गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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02:48 IST

MPSC विद्यार्थियों का प्रशासन के खिलाफ राज्यभर आक्रोश, पेपरफुटी और नंबरों की तफावत पर गुस्सा

महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग के कारभार के खिलाफ राज्यभर के स्पर्धा परीक्षा विद्यार्थियों ने सड़क पर उतरकर तीव्र आंदोलन छेड़ा है।

MPSC विद्यार्थियों का प्रशासन के खिलाफ राज्यभर आक्रोश, पेपरफुटी और नंबरों की तफावत पर गुस्सा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग यानी एमपीएससी के कामकाज के खिलाफ राज्यभर के प्रतियोगी परीक्षा देने वाले विद्यार्थी सड़क पर उतरे हैं। पुणे, नाशिक, नागपुर और कोल्हापुर समेत कई शहरों में जोरदार आंदोलन चल रहे हैं। बार-बार होने वाली गड़बड़ियां, पेपर लीक की घटनाएं और भर्ती प्रक्रिया में देरी से परेशान युवाओं ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अठारह से बीस घंटे पढ़ाई करके भविष्य का सपना देखने वाले इन युवाओं का भरोसा टूटने से यह आक्रोश फूट पड़ा है।

यह असंतोष मुख्य रूप से अन्न व औषध प्रशासन यानी FDA निरीक्षक पद की भर्ती परीक्षा में हुए पेपर लीक मामले से भड़का। 22 मार्च 2026 को यह परीक्षा ऑफलाइन तरीके से हुई थी और 12 जून को इसका रिजल्ट आया। लेकिन बाद में यह बात सामने आई कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले ही, 20 मार्च को प्रश्नपत्र मिल गए थे। इस गंभीर मामले के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा और आयोग की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े हो गए।

इसके अलावा राज्यसेवा मुख्य परीक्षा 2025 के नतीजों के बाद सामने आए आंकड़ों ने भी सबको चौंका दिया। केंद्रीय लोकसेवा आयोग यानी UPSC और एमपीएससी का मुख्य परीक्षा का सिलेबस एक जैसा होने के बावजूद दोनों परीक्षाओं के कटऑफ में बड़ा अंतर पाया गया। यूपीएससी मुख्य परीक्षा का ओपन यानी जनरल कटऑफ 739 अंक था, जबकि एमपीएससी राज्यसेवा मुख्य परीक्षा का कटऑफ सीधे 942 अंक पर पहुंच गया, वहीं अनारक्षित महिलाओं का कटऑफ 959 अंक तक गया। एक ही सिलेबस पर आधारित परीक्षा में 203 से 220 अंकों तक का यह फर्क कैसे आया, इस पर विद्यार्थियों में उलझन और गुस्सा है। मूल्यांकन में इस कथित गड़बड़ी के चलते उत्तरपत्रिकाओं की दोबारा जांच की मांग तेज हो गई है।

पुणे में ओंकारेश्वर मंदिर से जिला अधिकारी कार्यालय तक निकाला गया 'एमपीएससी विद्यार्थी आक्रोश मोर्चा' इस आंदोलन का केंद्र बन गया। इसके बाद कोल्हापुर समेत राज्य के कई हिस्सों में विद्यार्थियों का जबरदस्त गुस्सा देखने को मिला। भविष्य की चिंता और सिस्टम के खिलाफ आक्रोश लेकर हजारों युवा सड़क पर उतरे। इन मोर्चों में सांसद सुप्रिया सुले, विधायक रोहित पवार समेत कई नेता भी शामिल हुए और उन्होंने विद्यार्थियों की मांगों का समर्थन किया।

आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों ने व्यंग्यात्मक पोस्टरों के जरिए सरकार और प्रशासन का ध्यान खींचा। गुस्साए विद्यार्थियों ने राज्य सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो पुणे में दिल्ली के जंतर-मंतर जैसा आंदोलन दोहराया जाएगा। परीक्षा प्रक्रिया की खामियों से निराश विद्यार्थी आर्थिक तंगी से भी जूझ रहे हैं। इसी बीच पुणे के नवी पेठ इलाके में स्पर्धा परीक्षा की तैयारी कर रहे 28 वर्षीय प्रथमेश देशमुख नाम के युवक ने कर्ज से तंग आकर आत्महत्या कर ली, जिसकी घटना सामने आने के बाद इस आंदोलन को लेकर और भी दुख जताया जा रहा है।

विद्यार्थियों की प्रमुख मांगों में एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार और आयोग के सचिव को तुरंत पद से हटाने और उनकी संपत्ति की सीबीआई या सीआईडी से जांच कराने की मांग शामिल है, क्योंकि उन पर परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने में नाकाम रहने का आरोप है। इसके अलावा अन्न व औषध निरीक्षक परीक्षा समेत सभी संदिग्ध परीक्षाओं की गहन जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग है। प्रश्नपत्र बनाने से लेकर विद्यार्थियों तक पहुंचाने तक की पूरी व्यवस्था को सुरक्षित और पारदर्शक बनाने और बहुविकल्पीय प्रश्नपत्रों का विकल्प ज्यादा असरदार तरीके से लागू करने की भी मांग रखी गई है। सरकार से सरकारी भर्ती का साफ और तय समय-सीमा वाला शेड्यूल जारी करने और निजी संस्थाओं के जरिए भर्ती आउटसोर्स करने की प्रथा बंद कर सभी पद सीधे एमपीएससी के जरिए भरने की भी मांग है। पीएसआई समेत कई अहम पदों की भर्ती के विज्ञापनों में देरी की वजह से जिन विद्यार्थियों की अधिकतम उम्र सीमा खत्म हो गई है, उन्हें राहत देने के लिए उम्र सीमा बढ़ाने की मांग भी उठाई गई है।

बढ़ते दबाव के बीच महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग ने कुछ नरमी दिखाते हुए एक प्रेस रिलीज जारी की, जिसके मुताबिक जो उम्मीदवार इंटरव्यू के लिए अयोग्य ठहराए गए थे, उन्हें अपनी मुख्य परीक्षा के अंकों की दोबारा जांच कराने का मौका दिया गया है और इसके लिए 10 सितंबर तक आवेदन मांगे गए हैं। वहीं राज्य सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री प्रवीण दरेकर ने कहा कि सरकार पूरी तरह आंदोलनकारी विद्यार्थियों के साथ है और उनकी हर वाजिब मांग पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार इस पर स्थायी हल निकालने की कोशिश कर रही है। दरेकर ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे पर सिर्फ राजनीति कर रहा है और विद्यार्थियों के नाम पर सियासी रोटियां सेंक रहा है। फिलहाल आयोग और सरकार ने विद्यार्थियों की कुछ मांगों पर कदम उठाए हैं, लेकिन पूरी परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए विद्यार्थियों की लड़ाई अभी भी जारी है।

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