शिक्षा और नौकरी पर सियासत तेज, यूपी में स्मार्ट स्कूल तो एमपी में राहुल का डेटा वार
यूपी सरकार स्कूलों को स्मार्ट बना रही है तो मध्य प्रदेश में राहुल गांधी छात्रों के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं।
देश में शिक्षा और रोजगार का मुद्दा एक बार फिर सियासी अखाड़ा बन गया है, और इस बार सीधी टक्कर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच दिख रही है। एक तरफ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार डिजिटल क्रांति के दूसरे चरण में स्कूलों का कायाकल्प कर रही है, तो दूसरी तरफ मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता राहुल गांधी 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के जरिए राज्य सरकार को घेरने की तैयारी में जुटे हैं।
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में 'ऑपरेशन कायाकल्प' के बाद अब स्मार्ट शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। योगी कैबिनेट ने 14,429 प्राइमरी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने के लिए 300 करोड़ रुपये के प्रारंभिक बजट को मंजूरी दी है। हर स्कूल को इसके लिए 2,07,910 रुपये दिए जाएंगे। इन स्कूलों में स्मार्ट टीवी, 3D एनिमेशन कंटेंट, आईसीटी लैब और डिजिटल लाइब्रेरी बनाई जाएगी। राज्य में पहले से ही 32,000 से ज्यादा स्कूलों में स्मार्ट क्लास चल रहे हैं और 2.61 लाख टीचरों को टैबलेट दिए जा चुके हैं। हालांकि कांग्रेस और सपा ने इस योजना को 'चुनावी स्टंट' बताया है और आरोप लगाया है कि यह बजट प्रस्ताव फरवरी 2026 के मुख्य बजट में ही रखा जा चुका था।
उधर मध्य प्रदेश में 19 सितंबर 2026 को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी इंदौर में युवाओं और छात्रों से सीधी बातचीत करेंगे। प्रशासन ने सिक्योरिटी की वजह से कार्यक्रम की जगह को लेकर कुछ शर्तें लगाई हैं और 10 लाख रुपये की जमानत राशि के साथ 5 शर्तों पर परमिशन दी है।
कांग्रेस ने इस मौके पर डेटा के जरिए सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का कहना है कि देश में 12 करोड़ बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं और 10 करोड़ युवाओं को कॉलेज की पढ़ाई नसीब नहीं होती। देश में टीचरों के 16 फीसदी पद खाली पड़े हैं, जिसमें यूपी में 22 फीसदी और एमपी में 19 फीसदी पद रिक्त हैं। 2014 के मुकाबले मध्य प्रदेश में 30,650 स्कूल कम हो गए हैं। साथ ही हायर एजुकेशन में ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) सिर्फ 30 फीसदी है।
कांग्रेस के इन आरोपों का जवाब देते हुए बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी के दौरे पर तंज कसा है। वहीं मोहन यादव सरकार ने साफ किया है कि मध्य प्रदेश ने इस साल शिक्षा के लिए 45,358 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जो कुल बजट का 13.7 फीसदी है। सरकार का कहना है कि 'सुपर 100' और 'संदीपनी स्कूल' जैसी योजनाओं के जरिए शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।