पालघर मारपीट मामले में हाईकोर्ट नाराज, पुलिस पर आरोपियों को भगाने में मदद का आरोप
पालघर के अस्पताल में स्टाफ के साथ मारपीट के मामले में पुलिस की ढिलाई पर हाईकोर्ट सख्त, नौ आरोपी अब भी फरार
पालघर के एक प्राइवेट अस्पताल में गोविंदा को इलाज के दौरान शिंदे गुट के शिवसैनिकों ने अस्पताल स्टाफ के साथ मारपीट की थी। इस मामले में पुलिस की जांच में देरी और लापरवाही की वजह से आरोपी फरार हो गए। बुधवार को हाईकोर्ट ने साफ कहा कि पालघर पुलिस ने ही आरोपियों को भागने का मौका दिया।
जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच ने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है। एक अस्पताल के मेडिकल स्टाफ पर हमला होने के बावजूद पुलिस ने कोई ठीक से जांच नहीं की, यह मंजूर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि डोंबिवली म्युनिसिपल हॉस्पिटल में शिंदे गुट की शिवसेना के नगरसेवक रमेश म्हात्रे ने डॉक्टरों पर जो हमला किया था, उस मामले से भी पालघर पुलिस ने कोई सबक नहीं सीखा।
कोर्ट ने कहा कि ठाणे जिले के इस मामले में उसने खुद से संज्ञान लिया था। अब क्या पालघर जिले के लिए भी नई याचिका खुद दाखिल करनी पड़ेगी? क्या ठाणे में हुई घटना काफी नहीं थी? पुलिस ने ठाणे के मामले से कोई सीख नहीं ली क्या? कोर्ट ने साफ चेतावनी दी कि अगर पालघर पुलिस को इस केस की जांच में दिलचस्पी नहीं है तो साफ बता दें, मामला मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया जाएगा।
पुलिस की केस डायरी ठीक से न रखे जाने पर भी कोर्ट ने फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि इस बारे में समय-समय पर आदेश दिए गए हैं, पुलिस महासंचालक ने भी केस डायरी नियमित रखने का आदेश दिया था, फिर भी पुलिस अपने ही सीनियर अफसरों के आदेश को रद्दी की टोकरी दिखा रही है। कोर्ट ने संबंधित अफसरों पर क्या कार्रवाई होगी, इस पर पुलिस महासंचालक से चर्चा करने का भी आदेश दिया। इस पर वकीलों ने कोर्ट को बताया कि पुलिस महासंचालक ने पालघर पुलिस से सारे कागजात मंगवा लिए हैं और उनका अध्ययन कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
डोंबिवली मामले में सरकारी वकील ने कोर्ट के पहले के आदेशों का पालन होने का शपथपत्र भी पेश किया। बताया गया कि रमेश म्हात्रे समेत बाकी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। लेकिन पहले के आदेशों का ठीक से पालन न होने पर कोर्ट ने पुलिस को फटकारते हुए गुस्से में पूछा कि क्या पुलिस वाकई इस मामले को लेकर गंभीर है।
प्राथमिक रिपोर्ट में नाम आए दस लोगों में से शिवसेना के शहर प्रमुख राहुल धरत गिरफ्तार होकर पुलिस कस्टडी में हैं। बाकी नौ आरोपी अब भी फरार हैं और सात अनजान लोगों के खिलाफ भी शिकायत दर्ज की गई है, यह जानकारी पालघर के पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख ने कोर्ट को दी। कोर्ट ने पूछा कि केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए फौरन कार्रवाई क्यों नहीं की। फरार नौ आरोपियों की पहचान हो जाने के बावजूद उनकी तलाश क्यों नहीं की गई। कोर्ट ने कहा कि केस दर्ज होने के बाद तेजी से जांच होती नहीं दिख रही, और पुलिस की इसी लापरवाही की वजह से आरोपी फरार हुए हैं, यानी पुलिस ने ही उन्हें भागने का मौका दिया।