"शादी के लिए लड़की दोगे क्या?" सोलापुर में युवक का अनोखा प्रदर्शन, मांगों पर चर्चा
सोलापुर के मोहोळ तालुका के २८ वर्षीय किसान युवक ने बाशिंग बांधकर धरना दिया, सरकार से विवाह अनुदान और बिना ब्याज कर्ज की मांग की
सोलापुर जिले के मोहोळ तालुका में कुरुल गांव के रहने वाले २८ साल के किसनदेव दत्तात्रेय ननावरे ने शादी के लिए लड़की न मिलने की अपनी परेशानी को लेकर एक अलग ही तरीके से आवाज उठाई। सिर पर बाशिंग बांधकर उन्होंने जिला परिषद कार्यालय के पूनम गेट के सामने एक दिन का धरना दिया। उनका कहना है कि खेती करने वाले और बेरोजगार होने की वजह से उनकी शादी नहीं जुड़ पा रही है।
किसनदेव के पास करीब आधा एकर खेत है, लेकिन फिलहाल वे बेरोजगार हैं। उन्हीं की माने तो यही स्थिति उनकी शादी के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई है। इसी वजह को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए उन्होंने सिर पर बाशिंग बांधकर यह धरना दिया, जिसने आसपास के लोगों का ध्यान खींचा। ननावरे का कहना है कि शादी के लिए लड़की न मिलने की यह दिक्कत सिर्फ उनकी अकेली की नहीं है, बल्कि कम जमीन वाले किसानों और बेरोजगार नौजवानों के सामने आम तौर पर आने वाली समस्या है।
अपने धरने के दौरान ननावरे ने प्रशासन के सामने कुछ मांगें भी रखीं। उनकी पहली मांग है कि समाजकल्याण विभाग के जरिए किसान और बेरोजगार युवाओं के लिए सरकारी सर्वधर्म विवाह पंजीकरण केंद्र शुरू किया जाए। उनका मानना है कि ऐसा केंद्र होने से शादी के इच्छुक लड़के-लड़कियों को एक सही मंच मिल सकेगा।
इसके अलावा ननावरे ने मांग की कि शादी करने वाले किसान और बेरोजगार युवाओं को सरकार की ओर से १ लाख रुपये का विवाह अनुदान दिया जाए। उनका कहना है कि जिन युवाओं की आर्थिक हालत की वजह से शादी में दिक्कत आ रही है, उन्हें सरकार को मदद देनी चाहिए। साथ ही शादी के बाद रहने के लिए २ लाख रुपये का घरकुल मंजूर करने की भी मांग रखी गई। इसके अलावा खुद का व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बनने के लिए २ लाख रुपये का बिना ब्याज और बिना जमानतदार वाला कर्ज देने की मांग भी उन्होंने की।
ननावरे का दावा है कि किसान और बेरोजगार युवाओं की शादी का यह मसला दिन-ब-दिन गंभीर होता जा रहा है, और यही सोचकर उन्होंने यह धरना दिया। उनके इस अनोखे अंदाज के प्रदर्शन की सोलापुर जिले में खूब चर्चा हो रही है। उन्होंने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें मान नहीं ली जातीं, तब तक वे धरने से नहीं हटेंगे। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन इन मांगों को किस नजरिए से देखता है और आगे क्या फैसला लेता है।