लाइट के लिए कोई एक तय बुकिंग विंडो नहीं है जो हमेशा सबसे सस्ती कीमत दे, मगर इंटरनेशनल ट्रिप के लिए पहले से प्लानिंग करना समझदारी है। चेरी ब्लॉसम सीजन, जापान की बड़ी छुट्टियों और दूसरे पीक टाइम में टोक्यो की डिमांड काफी बढ़ जाती है। अगर तारीखें फिक्स हैं तो आखिरी हफ्तों तक इंतजार करने के बजाय पहले से रिसर्च शुरू कर देनी चाहिए, और अगर तारीखों में फ्लेक्सिबिलिटी है तो अलग-अलग समय कंपेयर करके सस्ता विंडो चुना जा सकता है। जल्दी रिसर्च करने और तुरंत बुक कर लेने में फर्क समझना जरूरी है, महीनों पहले से कीमत पर नजर रखी जा सकती है ताकि सामान्य रेंज समझ आए और बजट के मुताबिक सही मौके पर बुकिंग हो सके।
इनकॉग्निटो मोड में सर्च करने से एयरलाइन किराया नहीं बढ़ाती, यह दावा अक्सर किया जाता है, मगर असल में किराया इन्वेंटरी, डिमांड और एयरलाइन के प्राइसिंग सिस्टम की वजह से बदलता है, प्राइवेट ब्राउज़िंग से कोई सीक्रेट छूट नहीं मिलती। हां, इससे पुरानी सर्च हिस्ट्री के बिना साफ-सुथरी तुलना जरूर की जा सकती है। सबसे जरूरी बात है फ्लैश सेल का इंतजार न करना, क्योंकि फ्लैश सेल अच्छा किराया दे सकती है मगर पूरी प्लानिंग उसी पर टिकाना जोखिम भरा है, महीनों इंतजार करने के बाद भी अपनी जरूरत का रूट और तारीख उस ऑफर में शामिल न हो, ऐसा हो सकता है। बेहतर यही है कि अपने रूट की सामान्य कीमत समझें, उस पर नजर रखें और जैसे ही सच में अच्छी डील दिखे, बुक कर लें।
कुल मिलाकर, टोक्यो की सस्ती फ्लाइट ढूंढने का कोई एक सीक्रेट ट्रिक नहीं है, बल्कि सर्च करने का तरीका बदलना ही असली बात है। तारीखों में फ्लेक्सिबल रहें, डायरेक्ट और कनेक्टिंग रूट कंपेयर करें, टोक्यो के दोनों एयरपोर्ट देखें, बैगेज और बाकी खर्च जोड़कर हिसाब लगाएं, कीमत पर नजर रखें मगर किसी काल्पनिक परफेक्ट डील के लिए हमेशा इंतजार न करें। सबसे पहली दिखने वाली फ्लाइट को ही सबसे अच्छी मान लेना सही नहीं। थोड़ी सी रिसर्च से सस्ती तारीख, बेहतर कनेक्शन या सुविधाजनक रूट मिल सकता है, और इन तरीकों को साथ अपनाकर बिना किसी फ्लैश सेल के इंतजार के भी टोक्यो ट्रिप का खर्च घटाया जा सकता है।