गुरूवार, 17 सितमबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
02:16 IST

कोर्ट का आदेश दरकिनार करने की हिम्मत कैसे हुई, नोएडा मजिस्ट्रेट पर सीजेआई सूर्यकांत भड़के

छात्र को 5 लाख की नोटिस भेजने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कार्यकारी दंडाधिकारी को फटकार

कोर्ट का आदेश दरकिनार करने की हिम्मत कैसे हुई, नोएडा मजिस्ट्रेट पर सीजेआई सूर्यकांत भड़के तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

ग्रेटर नोएडा के एक कार्यकारी दंडाधिकारी ने एक स्टूडेंट को 5 लाख रुपये की नोटिस थमा दी, और यह बात भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत को इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने खुली अदालत में नाराजगी जाहिर कर दी। स्टूडेंट ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में हिस्सा लिया था, जिसके बाद उसे यह नोटिस भेजी गई।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्टूडेंट्स के आंदोलनों से जुड़े सारे एफआईआर रद्द करने का ऑर्डर दे चुका है और कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में शामिल किसी भी स्टूडेंट पर आगे कोई सख्त कार्रवाई न करने की हिदायत दे चुका है, तो फिर एक कार्यकारी दंडाधिकारी को ऐसी नोटिस निकालने की हिम्मत कैसे हुई।

सीनियर वकील बिस्वजीत भट्टाचार्य ने यह मामला सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने मौखिक रूप से रखा। मजिस्ट्रेट की इस कार्रवाई पर एतराज जताते हुए सीजेआई ने कहा कि किसी भी स्टूडेंट के खिलाफ कोई जबरदस्ती की कार्रवाई नहीं की जाएगी और कोई भी मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस ऑर्डर को पलट नहीं सकता।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने पूछा कि नोटिस वापस ले भी ली जाए, तब भी क्या कार्रवाई की वजह बनी रहती है। इस पर भट्टाचार्य ने जवाब दिया कि एक बार कोर्ट की अवमानना हो जाए तो सिर्फ नोटिस वापस लेने से बात खत्म नहीं होती, क्योंकि यह देश की सबसे बड़ी अदालत की गरिमा का सवाल है।

भट्टाचार्य ने कोर्ट को बताया कि कार्यकारी दंडाधिकारी ने गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के सेकंड ईयर के एक स्टूडेंट को नोटिस भेजकर पूछा था कि उसने 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड क्यों नहीं भरा। स्टूडेंट पर सीजेपी के आंदोलन और प्रचार में शामिल होने का आरोप था। मीडिया से बात करते हुए भट्टाचार्य ने बताया कि यह नोटिस बाद में वापस ले ली गई थी। नोएडा पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर ग्रेटर नोएडा के पूर्व दंडाधिकारी ने यह नोटिस जारी की थी, लेकिन उस पर अमल होने से पहले ही उसे वापस ले लिया गया। भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि नोएडा और यूपी के अफसर स्टूडेंट्स के बीच डर का माहौल बना रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी दंडाधिकारी (तीसरे) की कोर्ट ने अक्षत त्रिपाठी नाम के स्टूडेंट के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस की धारा 126/135 के तहत नोटिस जारी की थी। पुलिस रिपोर्ट में कहा गया था कि त्रिपाठी दूसरे स्टूडेंट्स को प्रस्तावित आंदोलन में शामिल होने के लिए उकसा रहा था। 4 सितंबर 2026 की इस नोटिस में पुलिस का आरोप था कि त्रिपाठी यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स के बीच सरकार विरोधी प्रचार फैला रहा था और उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी के प्रस्तावित धरना आंदोलन में शामिल होने के लिए उकसा रहा था। पुलिस ने यह भी दावा किया था कि त्रिपाठी की इन कथित हरकतों से भारी तनाव पैदा हो गया था, जिससे मारपीट, विवाद और शांति व्यवस्था भंग होने का खतरा था। पुलिस की इस रिपोर्ट के आधार पर ही कार्यकारी दंडाधिकारी ने अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ 5 लाख रुपये की नोटिस जारी कर दी थी, हालांकि उस पर अमल होने से पहले ही यह नोटिस वापस ले ली गई।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे