कचीपुरा में लॉन-होटलों पर 8 करोड़ टैक्स बकाया, NMC ने भेजे नोटिस
नागपुर के कचीपुरा और सेंट्रल बाजार रोड इलाके में बड़े प्रॉपर्टी टैक्स डिफॉल्टरों पर NMC की सख्ती, पानी और सीवर कनेक्शन काटने की चेतावनी।
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नागपुर महानगरपालिका (NMC) ने प्रॉपर्टी टैक्स वसूली को लेकर अपनी मुहिम और तेज कर दी है। इस बार निशाने पर लक्ष्मी नगर जोन के अंतर्गत आने वाले कचीपुरा और सेंट्रल बाजार रोड इलाके के बड़े बकायादार हैं।
NMC के रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने इलाके के मशहूर लॉन, खाने-पीने की दुकानों और दूसरी प्रॉपर्टी पर स्पेशल ड्राइव चलाई है, जिन पर टैक्स का बड़ा बकाया चढ़ा हुआ था। टैक्स इंस्पेक्टरों ने वारंट एक्शन लेते हुए आठ प्रॉपर्टी मालिकों को नोटिस थमाए हैं। इन सबका बकाया मिलाकर 8 करोड़ रुपए से ज्यादा बैठता है।
नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि अगर बकाया टैक्स नहीं भरा गया तो सिविक बॉडी आगे की कार्रवाई कर सकती है, जिसमें पानी का कनेक्शन काटना भी शामिल है। NMC ने यह भी कहा है कि लगातार डिफॉल्ट करने पर वह प्रॉपर्टी का सीवेज और ड्रेनेज कनेक्शन पब्लिक नेटवर्क से काटने का हक भी अपने पास रखती है।
बड़े डिफॉल्टरों के खिलाफ NMC की सख्ती पहले से बढ़ती जा रही है। पहले सिर्फ नोटिस भेजे जाते थे, लेकिन पिछले दो साल में सिविक बॉडी प्रॉपर्टी को सील करने और सिंबॉलिक जब्ती तक की कार्रवाई कर चुकी है।
जिन प्रॉपर्टी पर कार्रवाई हुई है, उनमें सबसे ज्यादा बकाया सोमलवाड़ा के ओपन प्लॉट नंबर 1924 का है, जो फातिमा सिद्दीकी के नाम है। इस पर 2001 से 4.74 करोड़ रुपए बकाया चला आ रहा है।
लक्ष्मी नगर जोन की तरफ से जिन प्रॉपर्टी को नोटिस भेजे गए हैं, वे इस तरह हैं। साई वाटिका, मालिक सुरेश वर्मा, पर 2017 से 82.56 लाख रुपए बकाया है। जगदीश साओजी उर्फ जगदीश कची पर 2007 से 19.48 लाख रुपए बकाया है। भारत लॉन, मालिक महेश वर्मा, पर 2009 से 44.03 लाख रुपए बकाया है। संमान लॉन, संतोष भोजनालय और संमान नर्सरी, जो देवराव भोंगाडे के नाम हैं, पर 2012 से 42.91 लाख रुपए बकाया है। सुजल साओजी, मालिक जियालाल शाक्य, पर 2014 से 12.13 लाख रुपए बकाया है। बेटर होम, मालिक धीरज शाक्य, पर 2008 से 34.12 लाख रुपए बकाया है। सरदार की रसोई, मालिक बाबूलाल शाक्य, पर 2008 से 1.71 करोड़ रुपए बकाया है। और सोमलवाड़ा का ओपन प्लॉट नंबर 1924, मालिक फातिमा सिद्दीकी, पर 2001 से 4.74 करोड़ रुपए बकाया है।
यह कार्रवाई NMC के उस बड़े मिशन का हिस्सा है जिसके तहत महानगरपालिका ने सितंबर के आखिर तक 1,000 करोड़ रुपए प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने का टारगेट रखा है।
अफसरों का फोकस खासतौर पर बड़े डिफॉल्टरों पर है, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि हाई-वैल्यू प्रॉपर्टी से वसूली होने पर कॉर्पोरेशन की कुल रेवेन्यू कलेक्शन में अच्छा-खासा इजाफा होगा।
NMC कुछ प्रॉपर्टी में अवैध रूप से रह रहे लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई कर रही है, हालांकि कुछ मालिकों को हाई कोर्ट से बेदखली की कार्रवाई के खिलाफ स्टे मिल चुका है। इस बीच, संबंधित प्रॉपर्टी पर टैक्स वसूली के नोटिस भेजे जा चुके हैं।