गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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02:49 IST

पर्युषण में आहार संबंधी संदेश पर सेव्हन इलेव्हन स्कूल को कारण बताओ नोटिस

मीरा रोड स्थित सेव्हन इलेव्हन स्कूल की तरफ से पर्युषण के दौरान जारी किए गए आहार संदेश पर शिकायत के बाद ठाणे जिला परिषद ने दो दिन में लिखित जवाब मांगा है।

पर्युषण में आहार संबंधी संदेश पर सेव्हन इलेव्हन स्कूल को कारण बताओ नोटिस
एआयने तयार केलेले प्रातिनिधिक चित्र; हे प्रत्यक्ष घटनेचे छायाचित्र नाही | PT24

मीरा रोड के सेव्हन इलेव्हन स्कूल का पर्युषण के दिनों में दिया गया एक आहार संबंधी संदेश अब प्रशासनिक विवाद बन गया है। स्कूल के आधिकारिक पोर्टल से बच्चों को यह बताया गया था कि पर्युषण के दौरान प्याज, लहसुन, मूली, चुकंदर जैसी जमीन के नीचे उगने वाली चीजें न खाई जाएं। इसी संदेश को लेकर शिक्षा विभाग के पास शिकायत पहुंची थी।

शिकायत में कहा गया था कि इस तरह के संदेश से बच्चों की खानपान की पसंद पर एक खास धार्मिक तरीके को थोपने की कोशिश हो रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि स्कूल में अलग-अलग धर्म, जाति और सामाजिक पृष्ठभूमि के बच्चे पढ़ते हैं, इसलिए ऐसा संदेश भेजा जाना शैक्षणिक और कानूनी दोनों नजरिए से जांच की मांग करता है।

इस मामले में मराठी एकीकरण लोकचळवळ के सिद्धेश पाटील और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के रॉबर्ट डिसोझा ने अलग-अलग शिकायतें शिक्षा विभाग को भेजीं। इसके बाद मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के शिक्षा विभाग ने भी संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए ठाणे जिला परिषद के शिक्षणाधिकारी देविदास महाजन ने सेव्हन इलेव्हन स्कूल को कारण बताओ नोटिस थमा दी है। साथ ही मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के शिक्षा विभाग से भी इस मामले की जांच करने की मांग की गई है।

नोटिस में स्कूल के बच्चों की विविध सामाजिक और धार्मिक पृष्ठभूमि का हवाला दिया गया है। शिक्षा विभाग का कहना है कि जब एक ही स्कूल में अलग-अलग धर्म और जाति के बच्चे पढ़ते हों, तब किसी एक खास धार्मिक आहार पद्धति का पालन करने को लेकर संदेश भेजना गंभीर बात है। स्कूल से पूछा गया है कि बच्चों की निजी खानपान की पसंद पर कौन सी पाबंदी लगाई गई थी, इसका मकसद क्या था और यह संदेश किन हालात में भेजा गया।

नोटिस में RTE Act 2009 की धारा 13 और 17 के साथ ही स्कूल संहिता का हवाला दिया गया है। इसके अलावा संविधान की धारा 14, धारा 19 और धारा 21 का भी जिक्र किया गया है, जो समानता, आजादी और जीवन तथा निजी स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ी हैं। नोटिस में यह भी कहा गया है कि स्कूल को बच्चों के निजी मामलों में दखल देते समय किसी तरह का भेदभाव या फालतू पाबंदी नहीं लगानी चाहिए।

शिक्षा विभाग ने स्कूल को नोटिस मिलने की तारीख से दो दिन के अंदर लिखित जवाब देने का आदेश दिया है। अगर स्कूल समय पर जवाब नहीं देता या जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो आगे प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। यह कार्रवाई माध्यमिक स्कूल संहिता, RTE Act 2009 और स्वयंअर्थसहायित स्कूल अधिनियम 2012 के प्रावधानों के तहत हो सकती है।

अब सबकी नजर स्कूल के जवाब पर टिकी है कि यह संदेश किस मकसद से भेजा गया था, क्या यह बच्चों पर बाध्यकारी था और पर्युषण के धार्मिक रीति-रिवाज तथा बच्चों की निजी खानपान की पसंद के बीच स्कूल ने क्या रुख अपनाया। स्कूल का लिखित जवाब मिलने के बाद शिक्षा विभाग उसकी जांच करके आगे का फैसला लेगा।

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