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02:17 IST

हिंदी दिवस : संविधान सभा से आज तक, कैसे बनी हिंदी राजभाषा

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा घोषित किया था, आज पूरे देश में हिंदी दिवस मनाया जा रहा है।

हिंदी दिवस : संविधान सभा से आज तक, कैसे बनी हिंदी राजभाषा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

भाषा सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं होती, वो समाज की सोच, संस्कृति और परंपरा को भी अपने साथ लेकर चलती है। भारत जैसे देश में जहां इतनी भाषाएं और इतनी विविधता है, वहां हिंदी ने बरसों से सारे इलाकों को एक साथ जोड़े रखने का काम किया है। हर साल 14 सितंबर को पूरे देश में हिंदी दिवस बड़े सम्मान और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह दिन याद दिलाता है कि हमें अपनी भाषाई विरासत पर गर्व करना चाहिए और मातृभाषा के साथ-साथ देश की बाकी सभी भाषाओं का भी सम्मान करना चाहिए।

आजादी के बाद भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि सरकारी कामकाज और आपसी बातचीत के लिए कौन सी भाषा चुनी जाए। इस पर लंबी बहस के बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया - हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के तौर पर अपनाया गया। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343(1) के तहत हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला। इसके बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में 1953 से हर साल 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

हिंदी सिर्फ किसी एक राज्य की भाषा नहीं है, बल्कि करोड़ों भारतीयों के दिल की भावनाओं को बयां करने का माध्यम बन गई है। उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक व्यापार, उद्योग, पढ़ाई-लिखाई और मनोरंजन के जरिए हिंदी ने लोगों के बीच एक अपनापन बनाया है। दुनिया की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी का नाम शामिल है। भारत के अलावा मॉरिशस, फिजी, सूरीनाम, गयाना, नेपाल और त्रिनिदाद जैसे कई देशों में भी हिंदी बड़े पैमाने पर बोली और समझी जाती है। डिजिटल दौर और सोशल मीडिया के आने के बाद पूरी दुनिया में हिंदी के इस्तेमाल में जबरदस्त तेजी आई है।

हिंदी दिवस के मौके पर देशभर के स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, सांस्कृतिक संस्थाओं और सरकारी दफ्तरों में हिंदी पखवाड़ा या खास कार्यक्रम रखे जाते हैं। बच्चों में भाषा के प्रति लगाव पैदा करने के लिए निबंध लेखन, वाद-विवाद प्रतियोगिता, कवि सम्मेलन, भाषण प्रतियोगिता और नाट्य प्रस्तुति जैसी अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए युवा पीढ़ी को हिंदी साहित्य से रूबरू कराया जाता है और उसकी समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाया जाता है।

आजकल अंग्रेजी और बाकी विदेशी भाषाओं का असर बढ़ता जा रहा है, ऐसे में अपनी देसी भाषाओं को बचाए रखना बेहद जरूरी हो गया है। हिंदी दिवस का संदेश साफ है - अपनी भाषा पर गर्व करना चाहिए। हिंदी भारतीय पहचान का आईना है। रोजमर्रा की जिंदगी में, टेक्नोलॉजी में और सरकारी कामकाज में हिंदी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। अपनी मातृभाषा की खूबसूरती बनाए रखते हुए बाकी सभी क्षेत्रीय भाषाओं को बराबर का सम्मान देना ही हिंदी दिवस को सही मायने में सार्थक बनाएगा।

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