मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:12 IST

कोरपणा नगरपंचायत के सफाई कर्मचारी 1 अक्टूबर से काम बंद, वेतन और पीएफ पर नाराज़गी

कोरपणा नगरपंचायत के सफाई कर्मचारियों ने वेतन, पीएफ और सुरक्षा साहित्य की मांग पर काम बंद आंदोलन शुरू किया है।

कोरपणा नगरपंचायत के सफाई कर्मचारी 1 अक्टूबर से काम बंद, वेतन और पीएफ पर नाराज़गी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

कोरपणा नगरपंचायत के सफाई कर्मचारियों ने वेतन, भविष्य निर्वाह निधि (पीएफ) और सुरक्षा साहित्य के सवाल पर 1 अक्टूबर 2026 से काम बंद कर दिया है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि 2 अक्टूबर से वे अपने परिवारों के साथ राजीव गांधी चौक में धरना आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि जब तक मांगों पर ध्यान देकर न्याय नहीं मिलता, आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।

सफाई कर्मचारियों के मुताबिक वे पिछले कई सालों से ठेके पर काम कर रहे हैं। इस दौरान उनके वेतन से भविष्य निर्वाह निधि की रकम काटी गई, लेकिन वह रकम उनके पीएफ खाते में नियमित जमा हुई या नहीं, इसकी साफ जानकारी उन्हें नहीं दी गई। कर्मचारियों ने यह आरोप भी लगाया है कि उन्हें न्यूनतम वेतन और तय नियमों के हिसाब से वेतन नहीं मिला।

कर्मचारी इससे पहले जिलाधिकारी, सफाई कर्मचारी आयोग और नगरपंचायत के मुख्याधिकारी को निवेदन देकर पूरे मामले की जांच की मांग कर चुके हैं। उनकी मांग है कि उस दौरान की पीएफ रकम कहां और कब जमा हुई, इसका आधिकारिक ब्योरा उन्हें दिया जाए।

कर्मचारियों के आरोप के मुताबिक कुछ लोगों ने राष्ट्रीयकृत बैंक के खाते की जानकारी और आधार कार्ड जैसे कागजात संबंधित लोगों को दिए थे। इसके बाद दावा किया गया है कि वेतन की रकम दूसरे बैंक खातों से संभाली गई। कर्मचारियों का कहना है कि बैंक लेन-देन और जरूरत पड़े तो सीसीटीवी फुटेज की जांच हो, तो सच्चाई सामने आ सकती है।

एक गंभीर आरोप यह भी है कि कुछ कर्मचारियों से खाली विड्रॉल स्लिप पर दस्तखत करवाए गए। कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें असल में मिली रकम और उनके वेतन या पीएफ के लिए कटी रकम में फर्क है। वे चाहते हैं कि इन सभी लेन-देन की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो।

कर्मचारियों के मुताबिक ठेके की व्यवस्था में सुरक्षा साहित्य देने का प्रावधान है, फिर भी जरूरी सेफ्टी किट नियमित नहीं मिले, जिससे उनकी सुरक्षा का सवाल खड़ा हुआ है। इसलिए मांग है कि नगरपंचायत ठेकेदारों के करार की शर्तें, वेतन रिकॉर्ड, हाजिरी पत्रक, बैंक लेन-देन, पीएफ रिकॉर्ड और सुरक्षा साहित्य बांटने की एंट्री की जांच करे।

कर्मचारियों ने पिछले आठ से दस सालों के वेतन और पीएफ लेन-देन का विशेष ऑडिट कराने और दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही बकाया भुगतान और पीएफ का पूरा ब्योरा हर कर्मचारी को लिखित में देने की मांग भी की गई है।

चरणदास पंधरे, विशाल धोटे, पांडुरंग मेश्राम, आनंदराव आपटे, बादल भगत, राजा आत्राम, सुधाकर आत्राम, दिगंबर साळुंखे, संजय मालेकार, प्रकाश सिडाम और बाकी सफाई कर्मचारियों ने प्रशासन से तुरंत ध्यान देने की मांग की है।

काम बंद होने से नगरपंचायत की रोजाना की सफाई व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है। नागरिकों को उम्मीद है कि प्रशासन आंदोलन पर ध्यान देकर कर्मचारियों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच करेगा और कागजात व लेन-देन देखकर सही फैसला लेगा।

कर्मचारियों की मुख्य मांगें: पिछले आठ से दस सालों की पीएफ रकम का पूरा ब्योरा दिया जाए; वेतन और पीएफ लेन-देन की स्वतंत्र जांच या ऑडिट हो; बकाया वेतन और दूसरे भुगतान दिए जाएं; न्यूनतम वेतन के नियम लागू हों; ठेके की शर्तों के मुताबिक सुरक्षा साहित्य मिले; गड़बड़ी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई हो; और 2 अक्टूबर से राजीव गांधी चौक के धरने पर प्रशासन तुरंत ध्यान दे।

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