गुरूवार, 17 सितमबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
02:49 IST

POP गणेश मूर्ति विसर्जन पर हाईकोर्ट का आदेश, 6 फुट तक सिर्फ कृत्रिम तालाब में, बड़ी मूर्तियों को शर्तों के

बॉम्बे हाईकोर्ट ने POP गणपति मूर्तियों के विसर्जन को लेकर पिछले साल के अंतरिम निर्देश आगे भी लागू रखने का आदेश दिया है।

POP गणेश मूर्ति विसर्जन पर हाईकोर्ट का आदेश, 6 फुट तक सिर्फ कृत्रिम तालाब में, बड़ी मूर्तियों को शर्तों के
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

गणेशोत्सव से पहले POP मूर्तियों के विसर्जन को लेकर जो कन्फ्यूजन बना हुआ था, वह अब काफी हद तक साफ हो गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में अंतिम फैसला अभी रिजर्व रखा है, लेकिन साथ ही पिछले साल दिए गए अंतरिम निर्देश आगे भी लागू रखने को कहा है। इसका मतलब यह है कि 6 फुट तक ऊंचाई वाली POP गणेश मूर्तियों का विसर्जन नैचुरल पानी के सोर्स में नहीं किया जा सकेगा, इसके लिए कृत्रिम तालाब या कृत्रिम कुंड ही इस्तेमाल करना होगा। वहीं 6 फुट से ज्यादा ऊंचाई वाली POP मूर्तियों को नदी या दूसरे नैचुरल जलस्रोतों में विसर्जन की शर्तों के साथ छूट दी गई है।

POP मूर्तियों के विसर्जन से पानी में प्रदूषण की समस्या गंभीर होती जा रही है, इसी वजह से इस पर रोक लगाने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अंतिम फैसला रिजर्व रखा, लेकिन साफ कर दिया कि जब तक फाइनल आदेश नहीं आता, तब तक पिछले साल वाले अंतरिम निर्देश ही लागू रहेंगे। यानी इस बार के गणेशोत्सव के लिए भी महानगरपालिका प्रशासन को उन्हीं निर्देशों के आधार पर विसर्जन की तैयारी करनी होगी।

इन निर्देशों के मुताबिक 6 फुट तक की POP गणेश मूर्तियों का विसर्जन कृत्रिम तालाब, कृत्रिम कुंड या घूमने वाले विसर्जन हौद में करना जरूरी होगा। इसका मतलब घरेलू और सार्वजनिक मंडलों की छोटी POP मूर्तियों का विसर्जन नैचुरल तालाब, नदी, खाड़ी या समुद्र में नहीं किया जा सकेगा।

6 फुट से ज्यादा ऊंचाई वाली POP गणेश मूर्तियों को लेकर हाईकोर्ट ने शर्तों के साथ छूट दी है। इससे बड़े सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों के पास नैचुरल जलस्रोतों में विसर्जन का ऑप्शन बना रहेगा, लेकिन इसके लिए कोर्ट और प्रशासन की तरफ से तय की गई शर्तों का पालन करना जरूरी होगा। चूंकि कोर्ट का फाइनल फैसला अभी नहीं आया है, इसलिए इस बार के उत्सव के लिए अंतरिम निर्देश ही लागू रहेंगे। गणेश मंडलों को विसर्जन की प्लानिंग करते वक्त कोर्ट के निर्देशों के साथ-साथ महानगरपालिका की लोकल गाइडलाइंस का भी सख्ती से पालन करना होगा।

पर्यावरण से जुड़े कार्यकर्ता चरण भट का कहना है कि POP मूर्तियों के विसर्जन से नैचुरल जलस्रोतों को नुकसान होता है। उनके मुताबिक, POP के मुकाबले शाडू मिट्टी की मूर्तियों का विसर्जन पर्यावरण के लिहाज से ज्यादा बेहतर होता है, इसलिए गणेशभक्तों को मिट्टी की मूर्तियों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जितना हो सके, लोगों को पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी की मूर्तियां अपनानी चाहिए।

विसर्जन के दौरान निर्माल्य सीधे पानी में न डाला जाए, इसके लिए भी महानगरपालिका को खास इंतजाम करने होंगे। इसमें निर्माल्य कलश की व्यवस्था, विसर्जन स्थल पर सफाई, भीड़ को कंट्रोल करना और सुरक्षा के उपाय शामिल हैं। महानगरपालिका प्रशासन का कहना है कि कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक ही विसर्जन की पूरी कार्यवाही की जाएगी और कृत्रिम कुंड, सफाई, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को लेकर जरूरी प्लानिंग की जा रही है।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे