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02:16 IST

बंगळुरू में कैंसर की नकली दवाओं का रैकेट, ९० से ज्यादा अस्पताल SIT की जांच के घेरे में

बंगळुरू पुलिस के स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम और ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट की जॉइंट जांच में कैंसर और लाइफ सेविंग दवाओं की नकली सप्लाई चेन का पर्दाफाश, एक फार्मेसी मालिक गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार।

बंगळुरू में कैंसर की नकली दवाओं का रैकेट, ९० से ज्यादा अस्पताल SIT की जांच के घेरे में
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

बंगळुरू में कैंसर की दवाओं और दूसरी लाइफ सेविंग मेडिसिन से जुड़े एक बड़े नकली दवा रैकेट की जांच पुलिस कर रही है। शहर के ९० से ज्यादा अस्पतालों और क्लिनिकों को नकली या दोबारा पैक की गई दवाएं सप्लाई की गई थीं या नहीं, इसकी पड़ताल अफसर कर रहे हैं। बंगळुरू पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट की साझा जांच में इस नेटवर्क से जुड़े होने के शक में एक फार्मेसी मालिक वीरेश कुमार जैन को गिरफ्तार किया गया है।

जांच में तब तेजी आई जब मिनर्वा सर्कल के पास कृपा हेल्थकेयर पर छापा मारकर भारी मात्रा में संदिग्ध नकली दवाएं जब्त की गईं। जांच करने वाले अफसरों को शक है कि यह जगह दवाओं की स्टोरेज और डिस्ट्रिब्यूशन के लिए इस्तेमाल हो रही थी। इसी नेटवर्क से अस्पतालों, क्लिनिकों और मेडिकल दुकानों को कैंसर की दवाएं, लाइफ सेविंग मेडिसिन और ICU इंजेक्शन सप्लाई किए जाने का आरोप है।

जांचकर्ताओं के मुताबिक ये दवाएं करीब ५० फीसदी डिस्काउंट पर सप्लाई की जा रही थीं। शक है कि सस्ते दाम पर दवाएं खरीदकर उन्हें अलग नाम से दोबारा ब्रांड किया जाता था और फिर ऊंचे दाम पर बेचा जाता था। इसके अलावा एक्सपायर हो चुकी दवाओं को नए डिब्बों में दोबारा पैक करके उन पर नकली लेबल लगाए जाने का भी आरोप है। इनमें से कुछ लेबल जानी-मानी दवा कंपनियों की ब्रांडिंग जैसे दिखते हैं, ऐसा जांचकर्ताओं का कहना है।

इन दवाओं को मेडिकल दुकानों, अस्पतालों और क्लिनिकों तक पहुंचाने या ट्रांसपोर्ट करने में मदद करने के शक में १५ से ज्यादा मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव भी जांच के दायरे में हैं। यह रैकेट दूसरे राज्यों तक भी फैला था या नहीं, इसकी भी जांच चल रही है। पुलिस के जॉइंट कमिश्नर (वेस्ट) और SIT प्रमुख वामसी कृष्णा ने बताया कि इस नेटवर्क का पूरा फैलाव अभी साफ नहीं हो पाया है।

दवाओं की मूवमेंट और पैसों के लेनदेन का पता लगाने के लिए पुलिस ने जब्त बैंक ट्रांजैक्शन, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और दूसरे दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस को शक है कि वीरेश कुमार पिछले पांच साल से यह संस्था चला रहा था। उसका प्रशांत नाम के एक शख्स से संबंध होने का आरोप है, जिसे इस नेटवर्क का मुख्य आरोपी और सरगना माना जा रहा है। प्रशांत फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

यह मामला १८ अगस्त को बंगळुरू साउथ डिस्ट्रिक्ट के बिदादी और दोड्डेरी इलाके के एक फार्महाउस पर पड़ी रेड से शुरू हुआ था। इस कार्रवाई में करीब ५ करोड़ रुपए कीमत की संदिग्ध नकली दवाएं जब्त की गई थीं। इसके साथ ही नकली बिल, इंजेक्शन भरने के उपकरण और नकली लेबल भी बरामद हुए थे।

फार्महाउस पर कार्रवाई के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया। कर्नाटक, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में १० से ज्यादा जगहों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इसी दौरान कृपा हेल्थकेयर और वीरेश कुमार का नाम सामने आया। अब SIT और ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट यह पता लगा रहे हैं कि इन संदिग्ध दवाओं की सप्लाई किन-किन अस्पतालों, क्लिनिकों और मेडिकल संस्थानों को हुई। इन दवाओं का इस्तेमाल मरीजों पर हुआ था या नहीं और यह पूरा रैकेट कितना बड़ा है, यह जांच के बाद ही साफ हो पाएगा। फिलहाल इस मामले में सिर्फ वीरेश कुमार की गिरफ्तारी हुई है, जबकि फरार प्रशांत की तलाश जारी है।

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