गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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02:36 IST

हवाई में डेढ़ लाख देसी पेड़ लगाकर 20 साल में जंगल फिर हरा, दुर्लभ पक्षी लौटे

अमेरिका के हवाई द्वीप पर बंजर हो चुकी जमीन पर डेढ़ लाख कोआ पेड़ लगाकर जंगल फिर से खड़ा किया गया, जिसके बाद दुर्लभ अकियापोलौ पक्षी वहां लौट आया।

हवाई में डेढ़ लाख देसी पेड़ लगाकर 20 साल में जंगल फिर हरा, दुर्लभ पक्षी लौटे
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अमेरिका के हवाई द्वीप से पर्यावरण को लेकर एक बहुत अच्छी खबर आई है, जो दुनिया भर के पर्यावरण प्रेमियों के लिए मिसाल बन गई है। बीसवीं सदी के आखिरी दशकों में हवाई के सैकड़ों एकड़ में फैला घना जंगल खत्म होकर बंजर घास के मैदान में बदल गया था। हवाई के 'बिग आइलैंड' पर मौजूद हकालौ फॉरेस्ट नेशनल वाइल्डलाइफ रिफ्यूज की जमीन तेजी से बंजर होती जा रही थी। बढ़ती इंसानी दखलअंदाजी और प्राकृतिक मुसीबतों की वजह से यह हरा-भरा इलाका सूखता चला जा रहा था, जिससे वहां रहने वाले दुर्लभ पक्षियों और वाइल्डलाइफ का वजूद खतरे में आ गया था।

इस गंभीर हालत को देखते हुए 1990 के दशक में दुनिया भर के पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों ने इस जंगल को फिर से जिंदा करने का एक बड़ा फैसला लिया। 1992 में पेड़ लगाने का बड़ा अभियान शुरू हुआ। इसके बाद अगले पांच सालों में 'यूएस फॉरेस्ट सर्विस' ने इस बंजर घास वाली जमीन पर डेढ़ लाख 650 देसी 'कोआ' पेड़ लगाए। इस बड़े अभियान का मकसद सिर्फ कागजों पर पेड़ लगाना नहीं था, बल्कि हवाई में खत्म हो रहे बहुत दुर्लभ पक्षियों के लिए उनका नैचुरल घर और घोंसला बनाने की सुरक्षित जगह फिर से तैयार करना था।

पेड़ लगाने के लिए कोआ पेड़ को ही क्यों चुना गया, इसके पीछे एक अहम वजह थी। कोआ हवाई का ही एक लोकल पेड़ है और वहां के जंगलों में इसे एक अहम और बुनियादी प्रजाति माना जाता है। इस पेड़ की खासियत यह है कि यह बहुत बंजर, सूखी और पत्थर वाली जमीन में भी तेजी से बढ़ सकता है। जमीन में पोषक तत्व फिर से पैदा करने की ताकत इस पेड़ में होती है। इसी वजह से वैज्ञानिकों ने किसी बाहरी प्रजाति के बजाय लोकल कोआ पेड़ पर पूरा भरोसा दिखाया।

पेड़ लगाने के बाद के दो दशकों में यानी लगातार 20 साल से ज्यादा की नजर रखने के बाद रिसर्च करने वालों के हाथ जो नतीजे लगे, उससे पूरी वैज्ञानिक दुनिया हैरान रह गई। जिस घास वाली जमीन पर कभी किसी पक्षी की आवाज तक सुनाई नहीं देती थी, वहां आज हजारों पक्षियों की चहचहाहट सुनाई देती है। दो दशकों में यह डेढ़ लाख पेड़ एक खूबसूरत, घने और भरे-पूरे जंगल में बदल गए हैं। 'हकालौ प्रोजेक्ट' को आज हवाई में चलाए गए सबसे कामयाब जंगल बहाली अभियानों में से एक माना जा रहा है।

हवाई द्वीप की एक खासियत यह है कि वहां के लोकल पक्षी और प्रजातियां दुनिया में कहीं और नहीं मिलती हैं। इस वजह से यहां का जंगल खत्म होना इन प्रजातियों के हमेशा के लिए धरती से मिट जाने जैसा होता। हकालौ की इस स्टडी ने साबित कर दिया है कि इंसान सच्ची कोशिश करे तो प्रकृति फिर से हरी-भरी हो सकती है। जंगल फिर से बढ़ने के बाद शुरुआत में कुछ लोकल पक्षियों ने तुरंत वहां बसना शुरू कर दिया, जबकि कुछ शर्मीली प्रजातियों को लौटने में थोड़ा ज्यादा वक्त लगा।

सबसे खास बात यह रही कि हवाई का बेहद दुर्लभ और लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंचा अकियापोलौ पक्षी इस फिर से बहाल हुए जंगल में लौट आया है, ऐसा साफ देखा गया है। स्टडी के दौरान इन पक्षियों की तादाद लगातार बढ़ती हुई दिखी है। इस बड़ी कामयाबी से दुनिया भर में खत्म हो रहे जंगलों को बचाने और वाइल्डलाइफ का घर फिर से बनाने के लिए एक नई उम्मीद वाला रास्ता मिला है।

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