पुणे अब सिर्फ शिक्षा नहीं, इंजीनियरों का भी शहर बनता जा रहा है
पुणे की पहचान शिक्षा नगरी से आईटी हब होते हुए अब इंजीनियरों के शहर की तरफ बढ़ रही है, जिसमें गाड़ी उद्योग, आईटी कंपनियां और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
एक जमाना था जब पुणे का नाम सुनते ही लोगों के जेहन में शिक्षा, साहित्य, कला-संस्कृति और यूनिवर्सिटियों का शहर आता था। फिर आईटी इंडस्ट्री के फैलने से पुणे को 'आईटी हब' के नाम से जाना जाने लगा। अब इंजीनियरिंग कॉलेज, रिसर्च संस्थान, गाड़ी उद्योग, टेक कंपनियां, इंडस्ट्रियल बेल्ट, स्टार्टअप्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसी नई टेक्नोलॉजी की वजह से पुणे की पहचान में एक और परत जुड़ रही है। शिक्षा नगरी से टेक्नोलॉजी नगरी तक का यह सफर पुणे को अब 'इंजीनियरों का शहर' बना रहा है।
महाराष्ट्र की 2025-26 की इंजीनियरिंग एडमिशन प्रोसेस में राज्य की 380 इंजीनियरिंग संस्थाएं शामिल थीं। पुणे में इंजीनियरिंग एजुकेशन भी पुरानी परंपरागत शाखाओं से आगे बढ़कर नए टेक्नोलॉजी बेस्ड कोर्सेज तक फैल चुकी है। कंप्यूटर, आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल और सिविल जैसी अलग-अलग शाखाओं में स्टूडेंट्स को मौके मिल रहे हैं, जिसकी वजह से देशभर से स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए पुणे की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।
लेकिन पुणे की यह 'इंजीनियर नगरी' वाली पहचान सिर्फ कॉलेजों से नहीं बनी है। पिंपरी-चिंचवड इलाके में गाड़ी बनाने वाली और उससे जुड़ी सप्लाई चेन की बड़ी इंडस्ट्री पुणे की टेक्निकल इकोनॉमी का अहम हिस्सा है। व्हीकल रिसर्च, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन के लिए काम करने वाले संस्थान और ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी इंडस्ट्रीज की वजह से मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग और अब इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी में इंजीनियरों के लिए बड़े मौके बन रहे हैं।
दूसरी तरफ हिंजवड़ी, खराड़ी, मगरपट्टा जैसे इलाकों में फैले आईटी सेक्टर ने इंजीनियरों के काम का पूरा स्वरूप ही बदल दिया है। आईटी के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिसिस, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और साइबर सिक्योरिटी जैसे फील्ड में भी पुणे का टेक वर्कफोर्स काम कर रहा है। ग्लोबल कंपनियों के इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट सेंटर पुणे में बढ़ रहे हैं, जिससे शहर का टेक्निकल इकोसिस्टम और मजबूत हो रहा है।
2026 की एक इंडस्ट्री रिपोर्ट के मुताबिक पुणे में 500 से ज्यादा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर हैं, और 2024 के बाद 130 से ज्यादा सेंटर या तो नए खुले हैं या उनका विस्तार हुआ है। इनमें से करीब 40 फीसदी सेंटर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ा काम हो रहा है। इस तरह पुणे का सफर अब 'शिक्षा नगरी - इंडस्ट्रियल सिटी - आईटी हब - न्यू टेक्नोलॉजी सेंटर' की तरफ बढ़ रहा है, और इस बदलाव के बीच में वह इंजीनियर है जो नॉलेज, स्किल और टेक्नोलॉजी को साथ लेकर चल रहा है।
पुणे के सीनियर आर्किटेक्ट संजय भुरेवाल कहते हैं, "पुणे की पहचान आज सिर्फ शिक्षा नगरी या आईटी सेंटर तक सीमित नहीं रही। यहां गाड़ी उद्योग, आईटी, रिसर्च और नई टेक्नोलॉजी का मजबूत इकोसिस्टम बन चुका है। ऐसे में पुणे के इंजीनियरों के सामने सिर्फ नौकरी के मौके नहीं, बल्कि शहर और समाज की जरूरतों को समझकर स्मार्ट, सेफ और काम की टेक्नोलॉजी बेस्ड सॉल्यूशन बनाने की चुनौती है। पुणे टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने वाले शहर से टेक्नोलॉजी बनाने वाले शहर की तरफ बढ़ रहा है।"
वहीं पुणे में काम करने वाली सॉफ्टवेयर डेवलपर सीमा शिरवळ का कहना है, "पुणे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आईटी सेक्टर तेजी से फैल रहा है, लेकिन टेक्नोलॉजी के बीच में इंसान का होना जरूरी है। एआई सॉफ्टवेयर बनाने का तरीका बदल सकती है, मगर पुणे जैसे टेक हब में काम करने वाले इंजीनियरों को शहर और समाज की असली प्रॉब्लम समझकर सही सवाल पूछने और अपनी बनाई टेक्नोलॉजी के नतीजों की जिम्मेदारी लेने की जरूरत है। इसलिए आने वाले इंजीनियरों में टेक्निकल स्किल के साथ-साथ सोशल अवेयरनेस भी होनी चाहिए।"