पांच महीने पगार नहीं मिली, सासवड में पानी बंद कर कर्मचारी का वीडियो; फिर 77 हजार मिले
सासवड नगरपरिषद के पानी विभाग के कर्मचारी ने पगार न मिलने पर पानी बंद कर वीडियो डाला, कुछ देर में ठेकेदार ने 77 हजार रुपये दिए।
सासवड नगरपरिषद के पानी सप्लाई विभाग में काम करने वाले एक कर्मचारी को करीब पांच महीने से तनख्वाह नहीं मिली थी। परेशान होकर उसने पानी बंद कर दिया और आत्महत्या की चेतावनी देते हुए अपना वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया। वीडियो वायरल होते ही पूरे शहर और तालुका में हड़कंप मच गया। इसके कुछ ही देर बाद ठेकेदार ने उसे करीब 77 हजार रुपये की पगार दे दी।
यह कर्मचारी प्रकाश यादव हैं, जो सासवड नगरपालिका के पानी सप्लाई विभाग में कांट्रैक्ट पर काम करते हैं। बताया गया है कि उन्होंने प्रशासन से कई बार पगार के लिए पूछताछ की, फिर भी करीब पांच महीने की तनख्वाह नहीं मिली। तंग आकर वे विभाग के उस कमरे में पहुंचे जहां इलेक्ट्रिक पंप रखे हैं। वहां उन्होंने कहा कि मुझे पांच महीने की पगार नहीं मिली है, इसलिए मैं आज से पानी बंद कर रहा हूं, और सारे पंप बंद कर दिए।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर किसी ने मुझे परेशान करने की कोशिश की तो मैं इसी जगह छत से फांसी लगाकर आत्महत्या कर लूंगा। खास बात यह रही कि इस दौरान उन्होंने अपना वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
वीडियो फैलते ही हर तरफ हलचल मच गई और सासवड नगरपालिका प्रशासन हरकत में आया। अंदाजा है कि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ठेकेदार को भी अच्छी तरह सुनाया होगा। इसके बाद ठेकेदार ने तुरंत कर्मचारी से मुलाकात की और उन्हें समझाया। फिर पांच महीने की करीब 77 हजार रुपये की पगार उनके हाथ में दे दी।
पैसे मिलने के बाद प्रकाश यादव ने एक नया वीडियो बनाया। उसमें उन्होंने कहा कि ठेकेदार ने मुझे पांच महीने के पैसे दे दिए हैं और अब मेरी कोई शिकायत नहीं है। यह वीडियो भी उन्होंने सोशल मीडिया पर डाल दिया।
इस पूरे वाकये के बाद सवाल उठ रहा है कि अपने ही किए काम की तनख्वाह पाने के लिए एक कर्मचारी को पूरे सासवड शहर की पानी सप्लाई कुछ देर के लिए बंद करनी पड़ी और आत्महत्या की चेतावनी देनी पड़ी। प्रशासन तभी जागा, जब यह सब हो चुका था। नगरपरिषद के कामकाज की अव्यवस्था की चर्चा पहले से चल रही थी और अब पूरे तालुका ने उसे देखा।
कुछ दिन पहले ही सासवड को पानी देने वाली पाइप लाइन के एक वाल्व के पास एक मरा हुआ कुत्ता बुरी तरह सड़ी हालत में मिला था। उसके आसपास हजारों कीड़े जमा दिखे थे। विधायक विजय शिवतारे ने खुद इसका संज्ञान लिया, तब जाकर प्रशासन कुछ देर में हरकत में आया और सफाई करके विवाद पर पर्दा डालने की कोशिश की। इन दोनों घटनाओं से यह बात सामने आती है कि प्रशासन को जगाने के लिए कुछ अलग रास्ता अपनाना पड़ता है। सासवड के नागरिक अब पूछ रहे हैं कि यह सब कब तक चलेगा।