आमगाव में अवैध शराब बिक्री रोकने और नई दुकानों को परवाना न देने की मांग
आमगाव नगरपरिषद क्षेत्र और तालुका के कई गांवों में चल रही कथित अवैध शराब बिक्री पर सख्त कार्रवाई की मांग भारतीय जनकल्याण फाउंडेशन ने की है। फाउंडेशन का कहना है कि आमगाव नगरपरिषद हद में नई शराब दुकानों को परवाने न दिए जाएं। इसके साथ ही किडंगीपार में शराबबंदी की मांग को लेकर लोकशाही तरीके से आंदोलन करने वाले नागरिकों पर दर्ज हुए मामलों की कानूनी जांच कर, जो मामले इसके लायक हों उनमें केस वापस लेने की भी मांग रखी गई है।
इस बारे में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, जो गृहमंत्री भी हैं, उन्हें निवेदन सौंपा गया है। यह निवेदन तहसीलदार, तहसील कार्यालय आमगाव और राज्य उत्पादन शुल्क विभाग, गोंदिया के मार्फत भेजा गया।
यह निवेदन भारतीय जनकल्याण फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रा. इंजि. सुभाष आकरे और महामंत्री यशवंत मानकर के नेतृत्व में दिया गया। फाउंडेशन ने निवेदन में दावा किया कि आमगाव नगरपरिषद हद और आसपास के गांवों में अवैध शराब बिक्री का मामला अब गंभीर होता जा रहा है। इस मौके पर धनीराम मटाले, जयवंता मटाले, राजेंद्र मेंढे, श्वेता अग्रवाल, राणी काळसर्पे, निळू फुले, संजू देशकर, विजय कोरे, अशोक बोकडे, आकाश मेश्राम, संतोष कुमार सुरते, पिंकेश शेंडे, दीक्षा चव्हाण, सुनीता मटाले, घनश्याम मेंढे, हरिचंद उकरे, आनंदराव नंदागवळी, भालचंद उकरे, शशी हत्तीमारे जैसे कई नागरिक मौजूद थे।
निवेदन में बनगाव, किडंगीपार, माल्ही, पदमपूर, कुंभारटोली, बिरसी, रिसामा सहित आसपास के कई गांवों में अवैध शराब बिक्री का जिक्र किया गया है। फाउंडेशन के मुताबिक इन गांवों में शराब बिक्री की वजह से सामाजिक माहौल पर बुरा असर पड़ रहा है। शराब आसानी से मिलने से युवाओं में नशे की लत बढ़ने का खतरा है, जिसका असर परिवारों की आर्थिक हालत और सामाजिक सेहत पर पड़ रहा है, ऐसा फाउंडेशन का कहना है।
किडंगीपार में नागरिकों ने शराबबंदी की मांग को लेकर लोकशाही और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन किया था। निवेदन में बताया गया कि इस आंदोलन के दौरान कुछ नागरिकों पर मामले दर्ज किए गए। शराबबंदी की मांग करने वाले नागरिकों ने अपने इलाके की सामाजिक समस्या पर प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए यह आंदोलन किया था। इसलिए फाउंडेशन की मांग है कि इन मामलों की निष्पक्ष और कानूनी तरीके से समीक्षा की जाए। आंदोलन का मकसद, उस दौरान क्या हुआ और संबंधित मामलों के कानूनी पहलू जांचकर, जो मामले इसके योग्य हों उनमें शासन केस वापस लेने का फैसला करे, यह मांग फाउंडेशन ने रखी है।