गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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02:10 IST

क्रिकेट स्कोरर कैसे बनते हैं, जानिए योग्यता, काम और सैलरी की पूरी जानकारी

मैदान पर हर बॉल और हर रन का हिसाब रखने वाले क्रिकेट स्कोरर की नौकरी कैसे मिलती है और इसमें कितनी कमाई होती है, जानिए पूरी डिटेल।

क्रिकेट स्कोरर कैसे बनते हैं, जानिए योग्यता, काम और सैलरी की पूरी जानकारी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

क्रिकेट के मैदान पर जब बैटर रन बनाता है, बॉलर विकेट लेता है या किसी ओवर में कोई खास घटना होती है, तो इन सारी चीजों की एंट्री रखी जाती है। टीवी पर मैच देखते वक्त हमारा ध्यान ज्यादातर खिलाड़ियों और उनकी परफॉर्मेंस पर ही रहता है, लेकिन मैदान के बाहर और पर्दे के पीछे ऐसे कई लोग होते हैं जो हर बॉल और हर रन का हिसाब संभालते हैं। इनमें से एक अहम भूमिका क्रिकेट स्कोरर की होती है। क्रिकेट में डेटा का इस्तेमाल जिस तरह बढ़ा है, उससे इन प्रोफेशनल्स की भूमिका भी अब बहुत जरूरी हो गई है। तो आइए जानते हैं कि क्रिकेटर्स के रिकॉर्ड का हिसाब कौन रखता है और इस फील्ड में नौकरी कैसे मिलती है।

स्कोरर का मुख्य काम यह होता है कि मैच के दौरान होने वाली हर जरूरी हरकत को नोट किया जाए। कौन सा बैटर कितने रन बना रहा है, किस बॉलर ने कितनी विकेट ली, ओवर में क्या हुआ और टीम का स्कोर किस स्थिति में है, इन सबका हिसाब स्कोरर ही रखता है। इसके लिए स्कोरर को क्रिकेट के नियमों के साथ-साथ मैथ्स और इंग्लिश की अच्छी समझ भी होनी चाहिए। स्ट्राइक रेट, बैटिंग और बॉलिंग एवरेज, जरूरी रन रेट और नेट रन रेट जैसे कैलकुलेशन समझना भी इस काम का हिस्सा है।

ऑफिशियल स्कोरर बनने का पहला रास्ता लोकल क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़ना माना जाता है, जहां हर साल स्कोरर की परीक्षा होती है। लोकल लेवल की परीक्षा पास करने के बाद स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन की परीक्षा देनी पड़ती है। स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन में 80 प्रतिशत मार्क्स लाने के बाद ही बीसीसीआई की स्कोरर परीक्षा में बैठने की योग्यता मिलती है। यानी इस फील्ड में आगे बढ़ने के लिए क्रिकेट की पढ़ाई के साथ-साथ परीक्षा और स्कोरिंग से जुड़ी जानकारी भी जरूरी है। बीसीसीआई के अलावा आईसीसी भी कई ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाती है। इसके अलावा नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स से भी कोर्स किया जा सकता है और कई प्राइवेट जगहों से भी यह कोर्स कराया जाता है।

स्कोरर को आमतौर पर महीने की सैलरी की जगह मैच या दिन के हिसाब से पेमेंट मिलता है। मिली जानकारी के मुताबिक, बीसीसीआई के स्टेट पैनल स्कोरर को एक मैच के लिए 3000 रुपए मिलते हैं। डोमेस्टिक मैच के लिए रोजाना 15,000 रुपए और टेस्ट मैच में भी रोजाना 15,000 रुपए का पेमेंट होता है। अगर टेस्ट मैच 5 दिन से पहले खत्म हो जाए, तो भी स्कोरर को 5 दिन के हिसाब से ही पगार दिया जाता है। इसके अलावा स्कोरर को डीए भी मिलता है।

आज क्रिकेट सिर्फ मैदान की परफॉर्मेंस का खेल नहीं रह गया है, टीमों के फैसलों में डेटा का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। आईपीएल जैसे टूर्नामेंट में खिलाड़ी की परफॉर्मेंस, बैटिंग और बॉलिंग की क्षमता, विरोधी टीम की कमजोरी और टीम कॉम्बिनेशन से जुड़े आंकड़ों का एनालिसिस किया जाता है। डेटा एनालिस्ट खिलाड़ी की परफॉर्मेंस में वक्त के साथ आने वाले बदलाव समझने के साथ-साथ उनकी ताकत और कमजोरी भी पहचानते हैं। खिलाड़ियों के वर्कलोड मूवमेंट और पुरानी चोट के रिकॉर्ड का एनालिसिस करके चोट लगने के संभावित खतरे को समझने के लिए भी डेटा का इस्तेमाल किया जाता है।

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