प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड: राष्ट्रपति के घुड़सवार अंगरक्षकों की भर्ती किन तीन समुदायों से होती है
राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात खास घुड़सवार दस्ते प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड (PBG) की भर्ती प्रक्रिया, इतिहास और जिम्मेदारियों की पूरी जानकारी।
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जब भी राष्ट्रपति किसी बड़े राष्ट्रीय समारोह में शामिल होते हैं, तो उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर सबकी नजर टिकी रहती है। गणतंत्र दिवस के बाद होने वाले बीटिंग रिट्रीट समारोह में भी राष्ट्रपति के साथ खास वर्दी पहने घुड़सवार जवान नजर आते हैं। ये जवान राष्ट्रपति के अंगरक्षक दस्ते यानी प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड (PBG) का हिस्सा होते हैं। इनकी शानदार वर्दी, घोड़े और अनुशासन इस दस्ते को एक अलग पहचान देते हैं।
राष्ट्रपति का पद देश के सबसे अहम संवैधानिक पदों में से एक है, इसलिए उनकी सुरक्षा में तैनात जवानों का चुनाव भी आम तरीके से नहीं होता। PBG भारतीय सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंट है। इसकी शुरुआत 1773 में तत्कालीन गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स ने बनारस में की थी। उस वक्त इसमें 50 घुड़सवार सैनिक शामिल थे, जिनकी संख्या बाद में बढ़ाई गई। 1950 में भारत के गणतंत्र बनने के बाद इस यूनिट का नाम प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड रखा गया।
दरअसल, राष्ट्रपति के अंगरक्षक दस्ते में सिर्फ जाट, सिख और राजपूत समुदाय के सैनिकों की ही भर्ती की जाती है। ऐतिहासिक रूप से इस रेजिमेंट में इन्हीं समुदायों से सैनिकों की भर्ती करने की परंपरा रही है। हालांकि PBG में जवानों का चुनाव खास शारीरिक क्षमता, सैन्य योग्यता और मुश्किल चयन प्रक्रिया के आधार पर होता है। मतलब सिर्फ किसी खास समुदाय से आना ही काफी नहीं है, इसके लिए सैनिक को कई कठिन कसौटियों पर खरा उतरना पड़ता है। यही वजह है कि PBG को भारतीय सेना की चुनिंदा और स्पेशल यूनिट माना जाता है।
PBG में शामिल होने वाले सैनिकों के लिए शारीरिक क्षमता बेहद अहम होती है। ज्यादा लंबाई और मजबूत कद-काठी वाले सैनिकों को इस भूमिका के लिए उपयुक्त माना जाता है। लेकिन सिर्फ लंबाई के आधार पर किसी को भी राष्ट्रपति का अंगरक्षक नहीं बनाया जाता। चयन प्रक्रिया में उसकी फिटनेस, घुड़सवारी का हुनर और सैन्य क्षमता भी देखी जाती है। राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, आज PBG में खास शारीरिक विशेषताओं वाले जवानों का ही चुनाव होता है, और इसके लिए एक कठिन शारीरिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
PBG को सिर्फ एक समारोह में शामिल होने वाली यूनिट समझना ठीक नहीं होगा। इस यूनिट के जवान घुड़सवारी में माहिर होने के साथ-साथ पैराट्रूपर और आर्मर्ड वॉरियर के तौर पर भी ट्रेंड होते हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, PBG की भूमिका शांति के दौर में राष्ट्रपति से जुड़े समारोहों में और जरूरत पड़ने पर सैन्य अभियानों में भी रही है। यही कारण है कि राष्ट्रपति के अंगरक्षक की जिम्मेदारी सिर्फ राष्ट्रपति के साथ चलने या परेड में शामिल होने तक सीमित नहीं है। इन सैनिकों को हर हालात के लिए तैयार रखा जाता है।
PBG का इतिहास करीब ढाई सदी पुराना है। 1773 में बनी यह यूनिट पहले गवर्नर-जनरल्स बॉडीगार्ड के नाम से जानी जाती थी। बाद में इसे वायसराय बॉडीगार्ड कहा गया और भारत के गणतंत्र बनने के बाद 27 जनवरी 1950 को इसका नाम प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड रखा गया। आज PBG भारतीय सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंट है और इसे राष्ट्रपति की अपनी सैन्य यूनिट माना जाता है। इसके जवानों की वर्दी, घुड़सवार दस्ता और परेड की शानदार परंपरा इसे सेना की बाकी यूनिटों से अलग पहचान दिलाती है।