हमें टाइम नहीं है, तुम ही अंत्यसंस्कार कर लो, बाप के अंत्यसंस्कार को लेकर बेटे के ऐसे शब्द, आखिर मामला क्या है
छत्रपती संभाजीनगर में एक बुजुर्ग की वृद्धाश्रम में मौत हो गई। बेटे ने पहले घर ले जाने से मना किया, फिर मौत के बाद अंत्यसंस्कार के लिए भी टाइम नहीं है कहकर टाल दिया।
छत्रपती संभाजीनगर से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सबको हैरान कर दिया। कुछ दिन पहले एक ८० साल के बुजुर्ग रेलवे स्टेशन के इलाके में अर्धांगवायु की बीमारी से परेशान हालत में मिले थे। उनकी हालत देखकर उन्हें घाटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां इलाज होने के बाद बुजुर्ग को एक वृद्धाश्रम में भेज दिया गया, क्योंकि उस वक्त तक ये पता नहीं था कि उनका परिवार कहां है।
वृद्धाश्रम की संचालिका उमा तुपे ने बुजुर्ग के परिवार को ढूंढना शुरू किया। काफी कोशिशों के बाद आखिरकार उनके बेटे और बहू का पता चल गया। परिवार का पता मिलने के बाद बेटे से संपर्क किया गया कि वो अपने पिता को घर ले जाए। लेकिन बेटे ने साफ मना करते हुए कहा कि घर में शादी है इसलिए जगह कम पड़ जाएगी। उसने कहा कि पहले शादी हो जाने दो, उसके बाद देखेंगे। इस वजह से बुजुर्ग को वृद्धाश्रम में ही रखा गया और वो वहीं रहते रहे।
इसी बीच बुजुर्ग की अर्धांगवायु की बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती गई। आखिरकार रविवार सुबह ७ बजे उनकी मौत हो गई। संचालिका तुपे ने तुरंत बेटे को फोन कर मौत की खबर दी और अंत्यसंस्कार के लिए शव लेने की गुजारिश की। लेकिन बेटे ने आगे से जवाब दिया कि वक्त नहीं है, हम नहीं आ पाएंगे, तुम ही अंत्यसंस्कार कर लो। तुपे ने बार-बार गुजारिश की, लेकिन बेटे की तरफ से कोई ठीक जवाब नहीं मिला। आखिर में तंग आकर तुपे ने पुलिस में शिकायत करने की तंबी दे दी।
कानूनी कार्रवाई की धमकी मिलते ही कुछ ही देर में बेटा वृद्धाश्रम पहुंच गया और शव अपने कब्जे में ले लिया। जिस बाप ने बेटे को पाल-पोसकर बड़ा किया, उसी बाप के लिए जिंदगी के आखिरी दौर में वृद्धाश्रम का ही सहारा बना। और मौत के बाद भी अंत्यसंस्कार के लिए बेटे का इंतजार करना पड़ा, यही इस पूरी घटना की सबसे दुखद सच्चाई बनकर सामने आई।