गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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18:44 IST

गणेशोत्सव में भी फूलों को नहीं मिला अच्छा भाव, किसान परेशान

पुरंदर तालुका के फूल उत्पादक किसानों को गणेशोत्सव के मौके पर भी उम्मीद के मुताबिक बाजार भाव नहीं मिल रहा, जिससे लागत निकालना मुश्किल हो गया है।

गणेशोत्सव में भी फूलों को नहीं मिला अच्छा भाव, किसान परेशान
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

सासवड में इस वक्त गणेशोत्सव चल रहा है, और इसके बाद आने वाले पितृ पखवाड़ा, नवरात्र और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों में फूलों की मांग हमेशा जबरदस्त रहती है। यही सोचकर किसानों ने अलग-अलग किस्म के फूलों की खेती बड़े पैमाने पर की थी। अभी फूलों की तोड़ाई चल रही है और बाजार में आवक के साथ-साथ मांग भी अच्छी है। लेकिन इसके बावजूद किसानों को जितना भाव मिलने की उम्मीद थी, उतना नहीं मिल रहा, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर खर्च कैसे निकलेगा।

इतनी मेहनत और इतना उत्पादन होने के बाद भी मन के मुताबिक कमाई नहीं हो पा रही, जिसकी वजह से किसान मुसीबत में फंस गए हैं। पुरंदर तालुका में त्योहारों और उत्सवों को देखते हुए किसान गुलाब, जरबेरा, मोगरा के साथ ही झेंडू की कई किस्मों, बिजली और कापरी जैसे फूल बड़ी मात्रा में उगाते हैं। इस साल मौसम भी किसानों के साथ नहीं रहा, कम बारिश की वजह से खरीफ की फसल बचाने के लिए उन्हें काफी जूझना पड़ा है। इसके बावजूद किसानों ने बड़ी मेहनत से फसल तैयार की है। कम पानी में भी फसलें डटकर खड़ी हैं। कहीं-कहीं बाजरी में बालियां आने की तैयारी है, तो कापरी, झेंडू, बिजली और तेरडा जैसे फूलों की तोड़ाई हर तरफ चल रही है।

गणेशोत्सव से पहले भाव सबसे नीचे गिर गए थे। किसान अभी खेतों में तरह-तरह के फूल तोड़ते हुए दिख रहे हैं। उन्हें उम्मीद थी कि गणेशोत्सव के चलते फूलों का भाव अच्छा मिलेगा और उससे बढ़िया कमाई हो जाएगी। लेकिन बाजार की हालत उम्मीद से बिल्कुल अलग निकली, भाव अपेक्षा से बहुत कम मिलने की वजह से किसानों के सामने सवाल है कि खर्च निकलेगा भी या नहीं। हर साल गणेशोत्सव के दौरान झेंडू और दूसरे फूलों को कम से कम 100 रुपये प्रति किलो का भाव मिलता है। लेकिन इस साल तो 50 रुपये किलो भी नहीं मिल रहा। गणेशोत्सव बिल्कुल सिर पर होने के बावजूद 20 से 30 रुपये तक का सबसे कम भाव मिल रहा था। उसमें भी सिर्फ 20 से 30 रुपये की बढ़ोतरी होकर अब लगभग 50 से 60 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा है।

अगर किसानों ने की गई मेहनत, अब तक हुए खर्च, फूलों की बुवाई से लेकर तोड़ाई और फिर बाजार तक ले जाने का पूरा हिसाब लगाया जाए, तो उसमें कुछ भी नहीं बचता। तोड़ाई का खर्च निकले और कुछ पैसे हाथ में रहें, इसके लिए कई किसान घर के लोगों से ही काम करा रहे हैं। वहीं कई किसानों को बाहर से मजदूर बुलाना पड़ रहा है। एक मजदूर को कम से कम 300 रुपये मजदूरी देनी पड़ती है। इस हिसाब से दिनभर पांच लोग फूल तोड़ें, तो उससे होने वाली कमाई से खर्च भी पूरा नहीं होता। फूल उत्पादक किसान मधुकर कुंभारकर ने कहा कि कम से कम 80 से 100 रुपये भाव मिलना चाहिए, तभी खर्च निकल पाएगा।

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