गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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01:34 IST

बुलढाणा में सूखे की मार, किसानों ने तहसील दफ्तर के आगे किया आक्रोश आंदोलन

जलगांव जामोद तालुका में बारिश गायब होने से खरीफ फसलें बरबाद, किसानों ने सूखा घोषित करने और फसल बीमा भरपाई देने की मांग की।

बुलढाणा में सूखे की मार, किसानों ने तहसील दफ्तर के आगे किया आक्रोश आंदोलन तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

बुलढाणा जिले के जळगाव जामोद तालुका में पिछले कई दिनों से बारिश गायब है और इसकी सीधी मार किसानों पर पड़ रही है। सोयाबीन, कापूस, तूर, मूग, उडीद और मका जैसी खरीफ की फसलें पानी न मिलने से खतरे में आ गई हैं। जिले के कई गांवों में सूखे जैसी हालत बन गई है। इसी को लेकर किसानों ने जळगाव जामोद तहसील कार्यालय के सामने आक्रोश आंदोलन किया और मांग रखी कि तालुका में तुरंत सूखा घोषित किया जाए।

आंदोलन का नेतृत्व युवा आंदोलक अक्षय पाटील ने किया। किसानों ने तहसीलदार के जरिए मुख्यमंत्री को एक निवेदन सौंपा। निवेदन में कहा गया कि बारिश न होने से हालत बहुत गंभीर हो गई है, इसलिए नुकसान झेल रहे किसानों को तुरंत आर्थिक मदद दी जाए, फसल बीमा की भरपाई मिले, कर्ज में राहत दी जाए और साथ ही जानवरों के लिए चारा और पानी का इंतजाम किया जाए।

इस बीच किसानों ने यह भी बताया कि 30 और 31 जुलाई को जळगाव जामोद तालुका में हुई अतिवृष्टि की वजह से कई नदियों और नालों में भारी बाढ़ आई थी। बाढ़ के चलते कुछ नदियों का बहाव बदल गया, कई जगहों पर किसानों के जानवर बह गए और फसलों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। आंदोलनकारियों की शिकायत है कि इतने दिन बाद भी बहुत से नुकसान झेल रहे किसानों को अब तक भरपाई नहीं मिली है।

आंदोलन में अनिलसिंह राजपूत, शिवदास खिरोडकर, अजय गिरी, वैभव जाणे, आकाश आटोळे, भागवत वाघ, अजहर शेख, त्रिलोकसिंग राजपूत, राजेंद्र राखुंडे, अशोक राखुंडे, अमोल बहादरे, सदाशिव जाणे, सय्यद भाई, नीलेश अवसार, सागर वाघ, सागर गवई, उल्हास झाटे, सचिन झाटे, ज्ञानेश्वर अंभोरे, नारायण खंडारे और गौतम तायडे समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

किसानों की मुख्य मांगें यह रहीं कि अतिवृष्टि से फसलों को हुए नुकसान की भरपाई तुरंत दी जाए, बाढ़ में बह गए जानवरों की आर्थिक भरपाई मिले, और आगे ऐसी बाढ़ की हालत न बने इसके लिए नदी-नालों की खुदाई कराई जाए। किसानों का कहना है कि जब तक इन मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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