पुणे के NCL कैंपस में हर साल 17.8 करोड़ लीटर पानी रिचार्ज करेगा अमेज़न का नया प्रोजेक्ट
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अमेज़न इंडिया ने वॉटर टेक्नॉलॉजी स्टार्टअप फ्लक्सजेन के साथ मिलकर पुणे की नेशनल केमिकल लैबोरेटरी में जलसंधारण प्रोजेक्ट शुरू किया है।
पुणे की नेशनल केमिकल लैबोरेटरी यानी एनसीएल के रिसर्च कैंपस में अब पानी बचाने का एक बड़ा प्रोजेक्ट लगने वाला है। अमेज़न इंडिया ने इसके लिए वॉटर टेक्नॉलॉजी स्टार्टअप फ्लक्सजेन के साथ हाथ मिलाया है। 380 एकड़ में फैले इस कैंपस में यह प्रोजेक्ट इसी साल के आखिर तक पूरा होने की उम्मीद है, और इसके बाद हर साल करीब 17.8 करोड़ लीटर पानी का पुनर्भरण होगा।
इस प्रोजेक्ट में स्मार्ट सेंसर, एरेटर और वॉटरलेस यूरिनल जैसे कारगर उपकरण लगाए जाएंगे। मकसद है पानी की खपत कम करना, सांडपानी को इकट्ठा कर उसे साफ करके दोबारा इस्तेमाल में लाना, और पूरे कैंपस में भूजल का पुनर्भरण करना। यह पहल अमेज़न के भारत में जलसंधारण को लेकर चल रहे बड़े अभियान का ही हिस्सा है। कंपनी ने हाल ही में अपने काम में इस्तेमाल होने वाले पानी का 120 फीसदी समाज और पर्यावरण को लौटाकर 2027 के लक्ष्य से पहले ही "वॉटर पॉजिटिव" होने की उपलब्धि हासिल की है।
अमेज़न इंडिया में ऑपरेशंस के डायरेक्टर करण चुघ ने कहा, "फ्लक्सजेन के साथ यह सहयोग भारत में जलसंधारण को लेकर हमारी मजबूत प्रतिबद्धता दिखाता है। पुणे का एनसीएल कैंपस यह दिखाने के लिए बिल्कुल सही जगह है कि टेक्नॉलॉजी आधारित समाधान कितने बड़े पैमाने पर असली बदलाव ला सकते हैं। यहां एकीकृत जल प्रबंधन में निवेश करके हम सिर्फ स्थानीय पानी की समस्याओं से नहीं निपट रहे, बल्कि एक ऐसा मॉडल बना रहे हैं जिसे देशभर के दफ्तरों, कारोबारी जगहों, स्कूलों, अस्पतालों, बहु-आवासीय परिसरों और संस्थागत कैंपसों में भी लागू किया जा सकता है। अमेज़न में हमारा मानना है कि जिम्मेदार जल प्रबंधन जरूरी है, और इस तरह के सहयोग हमें तुरंत असर डालने के साथ-साथ लंबे समय के पर्यावरणीय फायदे भी दिलाते हैं।"
नेशनल केमिकल लैबोरेटरी की कंट्रोलर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन कनिका गोयल ने कहा, "एनसीएल में हमेशा से हमारा मानना रहा है कि वैज्ञानिक रिसर्च का असर असली दुनिया पर भी दिखना चाहिए। अमेज़न और फ्लक्सजेन के साथ इस सहयोग से हमें अपने कैंपस को टिकाऊ जल प्रबंधन के मॉडल में बदलने का मौका मिला है। स्मार्ट सेंसर, बारिश के पानी की हार्वेस्टिंग, पानी के पुनर्इस्तेमाल और भूजल पुनर्भरण को जोड़ने वाला यह एकीकृत तरीका समाज के फायदे के लिए विज्ञान को आगे बढ़ाने की हमारी सोच से मेल खाता है। हमें उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट देशभर की रिसर्च संस्थाओं के लिए एक मिसाल बनेगा।"
फ्लक्सजेन के सीईओ और फाउंडर गणेश शंकर ने कहा, "इस प्रोजेक्ट की खासियत यही है कि एक ही जगह पर अलग-अलग जल टेक्नॉलॉजी को जोड़कर एक पूरी जल प्रबंधन प्रणाली तैयार की जा रही है। स्थानीय जल सुरक्षा में योगदान देकर रिसर्च संस्थाएं भी ज्यादा टिकाऊ तरीके से काम कर सकती हैं, और एनसीएल कैंपस इसका आदर्श उदाहरण बनेगा।"
इस प्रोजेक्ट के तहत 2027 में एक शिक्षा अभियान भी शुरू होगा, जिसका मकसद युवाओं में जलसंधारण को लेकर जागरूकता फैलाना है। इसमें छात्रों की हर तीन महीने में एनसीएल कैंपस की विजिट शामिल होगी, जहां वे जल प्रबंधन टेक्नॉलॉजी को खुद देख-समझ सकेंगे। इसके अलावा स्थानीय स्कूलों में जलसंधारण क्लब बनाए जाएंगे और एक शैक्षणिक बोर्ड गेम "हाइड्रोक्वेस्ट" भी लॉन्च होगा, जो खेल-खेल में जलसंधारण के सिद्धांत सिखाएगा।
अमेज़न ने हाल ही में भारत में वॉटर पॉजिटिव होने की घोषणा की है, यानी कंपनी अपने कॉर्पोरेट ऑफिस, डेटा सेंटर और फुलफिलमेंट सेंटर सहित सभी कामकाज में जितना पानी इस्तेमाल करती है, उससे ज्यादा पानी अब समाज को लौटा रही है। अमेज़न ने 2027 तक भारत में वॉटर पॉजिटिव बनने का लक्ष्य रखा था, जो तय समय से पहले ही पूरा हो गया है। कंपनी ने महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली एनसीआर, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में जलसंधारण के कामों के लिए 62 करोड़ रुपये से ज्यादा की फंडिंग की प्रतिबद्धता जताई है। इन प्रोजेक्ट्स से पानलोट क्षेत्र की बहाली, तालाबों के पुनरुद्धार, कारगर सिंचाई, भूजल पुनर्भरण और स्थानीय जरूरतों के हिसाब से बनाए गए जल गुणवत्ता सुधार कार्यक्रमों के जरिए हर साल 4 अरब लीटर से ज्यादा पानी का पुनर्भरण होने की उम्मीद है।
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