मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:20 IST

होटल के कमरे में मिलने वाले पुराने टॉवेल का आगे क्या होता है, जानिए

होटल से चेकआउट के बाद टॉवेल कचरे में नहीं जाता, बल्कि सफाई के काम, दान या रिसाइक्लिंग में इस्तेमाल होता है।

होटल के कमरे में मिलने वाले पुराने टॉवेल का आगे क्या होता है, जानिए
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

होटल के कमरे में घुसते ही सबसे पहले नजर जाती है बाथरूम पर, और वहां टंगे मोटे, मुलायम, सफेद टॉवेल पर। हाथ लगाते ही मुलायम लगने वाला यह टॉवेल कुछ महीनों बाद पुराना हो जाता है, लेकिन तब उसका क्या होता है, यह ज्यादातर लोगों को पता नहीं होता। सच यह है कि कोई भी बड़ा होटल पुराने टॉवेल को सीधे कचरे में नहीं फेंकता।

दरअसल एक ही टॉवेल को रोज सैकड़ों मेहमान इस्तेमाल करते हैं और रोज उसे धोया जाता है। गर्म पानी और केमिकल में बार-बार धुलने से कुछ महीनों में ही टॉवेल पतला होने लगता है। उसकी सफेदी कम हो जाती है, हल्का पीलापन आने लगता है, और सबसे जरूरी बात यह कि पानी सोखने की उसकी क्षमता घट जाती है। फाइव स्टार होटल में मेहमान को ऐसा पुराना, पतला टॉवेल नहीं दिया जा सकता, इसलिए उसे कमरों से हटा लिया जाता है। मगर इसका मतलब यह नहीं कि वह टॉवेल बेकार हो गया।

क्लीन इंडिया जर्नल के मुताबिक होटल इंडस्ट्री में पुरानी चादरों और टॉवेल को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए कई तरीके अपनाए जाते हैं। अगर टॉवेल थोड़ा पुराना हुआ है लेकिन कपड़ा अभी भी ठीक है, तो उसे दूसरे काम में लगा दिया जाता है। सबसे ज्यादा इस्तेमाल सफाई के लिए होता है। होटल का स्टाफ उसी टॉवेल को फाड़कर फडका बना लेता है, जिससे कमरे की धूल पोंछी जाती है, शीशे साफ किए जाते हैं और फर्श पोंछा जाता है। कई बार जब पेंटिंग या मरम्मत का काम चल रहा हो, तो फर्श खराब न हो इसके लिए नीचे यही टॉवेल बिछा दिए जाते हैं।

हर होटल का तरीका अलग होता है। कुछ बड़े होटल ऐसे पुराने मगर अच्छी हालत वाले टॉवेल और चादरें जरूरतमंद लोगों को दान भी करते हैं। एक रिपोर्ट में बताया गया था कि कुछ होटल अपने पुराने टॉवेल अनाथाश्रम या धर्मार्थ संस्थाओं को दे देते हैं। एक होटल समूह ने तो पुराने टॉवेल पशु आश्रय केंद्रों को दान करने की पहल भी शुरू की थी, जहां ठंड से बचाने के लिए कुत्तों और बिल्लियों के लिए इन टॉवेल का इस्तेमाल किया जाता है।

और जब टॉवेल पूरी तरह जीर्ण हो जाता है, फट जाता है और उसका किसी भी काम के लिए इस्तेमाल नहीं हो सकता, तब उसे रिसाइकल किया जाता है। छोटे टुकड़ों में काटकर उसके धागों से नई चीजें बनाई जाती हैं। भारत में इसके लिए खास पहल भी चल रही है, जिसमें होटल और अस्पतालों से पुराने टॉवेल और चादरें इकट्ठा कर उनसे पायदान, गाड़ी पोंछने के फडके या नया कपड़ा तैयार किया जाता है। तो अगली बार होटल में सफेद टॉवेल देखें तो उसके इस लंबे सफर के बारे में जरूर सोचिएगा।

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