रेस्टॉरंट बिल में GST के नाम पर ठगी, 30 सेकंड में ऐसे करें पहचान
प्रैक्टिसिंग सीए प्रतीक भारदा के उदयपुर वाले अनुभव से पता चलता है कि कई रेस्टॉरंट गलत तरीके से बिल में GST जोड़ देते हैं, जबकि नियम के मुताबिक कंपोजिशन स्कीम में रजिस्टर्ड दुकानों को ग्राहकों से GST वसूलने का अधिकार ही नहीं होता।
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भारत में GST देना अनिवार्य है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर बार बिल में जो GST जोड़ा जाता है वो सही ही हो। कई बार रेस्टॉरंट और ढाबे GST के नाम पर ग्राहकों से एक्स्ट्रा चार्ज वसूल लेते हैं, जिसकी उन्हें इजाजत ही नहीं होती। यह बात प्रैक्टिसिंग सीए प्रतीक भारदा के एक अनुभव से सामने आई है।
प्रतीक ने बताया कि 8 सितंबर को वे उदयपुर के एक रेस्टॉरंट में गए थे। वहां उनका बिल 641.90 रुपये का बना, जिसमें 32.10 रुपये GST के तौर पर जोड़े गए थे। इसमें 2.5 प्रतिशत CGST और 2.5 प्रतिशत SGST शामिल था। पेमेंट करने से पहले प्रतीक ने यह जांचना जरूरी समझा कि क्या यह रेस्टॉरंट कंपोजिशन टैक्स भरने वाली कैटेगरी में आता है, और अगर हां तो क्या ऐसे रेस्टॉरंट ग्राहकों से GST वसूल सकते हैं।
इसके लिए प्रतीक ने बिल भरने से पहले gst.gov.in वेबसाइट खोली। उन्होंने बिल पर छपा GSTIN नंबर वेबसाइट पर डालकर सर्च किया। जब स्टेटस में 'रेगुलर टैक्सपेयर' दिखा, तभी उन्होंने पेमेंट किया। प्रतीक के मुताबिक ज्यादातर लोग रेस्टॉरंट या ढाबे में खाना खाने के बाद बिल चुकाते वक्त यह चेक ही नहीं करते कि वह बिजनेस किस टैक्स स्कीम के तहत रजिस्टर्ड है। उनका कहना है, "कंपोजिशन टैक्सपेयर आपसे GST नहीं वसूल सकता।"
नियमों के अनुसार, जो रेस्टॉरंट कंपोजिशन डीलर के तौर पर रजिस्टर्ड होते हैं, वे सरकार को एक तय दर पर टैक्स चुकाते हैं। ऐसे रेस्टॉरंट को ग्राहकों से अलग से GST वसूलने का अधिकार नहीं होता और वे बिल में अलग से GST नहीं जोड़ सकते। अगर कोई ऐसा करता है तो यह पैसा सीधे मालिक की जेब में जाता है, सरकार के खाते में नहीं। यानी रेस्टॉरंट कंपोजिशन स्कीम में रजिस्टर्ड है या रेगुलर स्कीम में, यह पता लगाने के लिए ही यह 30 सेकंड वाली जांच जरूरी है।
इसे चेक करने का तरीका आसान है। सबसे पहले फोन पर सरकारी GST पोर्टल gst.gov.in खोलें। इसके बाद मेन्यू में जाकर 'सर्च टैक्सपेयर' का ऑप्शन चुनें। फिर रेस्टॉरंट के बिल पर छपा 15 अंकों का GSTIN नंबर डालें, कैप्चा भरें और सर्च पर क्लिक करें। इसके बाद स्क्रीन पर टैक्सपेयर के प्रकार की स्थिति देखें।
अगर वहां 'कंपोजिशन' लिखा दिखे, तो इसका मतलब है कि वह रेस्टॉरंट आपसे एक रुपया भी GST नहीं वसूल सकता। ऐसे में बिल से GST तुरंत हटाने के लिए कहा जा सकता है। वहीं अगर वहां 'रेगुलर' लिखा दिखे, तो नियम के मुताबिक वह रेस्टॉरंट 5 प्रतिशत या 18 प्रतिशत GST वसूलने का हकदार है। अगर कोई कंपोजिशन रेस्टॉरंट जबरदस्ती GST वसूलने पर अड़ जाए, तो सबूत के साथ GST काउंसिल या कंज्यूमर फोरम में शिकायत की जा सकती है।