गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:54 IST

नागपुर में RTE की हजारों सीटें हर साल खाली, गरीब बच्चों को नहीं मिल पा रहा दाखिला

पिछले 5 शैक्षणिक सत्रों में एक भी साल ऐसा नहीं रहा जब आरटीई की आरक्षित सीटें पूरी भर पाई हों, प्रशासन की लापरवाही पर उठ रहे सवाल

नागपुर में RTE की हजारों सीटें हर साल खाली, गरीब बच्चों को नहीं मिल पा रहा दाखिला
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर जिले में शिक्षा के अधिकार कानून यानी आरटीई के तहत वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए 25 प्रतिशत सीटें रिजर्व रखी जाती हैं। लेकिन प्रशासन की लापरवाही की वजह से इस कानून का मकसद ही पूरा होता नहीं दिख रहा।

पिछले 5 शैक्षणिक सत्रों के आंकड़े देखें तो एक भी साल ऐसा नहीं मिलेगा जब इन रिजर्व सीटों पर सौ फीसदी दाखिले हुए हों। उल्टा हर साल सैकड़ों सीटें खाली रह जाती हैं। अब सवाल उठ रहा है कि इस नाकामी का जिम्मेदार आखिर कौन है।

शिक्षा विभाग के मुताबिक साल 2022-23 में आरटीई की रिजर्व सीटों में से 762 सीटें खाली रह गई थीं। इसके बाद 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,482 सीटों तक पहुंच गया, और 2024-25 में तो 1,527 सीटें खाली रहीं, जो पांच साल में सबसे ज्यादा है। पिछले साल यानी 2025-26 में 1,007 सीटें खाली रहीं, और इस चालू सत्र 2026-27 में भी अभी 811 सीटें खाली पड़ी हैं।

नागपुर जिले में आरटीई कानून के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित परिवारों के बच्चों को अच्छी क्वालिटी की निजी शिक्षा का मौका देना ही इस कानून का मूल मकसद है। लेकिन दाखिला प्रक्रिया में देरी, तकनीकी दिक्कतें, दस्तावेजों की पूर्ति में झंझट और प्रशासन की तरफ से समय पर कार्रवाई न होने की वजह से कई पेरेंट्स को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है।

पिछले साल भी प्रशासन की बेतरतीब कार्यप्रणाली के चलते दाखिला प्रक्रिया लंबी खिंचने की बात सामने आई थी। एक तरफ आरटीई की सीटें पूरी नहीं भर पा रहीं, तो दूसरी तरफ नागपुर के सरकारी स्कूलों में स्टूडेंट्स की संख्या और पढ़ाई की क्वालिटी को लेकर भी सवाल गंभीर होते जा रहे हैं।

इससे सरकार की शिक्षा नीति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जब आरटीई की सारी सीटें भरना प्रशासन की ही जिम्मेदारी है, तो फिर हर साल इतनी बड़ी तादाद में सीटें खाली क्यों रह जाती हैं। दाखिला प्रक्रिया में बार-बार आने वाली इन दिक्कतों के लिए आखिर जवाबदेह कौन है, यह सवाल अब जोर पकड़ रहा है।

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