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02:49 IST

ईरान का अमेरिका को साफ जवाब, शर्तें पूरी हुए बिना बात नहीं

ईरान का अमेरिका को साफ जवाब, शर्तें पूरी हुए बिना बात नहीं
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव अब बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान बातचीत के लिए बेताब है, लेकिन ईरान ने इस दावे को फौरन और सख्ती से खारिज कर दिया है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रझाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके अमेरिका को चेतावनी दी कि जब तक ईरान की सारी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं होगी। रझाई ने साफ कहा कि ट्रंप लगातार अपने बयान बदलकर दुनिया को गुमराह कर रहे हैं।

पश्चिम एशिया में जंग के बादल और गहरे होते जा रहे हैं, और दोनों देशों के बीच यह जुबानी जंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गई है। ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि आर्थिक और सैन्य रूप से कमजोर हो चुका ईरान जल्द से जल्द और किसी भी हालत में अमेरिका के साथ करार करने के लिए बहुत उत्सुक है। ट्रंप ने कहा था कि अब अमेरिका उनसे दोबारा बात करेगा या नहीं, यह फैसला वे खुद लेंगे, मगर वे इस विचार पर गौर करने को तैयार हैं। इस बयान के बाद मध्यपूर्व में बातचीत की संभावनाएं जताई जा रही थीं, मगर रझाई की प्रतिक्रिया ने इन चर्चाओं पर पूरी तरह विराम लगा दिया।

ट्रंप के दावे का जवाब देते हुए ईरान के सुरक्षा प्रमुख रझाई ने अमेरिकी नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के रोज बदलते बयानों से कोई गुमराह न हो। कभी ट्रंप कहते हैं कि ईरान से कोई बातचीत नहीं होगी, तो अगले ही दिन कहते हैं कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं। इससे अमेरिका की अस्थिर सोच जाहिर होती है। रझाई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तेल कारोबार और समुद्री रास्तों से जुड़े हित अब बड़े पैमाने पर बदल चुके हैं, और अमेरिका ने पहले जो नुकसान पहुंचाया है उसकी भरपाई किए बिना और ईरान की मुख्य शर्तें माने बिना बातचीत की मेज पर बैठना मुमकिन नहीं है। उन्होंने और आक्रामक तेवर दिखाते हुए कहा कि अमेरिका या पश्चिमी देशों की बाद में नुकसान संभालने की कोशिशों से अब बिगड़े हालात नहीं सुधरेंगे, और ईरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा, यही तेहरान का अंतिम फैसला है।

इस पूरे राजनीतिक ड्रामे की जड़ में 18 जून को हुआ एक अहम करार है। 18 जून को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यपूर्व में संघर्ष कम करने के लिए एक सामंजस्य करार (MoU) पर दस्तखत हुए थे। इस करार में लेबनॉन समेत दूसरे इलाकों में सैन्य तनाव घटाना और 60 दिन के अंदर दोनों देशों का बातचीत करके एक अंतिम करार पर पहुंचना जरूरी बनाया गया था। इस 60 दिन की मियाद 17 अगस्त को ही खत्म हो चुकी है। लेकिन इस दौरान कोई ठोस हल न निकलने और दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप जारी रहने से अब यह करार पूरी तरह टूटता दिख रहा है। मियाद खत्म होने के बाद इलाके में सैन्य कार्रवाइयां काफी बढ़ गई हैं, और एक बार फिर सीधी जंग का खतरा पैदा हो गया है।

एक तरफ राजनैतिक स्तर पर शब्दों की जंग चल रही है, वहीं दूसरी तरफ असल में सैन्य हमले तेज हो गए हैं। सोमवार रात ईरान के दक्षिणी तट पर एक चौंकाने वाली घटना हुई, जहां दो ईरानी मछली पकड़ने वाली नावों पर सीधे ड्रोन हमले किए गए। ये हमले दक्षिणी इलाके के अहम बंदरगाह शहर कारागान के तट के पास और लारक द्वीप के पास हुए हैं। शक जताया जा रहा है कि इन हमलों के पीछे अमेरिकी या उनके सहयोगी देशों के ड्रोन हो सकते हैं। होर्मोझगान प्रांत के राजनीतिक और सुरक्षा मामलों के उप-गवर्नर अहमद नफिसी ने इस घटना की आधिकारिक पुष्टि की है। नफिसी ने बताया कि इस अचानक हुए हमले से नावों को भारी नुकसान पहुंचा है और कई स्थानीय मछुआरे समुद्र में लापता हो गए हैं। लापता मछुआरों को ढूंढने और बचाने के लिए इमरजेंसी सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। प्रशासन ने साफ कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही हमले का असली स्वरूप और नुकसान का आंकड़ा सामने आएगा। इस घटना से ईरान के तटीय इलाकों में भारी तनाव और डर का माहौल फैल गया है।

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