JSW Group और Skoda Auto Volkswagen की भारत में साझेदारी, 51:49 हिस्सेदारी पर सहमति
JSW Group और Skoda Auto Volkswagen ने भारत में जॉइंट वेंचर बनाने के लिए मंगलवार को समझौते पर दस्तखत किए, फाइनल डील दिसंबर तक होने की उम्मीद है।
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JSW Group और Skoda Auto Volkswagen भारत में साथ मिलकर एक जॉइंट वेंचर खड़ा करने की तैयारी में हैं। दोनों कंपनियों के बीच इस बारे में एक अहम समझौता हुआ है, जिसमें JSW Group के पास 51 फीसदी और Skoda Auto Volkswagen के पास 49 फीसदी हिस्सेदारी रहेगी। मंगलवार को दोनों कंपनियों ने इस बारे में सामंजस्य करार यानी MoU पर साइन किए हैं। फाइनल डील दिसंबर तक पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस पार्टनरशिप का मकसद भारत में गाड़ियों के प्रोडक्शन को बढ़ाना और यहां लोकल लेवल पर ज्यादा काम-काज खड़ा करना है। भारत में कारों की मांग लगातार बढ़ रही है, और दुनियाभर के कार बनाने वाली कंपनियों के लिए देश एक बड़ा प्रोडक्शन हब बनता जा रहा है। ऐसे में इस जॉइंट वेंचर से आगे चलकर प्रोडक्शन, सप्लाई चेन और लोकलाइजेशन को रफ्तार मिल सकती है।
दोनों कंपनियों की अपनी-अपनी ताकत है। JSW Group को बड़े इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स संभालने, प्रोडक्शन और भारत में बिजनेस बढ़ाने का लंबा अनुभव है। वहीं Skoda Auto Volkswagen के पास गाड़ियों की टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, डिजाइन और दुनियाभर के ऑटोमोबाइल बाजार का बड़ा अनुभव है। दोनों की इन अलग-अलग खूबियों को मिलाकर भारतीय ग्राहकों के लिए नए व्हीकल प्रोजेक्ट खड़े करने का मौका बन सकता है।
हालांकि अभी कई सवालों के जवाब बाकी हैं। इस प्रस्तावित जॉइंट वेंचर में कितना निवेश किया जाएगा, प्रोडक्शन फैसिलिटी कहां-कहां खड़ी की जाएगी, या आगे चलकर कौन-कौन से मॉडल बनाए जाएंगे, इस बारे में अभी तक कोई पक्की जानकारी सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि आगे इलेक्ट्रिक गाड़ियों, लोकल पार्ट्स के इस्तेमाल और मॉडर्न प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी पर ज्यादा फोकस रह सकता है।
इस डील को सिर्फ दोनों कंपनियों के बीच का एक बिजनेस करार मानकर नहीं देखा जा रहा। गाड़ियों की बढ़ती डिमांड, प्रोडक्शन के लोकलाइजेशन और नई एनर्जी वाली गाड़ियों की तरफ बढ़ते रुझान को देखते हुए, JSW Group और Skoda Auto Volkswagen का यह जॉइंट वेंचर भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर की आगे की बड़ी घटनाओं में से एक साबित हो सकता है।
इससे रोजगार के नए मौके बनने, लोकल सप्लायर्स को बिजनेस मिलने और ऑटो कॉम्पोनेंट सेक्टर में मांग बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही प्रोडक्शन बढ़ने पर भारत से गाड़ियों के एक्सपोर्ट के लिए भी मजबूत आधार मिल सकता है। फिर भी फाइनल डील होने के बाद ही इस प्रोजेक्ट में निवेश, प्रोडक्शन का टारगेट और मार्केट स्ट्रैटजी पूरी तरह साफ हो पाएगी। इसी वजह से आने वाले कुछ महीनों में इस जॉइंट वेंचर से जुड़े ऐलानों पर ऑटो इंडस्ट्री की नजर बनी रहेगी। ग्राहकों के लिए भी इस डील से आगे चलकर और ज्यादा ऑप्शन और कॉम्पिटिटिव गाड़ियां मिलने की उम्मीद है।