गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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02:49 IST

नेपाळ में बाढ़ के बाद लापता लोगों का मोबाइल के आखिरी लोकेशन से हो रहा सुराग

नेपाळ-चीन सीमा पर आए भीषण जलप्रलय में हजारों लोग लापता, परिवार फोन के आखिरी लोकेशन के सहारे तलाश में जुटे

नेपाळ में बाढ़ के बाद लापता लोगों का मोबाइल के आखिरी लोकेशन से हो रहा सुराग
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नेपाळ और चीन की सीमा पर हाल ही में प्रकृति का ऐसा रौद्र रूप देखने को मिला जिसने पूरे इलाके को तबाह कर दिया। सीमा पर एक बड़ा ग्लेशियर अचानक टूट गया, जिसके बाद पहाड़ों से भारी मात्रा में पत्थर, कीचड़ और मलबा नीचे की ओर बह निकला। इस विनाशकारी बाढ़ में नेपाळ में अब तक १,३८६ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि ५,१३० लोग अभी भी लापता हैं। सीमा के दूसरी तरफ चीन में ४३ लोगों की मौत हुई है और ५१९ लोग लापता बताए जा रहे हैं। हादसे को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अपनों से बिछड़े परिवार अभी भी बेहाल हैं। ऐसे हालात में लापता लोगों के मोबाइल फोन का आखिरी लोकेशन ही उनके परिजनों के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी किरण बन गया है।

लापता लोगों में हैदराबाद में काम करने वाली ३३ साल की आरुषी गुप्ता भी शामिल हैं, जो कैलास मानसरोवर यात्रा पर गई थीं। वे २३ अगस्त को दिल्ली से काठमांडू पहुंची थीं और २६ अगस्त को नेपाळ-चीन सीमा पार कर तिब्बत की ओर जाने वाली थीं। बाढ़ वाले दिन सुबह उन्होंने अपने पिता अजय गुप्ता को व्हॉट्सऐप पर मैसेज भेजकर बताया था कि वे सीमा से सिर्फ १५ मिनट की दूरी पर हैं। इसके बाद उन्होंने चायनीज इमिग्रेशन पोस्ट ग्यिरोंग पोर्ट की एक फोटो अपने पिता को भेजी, जो उनका आखिरी मैसेज और फोटो साबित हुआ। इसके बाद से उनके फोन पर की गई कई कॉल्स और व्हॉट्सऐप मैसेज का कोई जवाब नहीं आया। अब परिवार उनके मोबाइल के आखिरी नेटवर्क लोकेशन और डिजिटल ट्रेस के सहारे उनकी तलाश कर रहा है।

आरुषी की तरह ही यूक्रेन की ४२ साल की एलेना भी इसी आध्यात्मिक यात्रा के दौरान नेपाळ-चीन सीमा के पास लापता हो गई हैं। नॉर्वे में रहने वाली उनकी बेटी व्लादिस्लावा होर्लोवा दिन-रात अपनी मां का डिजिटल सुराग तलाशने में जुटी हैं। एलेना के साथ यात्रा कर रहे यूक्रेन के ४६ और नागरिक भी इस बाढ़ के बाद लापता हैं। व्लादिस्लावा ने अपने आईफ़ोन के फाइंड माय ऐप से मां के डिवाइस तलाशने की कोशिश की, जिसमें उनका मोबाइल फोन आखिरी बार चीन की सीमा में और उनकी एप्पल वॉच व एयरपॉड्स नेपाळ की सीमा में आखिरी बार एक्टिव दिखे। इसी लोकेशन डेटा के आधार पर बेटी यह अंदाजा लगाने की कोशिश कर रही है कि बाढ़ आने के वक्त मां कहां रही होंगी।

भारत में भी लापता पर्यटकों के परिजनों ने साथ मिलकर विदेश मंत्रालय और टेलीकॉम ऑपरेटर्स से मदद की गुहार लगाई है। पुणे के सचिन जोशी समेत कई परिजनों ने भारतीय प्रशासन से अनुरोध किया है कि इंटरनेशनल मोबाइल ऑपरेटर्स से मोबाइल का टावर लोकेशन और नेटवर्क डेटा लेकर तुरंत खोजी मुहिम चलाई जाए। कई तकनीकी दिक्कतों की वजह से अभी तक पर्याप्त डेटा हाथ नहीं लगा है, लेकिन परिवारों ने उम्मीद नहीं छोड़ी है।

नेपाळ में सेना और स्थानीय राहत एजेंसियां लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं। हाल ही में एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की पानी की सुरंग में फंसे कुछ मजदूरों को बचाव दल ने सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना से परिजनों को यह भरोसा बंधा है कि लापता लोगों में से कई बाढ़ के पानी से बचकर किसी ऊंची और सुरक्षित पहाड़ी या गुफा में शरण लिए हुए होंगे। इसी उम्मीद के सहारे आरुषी के पिता अजय गुप्ता और दूसरे भारतीय परिवार खुद नेपाळ और सीमावर्ती इलाकों में जाकर अपने बच्चों की तलाश करने की तैयारी कर रहे हैं।

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