गोंडवाना विद्यापीठ के नए परिसर का प्लान भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाओ: फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गडचिरोली में गोंडवाना विद्यापीठ के नए कैंपस के डिजाइन पर दिए निर्देश, 1100 करोड़ रुपये का प्लान तैयार
गडचिरोली में गोंडवाना विद्यापीठ का जो नया परिसर बनने जा रहा है, उसकी डिजाइन में आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के साथ-साथ विद्यापीठ की आने वाले समय की जरूरतों का भी खास ख्याल रखा जाए। यह निर्देश मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में 11 तारीख को दिए। उन्होंने कहा कि परिसर में गोंड वास्तुकला और आधुनिक शैली का मेल दिखना चाहिए, इसे प्राथमिकता दी जाए।
दरअसल गडचिरोली में गोंडवाना विद्यापीठ के लिए 186 एकड़ जमीन पर शैक्षणिक संकुल, प्रशासकीय इमारत और छात्रों के लिए वसतिगृह बनाने का आराखड़ा तैयार किया गया है। इसी आराखड़े के प्रेजेंटेशन के दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस मार्गदर्शन कर रहे थे।
इस मौके पर राज्य के अर्थ व नियोजन राज्यमंत्री एडवोकेट आशिष जयस्वाल, गोंडवाना विद्यापीठ के प्रकुलगुरू डॉ श्रीराम कावळे, सार्वजनिक बांधकाम विभाग के मुख्य अभियंता संभाजी माने, अधीक्षक अभियंता सोनाली चव्हाण, वास्तु विशारद जगन्नाथ तावडेकर, विद्यापीठ के अभियंता जितेंद्र अंबागडे और उमेश राठोड मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गडचिरोली इलाके में जहां औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल माहौल बन रहा है, वहीं छात्रों के लिए शैक्षणिक और रिसर्च गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलना चाहिए। इसके लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं तैयार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विद्यापीठ की इमारत गोंड वास्तुकला की विरासत को संजोए रखते हुए आधुनिक शैली का संगम हो, इसके लिए देश और राज्य के बेहतरीन शैक्षणिक परिसरों की इमारतों का अध्ययन करके सबसे बेहतर परिसर विकसित किया जाए।
गोंडवाना विद्यापीठ को 186 एकड़ जमीन पर विकसित किया जा रहा है, जिसके लिए 27 लाख वर्ग फुट जगह उपलब्ध हुई है। यह पूरा परिसर शिक्षा और रिसर्च के लिहाज से बेहद अहम है। यहां अलग-अलग शैक्षणिक गतिविधियों के लिए आधुनिक सुविधाएं बनाते वक्त पर्यावरण के हिसाब से भी यह परिसर समृद्ध होना चाहिए। इस परिसर के विकास के लिए 1100 करोड़ रुपये का आराखड़ा तैयार किया गया है, जिसमें से केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से 157 करोड़ रुपये मंजूर किए जा चुके हैं।
राज्यमंत्री एडवोकेट आशिष जयस्वाल ने कहा कि विद्यापीठ की इमारत बनाते वक्त वह यहां की प्रकृति के साथ एकरूप हो और उसमें आधुनिक सुविधाएं भी हों, इसका ध्यान रखा जाए। सार्वजनिक बांधकाम विभाग के मुख्य अभियंता संभाजी माने ने बताया कि विद्यापीठ परिसर में संकुल बनाते वक्त छात्रों के लिए सुविधाएं, शैक्षणिक गतिविधियां और रिसर्च को शामिल करते हुए एक सुंदर इमारत बनाने की कोशिश की जा रही है। परिसर का विकास करते वक्त वास्तु शैली का अध्ययन करके ही मुख्य इमारत का निर्माण किया जाएगा।
बताया गया कि इस परिसर में पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन बिल्डिंग, ऊर्जा की बचत, 27 अलग-अलग शैक्षणिक कोर्सेज के लिए जरूरी इमारतें, कृत्रिम तालाब, 6 करोड़ लीटर पानी जमा करने की क्षमता, औषधीय उद्यान और छात्रों के लिए अच्छा शैक्षणिक माहौल बनाने को प्राथमिकता दी जाएगी।