गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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02:10 IST

जासूस बनना है? RAW, IB और NIA में एंट्री का असली रास्ता जानिए

फिल्मों में दिखने वाली गुप्तचरों की दुनिया असल जिंदगी में उतनी आसान नहीं है, जितनी पर्दे पर दिखती है।

जासूस बनना है? RAW, IB और NIA में एंट्री का असली रास्ता जानिए तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

फिल्मों और वेब सीरीज में गुप्तचरों की जिंदगी बड़ी रोमांचक दिखाई जाती है। अंधेरे कमरे में सीक्रेट कोड डिकोड करना, पलक झपकते ही दुश्मन को मात देना और हर मिशन में देश का नाम रोशन करना, ये सब देखने में जितना कूल लगता है, असल जिंदगी में उतनी ही मुश्किल जिम्मेदारी होती है। पर्दे के पीछे रहकर देश की हिफाजत करने वाले इन गुमनाम हीरो को सीक्रेट एजंट या गुप्तचर अधिकारी कहा जाता है।

आम लोगों की नजर से दूर रहकर देश की सुरक्षा करने वाली ये एजेंसियां किसी भी मुल्क की पहली और आखिरी ढाल होती हैं। भारत में भी कई ताकतवर संस्थाएं देश के अंदर और बाहर, दोनों तरफ के दुश्मनों की हर हरकत पर बारीक नजर रखती हैं। लेकिन इन एजेंसियों का हिस्सा बनना कोई बच्चों का खेल नहीं है। इसके लिए किताबी ज्ञान के साथ-साथ तेज दिमाग, जबरदस्त प्रेजेंस ऑफ माइंड और देश के प्रति अटूट निष्ठा भी होनी चाहिए।

अब सवाल यह है कि इस गुप्त दुनिया में एंट्री कैसे मिलती है। क्या असल जिंदगी में कोई सीधे इन गुप्तचर संस्थाओं तक पहुंच जाता है, या इसके लिए कोई फॉर्म भरना पड़ता है और एक लंबी, कठिन प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है?

देश की सीमाओं के बाहर की गुप्त जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी रॉ यानी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग की होती है। देश के अंदर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने का काम आईबी यानी इंटेलिजेंस ब्यूरो और एनआईए यानी नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी करती हैं। राज्यों की स्टेट इंटेलिजेंस यूनिट्स स्थानीय स्तर पर सुरक्षा संभालती हैं। इन सभी गुप्तचर एजेंसियों के काम करने का तरीका अलग-अलग होता है, लेकिन सबका मकसद एक ही है, देश की सुरक्षा।

इन एजेंसियों में शामिल होने का कोई तय शॉर्टकट नहीं है। आम तौर पर जो पात्रता मांगी जाती है, उसमें किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी से कम से कम ग्रेजुएशन पूरा होना जरूरी है। उम्मीदवार की उम्र आम तौर पर 18 से 30 साल के बीच होनी चाहिए। उम्मीदवार का भारतीय नागरिक होना और उस पर कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड न होना भी जरूरी शर्त है। इसके अलावा मानसिक और शारीरिक सेहत भी बढ़िया होनी चाहिए, क्योंकि कई बार बहुत मुश्किल और तनाव भरे हालात में काम करना पड़ सकता है।

बहुत से लोग सोचते हैं कि जासूसों की भर्ती चुपचाप, गुपचुप तरीके से होती है, लेकिन ऐसा नहीं है। ज्यादातर भर्ती देश की मुख्य कॉम्पिटिटिव एग्जाम के जरिए ही होती है। UPSC की सिविल सर्विस परीक्षा पास करके प्रशासनिक पदों के रास्ते गुप्तचर विंग का हिस्सा बना जा सकता है। इसके अलावा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन की SSC CGL परीक्षा और आईबी की IB ACIO परीक्षा के जरिए असिस्टेंट सेंट्रल इंटेलिजेंस ऑफिसर जैसे पदों पर सीधी भर्ती होती है। इन परीक्षाओं में रीजनिंग, इंग्लिश, क्वांटिटेटिव एप्टिट्यूड और जनरल अवेयरनेस के सवाल पूछे जाते हैं।

सिर्फ डिग्री या सरकारी परीक्षा पास कर लेना ही काफी नहीं है। एक कामयाब गुप्तचर अधिकारी बनने के लिए कुछ खास व्यावहारिक गुण भी होने चाहिए। तेज ऑब्जर्वेशन स्किल, यानी छोटी-छोटी बातें भी याद रखना, बहुत जरूरी है। इसके साथ ही एनालिटिकल माइंड, शांत स्वभाव, कई भाषाओं की जानकारी और जबरदस्त धैर्य भी बहुत मायने रखता है। अक्सर असली पहचान छुपाकर काम करना पड़ता है, इसलिए मानसिक तौर पर बहुत मजबूत होना जरूरी है। कुल मिलाकर, देशसेवा का सच्चा जज्बा और हर हालात में दिमाग को सही रखने की काबिलियत ही इस मुश्किल मगर रोमांचक सफर में आगे ले जा सकती है।

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