NSE में पुरानी हिस्सेदारी बेचकर Soach Global को मिलेगा करीब 25 गुना रिटर्न
मॉरिशस की Soach Global ने NSE में अपने शेयर IPO के जरिए बेचने का फैसला किया, दस साल पहले किए गए निवेश पर भारी मुनाफा तय
मॉरिशस में बेस्ड Soach Global Strategic Holdings Limited, जो Soach Global Opportunities Fund की पूरी मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी कंपनी है (दोनों को मिलाकर "Soach Global" कहा जाता है), ने नॅशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड यानी NSE में दस साल पहले की गई अपनी इनवेस्टमेंट का कुछ हिस्सा बेचने का फैसला किया है। यह फंड NSE के IPO में ऑफर फॉर सेल के जरिए अपनी हिस्सेदारी का एक भाग बेच रहा है। यह IPO आज ओपन हो गया है।
फंड ने जनवरी 2016 में इंडस्ट्रियल फायनान्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (IFCI) से NSE के 1,50,000 इक्विटी शेयर 3,950 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से खरीदे थे। उस वक्त इस इनवेस्टमेंट की कुल वैल्यू 59.25 करोड़ रुपये थी। इसके बाद पिछले दस साल में अलग-अलग कॉर्पोरेट कार्रवाइयों की वजह से बिना कोई अतिरिक्त पैसा लगाए फंड की हिस्सेदारी बढ़कर 82,50,000 शेयर हो गई। इन कॉर्पोरेट कार्रवाइयों को हिसाब में रखते हुए फंड की औसत खरीद कीमत अब 71.8 रुपये प्रति शेयर बैठती है।
अब फंड अपने कुल 82,50,000 शेयरों में से 16,50,000 इक्विटी शेयर बेच रहा है, जो उसकी पूरी हिस्सेदारी का 20 प्रतिशत है। IPO की 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर की प्राइस रेंज के हिसाब से यह बिक्री करीब 280 करोड़ से 295 करोड़ रुपये की होगी। इससे फंड को अपनी मूल कुल इनवेस्टमेंट से लगभग पांच गुना ज्यादा रकम मिलेगी, यानी करीब 25 गुना रिटर्न। NSE में फंड की बाकी 66,00,000 शेयरों की हिस्सेदारी, यानी उसकी कुल हिस्सेदारी का 80 प्रतिशत हिस्सा, फंड अपने पास बनाए रखेगा। इस प्राइस रेंज के हिसाब से इस बची हुई हिस्सेदारी की वैल्यू करीब 1,120 करोड़ से 1,180 करोड़ रुपये होती है।
Soach Global Opportunities Fund के फाउंडर और डायरेक्टर अनुभव दयाल ने कहा, "भारत तेजी से बढ़ती हुई इकॉनॉमी है। बड़ी संख्या में युवा ग्रोथ के मौके तलाश रहे हैं और कैपिटल मार्केट में उतरने के जोखिम और मौकों को तेजी से समझ रहे हैं। हम ऑफर फॉर सेल में शामिल होकर अपनी मालिकाना हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेच रहे हैं, क्योंकि हम चाहते हैं कि बड़ी संख्या में आम रिटेल इनवेस्टर्स के पास NSE में कुछ हिस्सेदारी हो। जब ये रिटेल इनवेस्टर्स NSE में सीधे या म्युचुअल फंड के जरिए छोटी हिस्सेदारी खरीदेंगे, तो उन्हें भी NSE की ग्रोथ का फायदा मिलेगा, जैसा फायदा दस साल पहले हमें NSE में इनवेस्ट करके मिला है। भारत की 1.4 अरब की आबादी में से सिर्फ करीब 13 करोड़ लोग ही NSE पर रजिस्टर्ड इनवेस्टर्स हैं, और यही सबसे बड़ा मौका है।"
उन्होंने आगे कहा, "हमारे देश में त्योहार या घर के फंक्शन के वक्त सोना खरीदने की परंपरा रही है। एक बार परिवार ने जो सोना खरीद लिया, वह लंबे समय तक, कई पीढ़ियों तक संभालकर रखा जाता है। बहुत जरूरी हो तभी उसे बेचा जाता है। रिटेल इनवेस्टर्स NSE के शेयरों की तुलना सोना खरीदने से कर सकते हैं। मल्टी-एसेट-क्लास ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म होने की वजह से NSE का रेवेन्यू बढ़ सकता है, जबकि उसका ऑपरेटिंग खर्च काफी हद तक स्थिर रहेगा, क्योंकि उसमें ज्यादातर खर्च पहले ही हो चुका है। यह नैनोसेकंड में ट्रांजैक्शन सेटल करने वाला हाई-टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म है।"
उन्होंने यह भी कहा, "इसके अलावा यह इक्विटी, कमोडिटीज, बिजली के वायदे, बॉन्ड इंडेक्स फ्यूचर्स और कोयले जैसी अलग-अलग एसेट क्लासेस में ट्रेडिंग की सुविधा भी देता है। भारत की इकॉनॉमी जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, ट्रेड होने वाले प्रोडक्ट्स की लिस्ट भी बढ़ती जाएगी। इससे काफी हद तक स्थिर खर्च के आधार पर रेवेन्यू में बढ़ोतरी होगी। इसका असर लिस्टिंग के बाद NSE के प्रति शेयर भाव पर भी दिखेगा। यह हमारी हिस्सेदारी की एकतरफा आंशिक बिक्री है और दोबारा इनवेस्ट करने की हमारी कोई योजना नहीं है।"