HIV/AIDS संकट में लेस्बियन महिलाओं की मदद की याद है LGBTQ+ का पहला अक्षर L
LGBTQ+ में सबसे पहले L क्यों आता है, इसका जवाब सिर्फ शब्दों के क्रम में नहीं, 1980 के दशक के HIV/AIDS संकट में छिपा है।
LGBTQ+ शब्द आज पूरी दुनिया में जाना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस नाम का पहला अक्षर L यानी Lesbian ही क्यों है? इसका जवाब सिर्फ भाषा या शब्दों के क्रम में नहीं मिलता। इसके पीछे HIV/AIDS के संकट के दौर की एक कहानी है, जिसमें लेस्बियन महिलाओं ने बड़ी मदद की थी।
1980 के दशक की शुरुआत में पश्चिमी समाज में HIV/AIDS को लेकर डर, गलतफहमी और बदनामी का माहौल था। कई HIV पॉजिटिव समलैंगिक पुरुषों को अपने परिवार से सहारा नहीं मिलता था। बहुत सी जगहों पर उन्हें अस्पताल और इलाज की सुविधाएं भी नहीं मिल पाती थीं। समाज में भी और इलाज के मामले में भी उन्हें भेदभाव झेलना पड़ता था।
ऐसे माहौल में कुछ लेस्बियन महिलाएं आगे आईं और HIV/AIDS से जूझ रहे पुरुषों की निजी तौर पर मदद की। कुछ महिलाओं ने नर्स, केयरवर्कर, दोस्त और वॉलंटियर बनकर मरीजों की रोजमर्रा की जरूरतें संभालीं। इसके लिए वे अपनी तरफ से बढ़कर मदद करती रहीं। उस वक्त लेस्बियन महिलाओं के समुदाय की इस मदद से अकेलेपन से लड़ रहे कई लोगों को भावनात्मक और सामाजिक सहारा मिला।
इस संकट का असर खून की सप्लाई पर भी पड़ा। अमेरिका में 1983 में Public Health Service ने यौन रूप से सक्रिय समलैंगिक (Gay) और उभयलिंगी (Bisexual) पुरुषों के कुछ समूहों के रक्तदान करने पर रोक लगा दी थी। उस समय HIV की पहचान के लिए आज जैसी आधुनिक जांचें भी मौजूद नहीं थीं।
इसी दौर में लेस्बियन समुदाय की महिलाओं ने कई जगहों पर रक्तदान शिविर और अभियान चलाए, ताकि खून की सप्लाई में मदद हो सके। San Diego Blood Sisters जैसे समूहों के 1983 से 1992 के बीच चले अभियानों का ऐतिहासिक अध्ययन भी उपलब्ध है।
तो LGBTQ+ में L अक्षर लेस्बियन समुदाय की नुमाइंदगी करता है। लेकिन इस अक्षर से जुड़ी कहानी सिर्फ पहचान की नहीं है। यह मुश्किल वक्त में समुदाय के भीतर एक दूसरे का साथ देने की भी याद दिलाती है। HIV/AIDS संकट में लेस्बियन महिलाओं की देखभाल, रक्तदान अभियानों और सामाजिक सक्रियता के सम्मान में LGBTQ+ का पहला अक्षर L, यानी लेस्बियन, लिखा जाता है।